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Showing posts from May, 2020

वैज्ञानिकों का नया दावा- वुहान वेट मार्केट से नहीं फैला कोरोना, चीनी चमगादड़ों में पहले से मौजूद था वायरस

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कोरोना महामारी के चार महीने के बादचीनी वैज्ञानिकों नेउस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि कोरोनावायरस वुहान के वेट मार्केटसे फैला है। यहां के वैज्ञानिकों का कहना है कि वेट मार्केट का रोल एक सुपर स्प्रेडर की तरह है, न कि किसीसोर्स की तरह। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन की इसे लेकर अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है। वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विशेषज्ञों ने रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा, कोरोना के संक्रमण का पहला मामला वुहान की बाजार से नहीं आया है। महामारी की शुरुआत में शोधकर्ताओं की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कोरोना वुहान के हुनान स्थित सी-फूड मार्केट से फैला। इसे अब चीनी वैज्ञानिकों ने इसे फिरनकार दिया है। डीएनए सबूतों में चमगादड़-पैंगोलिन पर शक वैज्ञानिकों ने डीएनए सबूतों के आधार पर दावा किया है कि नोवल कोरोनावायरस Sars-CoV2 चीनी चमगादड़ों में पहले से मौजूद था। इंसानों में इसके आने में किसी बीच के वाहक जानवर की भूमिका हो सकती है और इसमें पैंगोलिन पर सबसे ज्यादा शक है। चीन के सीडीसी ने भी दिया जवाब वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के ...

चीनी कम्पनी सिनोवेट ने कहा- हम 99% सफल होंगे, लेकिन ट्रायल के लिए हमारे यहां अब मरीज नहीं मिले रहे

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चीन मेंबायोटेक कम्पनी सिनोवेट ने कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने की दिशा में काफी आगे बढ़ चुकीहै, लेकिन उसे ट्रायल के लिए मरीज नहीं मिल रहे हैं। कम्पनी का दावा है कि उसका वैक्सीन99 फीसदी तकअसरदार साबित होगा। बायोटेक कम्पनी सिनोवेट का कहना है कि हमने वैक्सीन के 100 मिलियन डोज तैयार करने का लक्ष्य रखा है। वैक्सीन का नाम रखा कोरोनावेक एकेडमिक जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कम्पनी ने वैक्सीन का नाम "कोरोनावेक" रखा है। ट्रायल में पाया गया है कियह बंदर को कोरोनावायरस से सुरक्षित रखती है। शोधकर्ता का कहना है कि अगले दौर के ट्रायल के लिए चीन में कोविड-19 के मरीजों की संख्या काकम होना सबसे बड़ी समस्या है। तीसरे दौर के ट्रायल के लिए ब्रिटेन से बातचीत जारी कम्पनी अपने दूसरे दौर का ट्रायल कर रही है जिसमें 1 हजार वॉलंटियरोंको शामिल किया गया है। वैक्सीन का तीसरा ट्रायल ब्रिटेन में किया जाना है और इसके लिए बातचीत चल रही है। शोधकर्ता लुओ बायशन का कहना है कि मैं 99 फीसदी तक निश्चिंत हूं कि ये वैक्सीन कारगर साबित होगी। तस्वीर बायोटेक कम्पनी सिनोवेट के लैब की है जहां दूसरे चरण का ट...

सिगरेट-तंबाकू से कमजोर न करें अपने फेफड़े, इस बुरी आदत को छोड़ने के लिए सबसे अच्छा मौका है लॉकडाउन

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आज वर्ल्ड नो टोबैको डे है। इस साल की थीम है युवाओं को तम्बाकू और निकोटीन के दूर रखने के साथ उन झांसों से भी बचाना, जिससेकम्पनियां उन्हें धूम्रपान करने के लिए आकर्षित करती है। तम्बाकू से कमजोर हुए फेफड़े कोरोनावायरस को संक्रमण का दायरा बढ़ाने में मुफीद साबित हो रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लयूएचओ) और शोधकर्ताओं ने भी चेतावनी दी है। एक सर्वे कहता है, 27 फीसदी टीनएजर्स ई-सिगरेट पीते हैं। उनका मानना है कि ये स्मोकिंग नहीं सिर्फ फ्लेवर है और सेहत के लिए खतरनाक नहीं। इस पर मेदांता की विशेषज्ञ डॉ. सुशीला का कहना है, यह एक गलतफहमी है, वैपिंग भी सिगरेट पीने जितना खतरनाक है। वर्ल्ड नो टोबैको डे पर जानिए कोरोना और तम्बाकू का कनेक्शन, इस मुद्देपर डब्ल्यूएचओ और मेदांता हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सुशीला कटारिया की सलाह । लॉकडाउन तम्बाकू छोड़ने का सबसे अच्छा समय डॉ. कटारिया कहती हैं, तम्बाकू छोड़ने के लिए लॉकडाउन सबसे अच्छा समय है। तम्बाकू छोड़ने के लिए कम से कम 41 दिन का समय चाहिए होता है। अगर तीन महीने तक कोई तम्बाकू नहीं लेता या स्मोकिंग नहीं करता तो वापस इसे शु...

लॉकडाउन में इंसान का अकेलापन दूर कर रहे जानवर, देखें दुनिया भर में इनके बीच कैसे पनप रहे नए रिश्ते

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अधिकतर देशों में भले ही धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलना शुरू हो गया हो। लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में लोग या तो वर्क फ्रॉम होम पर हैं, या फिर उस सेक्टर से ताल्लुक रखते हैं, जिसे लॉकडाउन में भी शुरू होने की छूट नहीं मिली है। घर में अकेले समय बिताना आसान नहीं है। लेकिन, लॉकडाउन में दूसरे इंसानों से दूर रहना मना है, अन्य जीवों से नहीं। धरती पर और भी जीव हैं, जो लॉकडाउन में आपके अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। लोग ऐसा कर भी रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में जानवरों और इंसानों के बीच एक नया रिश्ता पनपता हुआ देखा जा सकता है। जानें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद उन लोगों की कहानियां जो कई तरह केजीवों के साथ खुशी से अपना लॉकडाउन बिता रहे हैं। इस इंजीनियर ने गिलहरियों के लिए खाने के साथ एक्टिविटीज का भी किया इंतजाम नासा और एप्पल में इंजीनियर रह चुके मार्क रॉबर जब अपने गार्डन में पक्षियों के लिए खाना रखते, तो पूरा खानाअकेले गिलहरियां ही चट कर जाती थीं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए मार्क ने अपने घर के बैकयार्ड में गिलहरियों के लिए एक सैट तैयार किया। इसमें अपने पसंदीदा खाने तक पहुंचने के लिए गि...

लॉकडाउन में इंसान का अकेलापन दूर कर रहे जानवर, देखें दुनिया भर में इनके बीच कैसे पनप रहे नए रिश्ते

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अधिकतर देशों में भले ही धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलना शुरू हो गया हो। लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में लोग या तो वर्क फ्रॉम होम पर हैं, या फिर उस सेक्टर से ताल्लुक रखते हैं, जिसे लॉकडाउन में भी शुरू होने की छूट नहीं मिली है। घर में अकेले समय बिताना आसान नहीं है। लेकिन, लॉकडाउन में दूसरे इंसानों से दूर रहना मना है, अन्य जीवों से नहीं। धरती पर और भी जीव हैं, जो लॉकडाउन में आपके अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। लोग ऐसा कर भी रहे हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में जानवरों और इंसानों के बीच एक नया रिश्ता पनपता हुआ देखा जा सकता है। जानें दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद उन लोगों की कहानियां जो कई तरह केजीवों के साथ खुशी से अपना लॉकडाउन बिता रहे हैं। इस इंजीनियर ने गिलहरियों के लिए खाने के साथ एक्टिविटीज का भी किया इंतजाम नासा और एप्पल में इंजीनियर रह चुके मार्क रॉबर जब अपने गार्डन में पक्षियों के लिए खाना रखते, तो पूरा खानाअकेले गिलहरियां ही चट कर जाती थीं। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए मार्क ने अपने घर के बैकयार्ड में गिलहरियों के लिए एक सैट तैयार किया। इसमें अपने पसंदीदा खाने तक पहुंचने के लिए गि...

मेक्सिकन रेस्तरां ने कोरोनाबर्गर बनाया, मालिक ने कहा- ठप पड़े बिजनेस को रफ्तार देगा ये हरे रंग का बर्गर

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कोलकाता में बनेकोरोनावायरस की शक्ल वालीसंदेश मिठाईके बाद अब कोरोनाबर्गर तैयार किया गया है। इसे मेक्सिको के एक रेस्तरां ने बनाया है। हरे रंग का बर्गर तैयार करने वाले रेस्तरां के मालिक रेने साउसेडो का कहना है कि महामारी के बाद व्यापार ठप पड़ा था। कोविड थीम वाले बर्गर को पेश करने के बाद सभी इसे खाना चाहते हैं। इसे खरीदने के लिए ग्राहकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। एक कोरोनाबर्गर की कीमत 300 रुपए है। रेने के रेस्तरां का नाम हॉट-डॉग जंकोज है। उनका कहना है कि कोरोनाबर्गर में बीफ, मोजरेला चीज, प्याज, पालक, टमाटर, बॉरबन सॉस और एवेकाडो का इस्तेमाल किया गया है। रेने के मुताबिक, यह आइडिया समान खरीदने आने वाले फ्रंटलाइन वर्कर के कारण आया जो इस बीमारी से लड़ते हुए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 39 वर्षीय रेने का कहना है कि एक दिन मैंने सोचा उन लोगों से मिलूं जो कोरोनावायरस की थीम वाला केक बना रहे हैं। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि क्या वह हमारे लिए कोरोना की शक्ल वाली ब्रेड बना सकते हैं, उन्होंने अगले ही दिन वैसी ही ब्रेड बनाकर दे दी। ब्रेड तैयार होने के बाद कोरोनाबर्गर तैयार किया गया। ...

लंबी रिंग फिंगर वाले पुरुषों को मौत का खतरा कम, 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च से पता चला

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ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोरोना के संक्रमण और उंगुलियों के बीच एक कनेक्शन ढूंढ़ने का दावा कियाहै। उनका कहना है कि ऐसे पुरुष जिनकी रिंग फिंगर (अनामिका) लम्बी है उन्हें कोविड-19 से मौत का खतरा कम है। डेली मेल की खबर के मुताबिक यह दावा ब्रिटेन की स्वानसी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 41 देशों के पुरुषों पर हुई रिसर्च के बाद किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, छोटी रिंग फिंगर वाले पुरुषों में कोरोनावायरस के संक्रमण के बाद हल्के ही लक्षण देखे गए। छोटी रिंग फिंगर वालों में मौत का खतरा 30% तक ज्यादा शोधकर्ताओं ने जब उन देशों का अध्ययन किया जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती हैं। सामने आया कि वो देश कोरोना से सर्वाधिक मौतों के मामले में टॉप 3 में शुमार हैं। यहां अन्य देशों की तुलना में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा 30% तक ज्यादा पाया गया। कहां-कैसी है रिंग फिंगर रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन, बुल्गारिया और स्पेन उन 10 देशों में शामिल हैं, जहां अधिकतर पुरुषों की रिंग फिंगर छोटी होती है। वहीं मलेशिया, सिंगापुर और रूस में पुरुषों की रिंग फिंगर लंबी होती है। छोटी रिंग फिंगर वाले ...

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन का कॉम्बिनेशन कोरोना मरीजों के लिए हो सकता है जानलेवा, अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दी चेतावनी

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कोरोना के मरीजों को दी जाने वाली ड्रग हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यह दावा अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि दोनों ही दवाएं एक साथ दें या अलग-अलग, दोनों ही स्थितियों में मरीज के कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम के लिए बुरा साबित हो सकता है और जान को जोखिम बढ़ता है। 130 देशों से जुटाए गए थे मामले शोधकर्ताओं ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के रिकॉर्ड में दर्ज इन दवाओं से बुरे प्रभाव वाले 2 करोड़ 10 लाख मामलों का विश्लेषण किया। ये मामले 14 नवम्बर 1967 से लेकर 1 मार्च 2020 तक 130 देशों से जुटाए गए थे। हृदय की धड़कन अधिक तेज या धीमी हो सकती है जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का असर हृदय पर दिखता है। मरीजों के हृदय की धड़कन तेज या धीमी हो सकती है। डब्ल्यूएचओ ने दवा के क्लीनिकल ट्रायल पर लगाई थी रोक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एहतियात के तौर पर हाइड्रॉक्सी क्लोरोक्वीन का क्लीनिकल ट्रायल अस्थायी रूप से बंद कर दिया। डब्ल्यूएचओ का कहना ...

स्पेन के वैज्ञानिकों ने 6466 दवाओं में दो विशेष ड्रग्स अलग कीं, ये वायरस को बढ़ाने वाले एंजाइम को काबू करती हैं

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स्पेन के शोधकर्ताओं ने6466 दवाओं को कम्प्यूटर तकनीक की मदद एनालाइज़ करकेऐसीदो ड्रग्स की पहचान कीहैं जो संक्रमण के बाद कोरोना की संख्या (रेप्लिकेशन) को बढ़ने से रोक सकते हैं। इस विशेष रिसर्च प्रोग्राम कोकोविड मूनशॉट नाम दिया गया है। यह दावा स्पेन की रोविरा यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये दोनों कोरोना के उस एंजाइम पर लगाम लगाएंगीजिसकी वजह से वायरस अपनी संख्या को बढ़ाकर मरीज को वेंटिलेटर तक पहुंचा देता है। दो में से एक दवा का इस्तेमाल जानवरों में किया जाता है इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलीक्युलर साइंसेज में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कारप्रोफेन और सेलेकॉग्सिब एंटी-इंफ्लेमेट्री ड्रग हैं। इनमें से एक का इस्तेमाल इंसान पर और दूसरे का जानवरों के लिए किया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है इस रिसर्च के नतीजे वैक्सीन तैयार करने में मददगार साबित होंगे। ऐसे काम करती हैदवा कोरोना में एम-प्रो नाम का एक एंजाइम पाया जाता है। यह एंजाइम ऐसे प्रोटीन को बनाता है जिसकी इसकी मदद से वायरस शरीर में पहुंचकर अपनी संख्या को बढ़ाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, दोनों दवाएं इसी एंजाइम को रोकन...

इजरायल ने बनाई सिर्फ 3800 रुपए की कोरोना किट, फूंक मारने पर एक मिनट में बता देती है कि आप पॉजिटव हैं या नहीं

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इजरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कोरोना टेस्ट किट बनाई हैजो एक मिनट में रिजल्ट बतादेतीहै। इसमें जांच के लिएनाक,गलेऔर फूंक सेसैम्पललिया जाताहै और बताता है कि कौन कोरोना पॉजिटिवहैं और कौन से ऐसे संक्रमितमरीज हैं जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे हैं। शोधकर्ताओं का दावा है, यह किट 90 फीसदी तक सटीक परिणाम देतीहै। एक टेस्ट किट की कीमत सिर्फ3800 रुपए है। ऐसे काम करती है किट शोधकर्ताओं के मुताबिक, किट में खास तरह के सेंसर का प्रयोग किया गया है जो विशेषतौर पर इस वायरस को पहचानने का काम करते हैं। जब मरीज टेस्ट किट में हवा फूंकता है तो ड्रॉप्लेट्स के जरिए वायरस सेंसर तक पहुंचते हैं। इस सेंसर से एक क्लाउड सिस्टम जुड़ा रहता है। सेंसर सिस्टम को विश्लेषण करके बताता है कि मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव है या निगेटिव। इस टेस्ट के लिए लैब का होना जरूरी नहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि टेस्ट किट की कीमत दूसरे पीसीआर टेस्ट से कम है। यह टेस्ट कहीं भी किया जा सकता है इसके लिए लैब की जरूरत नहीं है। एयरपोर्ट, बॉर्डर, स्टेडियम जैसी जगहों पर यह टेस्ट किट काफी मददगार साबित होगी जहां रैप...