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Showing posts from July, 2020

18 फीट 8 इंच ऊंचाई के साथ 12 वर्षीय जिराफ सबसे ऊंचा, गिनीज ने कहा, इसकी लम्बाई को मापने के लिए विशेष खंभा बनाया गया

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ऑस्ट्रेलिया के चिड़ियाघर में रहने वाले 12 साल के जिराफ ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। जिराफ का नाम फॉरेस्ट है। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने फॉरेस्ट को दुनिया का सबसे ऊंचा ​जीवित जिराफ घोषित किया है। इसकी लम्बाई 18 फीट 8 इंच है। गिनीज के मुताबिक, जिराफ की लम्बाई को नापना बेहद मुश्किल रहा। इसके लिए स्टाफ को एक विशेष नाप वाला खंभा बनाना। यह जिराफ क्वींसलैंड के ऑस्ट्रेलिया जू में रहता है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today World's Tallest Giraffe Australia Update | 12-year-old Giraffe Forest Living In Australia's Zoo Set A Guinness World Record source https://www.bhaskar.com/happylife/news/world-tallest-giraffe-in-australia-guinness-world-record-127570281.html

5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस होने का खतरा, इनसे कम्युनिटी में ट्रांसमिशन होने की आशंका

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अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प स्कूलों को दोबारा खोलने पर जोर दे रहे हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने संक्रमण का खतरा जताया है। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में बड़ी संख्या में कोरोनावायरस मिल सकते हैं। ये संक्रमण की अहम वजह बन सकते हैं। यह दावा शिकागो में हुई रिसर्च में किया गया है। 5 साल से कम उम्र के 46 बच्चों पर हुई रिसर्च शोधकर्ताओं के मुताबिक, 23 मार्च से 27 अप्रैल तक 145 मरीजों का स्वैब टैस्ट कराया। इनमें कोरोना के हल्के लक्षणों से लेकर सामान्य लक्षणों वाले मरीज शामिल थे। इन मरीजों को उम्र के मुताबिक समूहों में बांटा गया। पहला समूह 5 साल तक की उम्र वाले 46 बच्चों का बनाया गया। दूसरा समूह 5 से 17 साल उम्र वाले 51 बच्चों का बनाया गया। तीसरा समूह 18 से 65 साल के 48 बच्चों को बनाया गया। कम उम्र के बच्चे कोरोना के वाहक बन सकते हैं शोधकर्ता टेलर हील्ड सार्जेंट के मुताबिक, इन बच्चों की सांस नली में अधिक संख्या में कोरोनावायरस मिले। ये जितनी मात्रा में मिलेंगे संक्रमण का खतरा उतना ही बढ़ेगा। शोधकर्ता कहते हैं कि 5 साल से कम उम्र के बच्चे कोरोना के वाहक ब...

सुदर्शन क्रिया से छात्रों में तनाव और अवसाद घटा, सकारात्मक सोच में इजाफा हुआ; मानसिक स्वास्थ्य सुधरा

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सुदर्शन क्रिया तनाव बेचैनी को घटने के साथ मन में सकारात्मक विचारों का प्रवाह बढ़ाती है। येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, श्वसन तकनीक यानी सुदर्शन क्रिया से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ। फ्रंटियर्स इन सायकियाट्री जर्नल के मुताबिक, छात्रों को स्वास्थ्य के 6 क्षेत्रों अवसाद, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य, सचेतन अवस्था, सकारात्मक प्रभाव और सामाजिक जुड़ाव में सुधार देखा गया। क्या है सुदर्शन क्रिया सुदर्शन क्रिया एक लयबद्ध श्वसन तकनीक है, जो आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों में सिखाई जाती है। जो जीवकोषीय स्तर पर तनाव और भावनात्मक विष को दूर करती है। शोध यह दर्शाता है कि यह तकनीक नींद के चक्र को सुधारने, हैप्पी और फील गुड हार्मोन्स जैसे - ऑक्सीटोसिन के स्राव को सुधारने, तनाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन्स,जैसे - कॉर्टिसोल के स्राव को कम करने का काम करती है। यह सजगता को बढ़ाने और चिकित्सीय अवसाद लक्षणों को कम करने में मदद करती है। 8 हफ्तों में 135 स्टूडेंट्स पर हुई स्टडी फ्रंटियर्स इन सायकियाट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कठिन परिस्थिति से उ...

रैपिड एंटीजन टेस्ट 20 मिनट में कोरोना की जांच करता है और आरटी-पीसीआर 12 घंटे में बताता है कि मरीज पॉजिटिव है या नहीं

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देश में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि देश में जांच का दायरा बढ़ रहा है। कोविड-19 की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इन जांच में फर्क नहीं समझ पा रहे हैं। जैसे आरटी- पीसीआर, रैपिड एंटीजन टेस्ट और ट्रू नेट टेस्ट में क्या अंतर यह कैसे समझें। जानिए कोरोना की कौन सी जांच कब कराएं... #1) आरटी- पीसीआर टेस्ट क्या है : कोरोना वायरस की जांच का तरीका है। इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मटीरियल है। तरीका क्या है : नाक एवं गले के तालू से स्वैब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं। रिजल्ट आने में कितना समय लगता है : 12 से 16 घंटे एक्यूरेसी कितनी है : टेस्टिंग की इस पद्धति की विश्वसनीयता लगभग 60% है। कोरोना संक्रमण के बाद भी टेस्ट निगेटिव आ सकता है। मरीज को लक्षणिक रूप से भी देखा जाना जरूरी है। #2) रैपिड एंटीजन टेस्ट (रैट) क्या है : कोरोना संक्रमण के वायरस की जांच की जाती है। तरीका क्या है : नाक से स्वैब लिया जाता है। वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है। रिजल्ट आने में कितना समय लग...

रात में बार-बार नींद का टूटना और कवरटें बदलते रहना है स्लीप एपनिया का लक्षण, सुबह सिर में दर्द महसूस हो दिन में नींद आए तो डॉक्टरी सलाह लें

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स्लीप एपनिया यानी नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी। स्लीप एपनिया की स्थिति में हमारी नींद कई बार टूटती है। कई स्थितियों में तो सांस रुक भी सकती है। स्लीप एपनिया की स्थिति में हम कई बार करवटें बदलते रहते हैं। आप जानकर हैरान होंगे- देश की 13 फीसदी आबादी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित है। पुरुषों में 19.7%, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 7.4% है। स्लीप एपनिया की स्थिति में एक घंटे में तीस या इससे ज्यादा बार भी सांस का रुकना या करवटें बदलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। यह एक ऐसा विकार है, जिससे नींद से जुड़ी और समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर- शोध बताते हैं, यदि आपकी रात की नींद एक घंटे भी कम हो जाए तो अगले दिन आपकी अलर्टनेस 32 फीसदी तक कम हो जाएगी। स्लीप एपनिया को समझने से पहले हमें, नींद को समझना जरूरी है। दरअसल, हमारी नींद तीन से चार चक्रों में पूरी होती है। हर चक्र लगभग पांच चरणों से गुजरता है। चौथा चरण सबसे गहरी नींद का होता है। पांचवां चरण REM या रैपिड आई मूवमेंट का चरण होता है। यह वो चरण होता है, जिसमें हम सपने भी देखते हैं। नींद के वक्त ही, हमारे शरीर में ग्रोथ हार्मोन प...

महिला ने जिस दांत के दर्द को नजरअंदाज किया उसका संक्रमण बढ़कर मस्तिष्क तक पहुंचा, चलना-फिरना मुश्किल हुआ और मेमोरी घटी

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दांत में दर्द हो रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें। यह संक्रमण हो सकता है जो बढ़कर दिमाग तक पहुंच सकता है। ब्रिटेन में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। 35 साल की रेबेका डॉल्टन को चलने में तकलीफ हुई और धीरे-धीरे मेमोरी घटने के बाद हॉस्पिटल लाया गया। जांच करने पर मस्तिष्क में बैक्टीरिया का संक्रमण देखा गया। डॉक्टर्स ने भी उसके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी। रेबेका को लगातार हॉस्पिटल में 5 महीने बिताने पड़े। डिस्चार्ज होने पर उन्होंने कहा, मुझे नया नजरिया मिला है, ये सीख बताती है कि आप कुछ भी हल्के में नहीं ले सकते। दांत के इलाज के बाद चलने-फिरने में दिक्कत हुई और मेमोरी घटी रेबेका का इलाज करने वाले डॉक्टर के मुताबिक, दिसम्बर 2019 में उसके दांतों में बैक्टीरिया का संक्रमण हुआ था। जिसे उन्होंने कई बार नजरअंदाज किया। यही बैक्टीरिया दांतों से दिमाग तक पहुंचा। मार्च में दांतों की समस्या का इलाज कर दिया गया था। लेकिन दिक्कत कुछ दिन बाद शुरू हुई जब रेबेका को चलने-फिरने में दिक्कत शुरू हुई। मेमोरी घटने लगी। वह हॉस्पिटल आईं और जांच की गईं। संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचा और हार्ट और लिवर तक में उसका असर दिखा ...

संक्रमण के दौरान 100 से 78 मरीजों में हार्ट डैमेज और दिल में सूजन की शिकायत हुई, कोरोना से उबरने पर 80 फीसदी को हृदय से जुड़ी दिक्कतें शुरू हुईं

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कोरोना से उबरने के बाद भी वायरस के संक्रमण का असर लम्बे समय तक शरीर में दिख सकता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल की रिसर्च यही बताती है। शोध के मुताबिक, कोरोना से उबरने वाले 80 फीसदी लोगों में हृदय से जुड़ी दिक्कतें देखी गई हैं। रिसर्च अप्रैल और जून के बीच में हुई थी। इसमें कोरोना के ऐसे मरीज शामिल थे जो संक्रमण से पहले स्वस्थ थे और उम्र 40 से 50 साल के बीच थी। 100 मरीजों पर हुई रिसर्च शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोरोना से पीड़ित 100 लोगों पर रिसर्च की गई। इनमें से 67 मरीज ऐसे थे जो एसिम्प्टोमैटिक थे या इनमें बेहद हल्के लक्षण दिख रहे थे। अन्य 23 मरीजों को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। मरीजों के हार्ट पर कोरोना का क्या असर पड़ रहा है इसे जानने के लिए एमआरआई, ब्लड टेस्ट और हार्ट टिश्यू की बायोप्सी की गई। 78 फीसदी मरीजों के दिल में सूजन शोधकर्ता क्लायड डब्ल्यू येंसी के मुताबिक, रिसर्च में सामने आया कि 100 में से 78 मरीजों के हार्ट डैमेज हुए और दिल में सूजन दिखी। इससे इस बात के प्रमाण मिले कोरोना से उबरने के बाद बहुत सी बातें सामने आनी बाकी हैं कि भविष्य में शरीर के अंगों पर इसका कितना अस...

किसी ने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजने का चलन शुरू किया तो कहीं डिनर पार्टी से फ्रेंडशिप के सेलिब्रेशन की नींव पड़ी, अमेरिका में खुशकुशी की कहानी भी प्रचलित हुई

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अगस्त के पहले रविवार को मनाए जाने वाले फ्रेंडशिप डे की शुरुआत दुनियाभर में अलग-अलग समय पर हुई लेकिन मकसद एक ही था एक दिन अपने दोस्त के नाम। इसे इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे का नाम दिया गया। इस दिन की शुरुआत कैसे हुई इसकी 3 कहानियां हैं। तीनों ही काफी दिलचस्प हैं। इस साल फ्रेंडशिप डे 2 अगस्त को मनाया जाएगा। जानिए इस खास दिन की शुरुआत से जुड़ी 3 कहानियां... पहली कहानी : एक व्यापारी ने एक-दूसरे को कार्ड देने की परंपरा शुरू की एक प्रचलित कहानी के मुताबिक, इस दिन की शुरुआत करने का श्रेय एक व्यापारी को जाता है। 1930 में जोएस हॉल नाम के व्यापारी ने सभी लोगों के लिए एक ऐसा दिन तय किया जब दो दोस्त एक-दूसरे को कार्ड दें और इस दिन को यादगार बनाएं। जोएस हॉल ने इसके लिए 2 अगस्त का दिन चुना। बाद में यूरोप और एशिया के कई देशों में फ्रेंडशिप डे मनाने की परंपरा शुरू हुई। दूसरी कहानी : डिनर पार्टी करके फ्रेंडशिप डे की नींव रखी फ्रेंडशिप डे से जुड़ी दूसरी कहानी के मुताबिक, 20 जुलाई 1958 को डॉ. रमन आर्टिमियो ने एक डिनर पार्टी के दौरान अपने दोस्तों के साथ मित्रता दिवस मनाने का विचार रखा था। पराग्वे में हुई इ...

कोरोनावायस चमगादड़ में 70 साल से सर्कुलेट हो रहा था लेकिन सब इससे बेखबर रहे, अमेरिकी शोधकर्ता का दावा

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कोरोना पर एक और नई बात सामने आई है। अमेरिकी शोधकर्ता मेसीज बोनी का कहना है कि कोरोनावायस हॉर्सशू चमगादड़ में कई दशकों से सर्कुलेट हो रहा है। लेकिन इस बात से सब बेखबर रहे। इस समय महामारी के जो हालात हैं उसमें कोरोना की वंशावली को समझना बेहद जरूरी है ताकि स्वास्थ्यकर्मियों को इंसानों को बचाने में मदद मिल सके। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वर्तमान में जो कोरोनावायरस महामारी फैला रहा है उसके पूर्वज चमगादड़ में 40 से 70 साल पहले से मौजूद थे। धीरे-धीरे ये इंसानों में पहुंचने के लिए तैयार हुए। कोरोना की लैब में तैयार होने पर सवाल उठाती है रिसर्च कोरोना और चमगादड़ के कनेक्शन पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है। शोधकर्ताओं ने रिसर्च में सामने आए नतीजे जारी किए हैं। पेन्सिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता मेसीज बोनी के मुताबिक, चमगादड़ में दूसरे वायरस की मौजूदगी इंसानों में संक्रमण का खतरा और बढ़ा सकती है। यह रिसर्च कोरोना की उस थ्योरी पर सवाल उठाती है जिसमें कहा गया था कि इसे लैब में तैयार किया है। धीरे-धीरे यह अपने पूर्वज वायरस से अलग हो गया ग्लासगो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रो. डेविड रॉब...

हेपेटाइटिस की दवा लेने वाले मरीजों में नहीं हुआ कोरोना का संक्रमण, पांच माह तक डेढ़ हजार लोगों पर हुई रिसर्च में किया दावा; अब बड़े स्तर पर ट्रायल की तैयारी

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काला पीलिया की दवा लेने वाले मरीजों में कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ। दुनियाभर के कई देशों में भी काला पीलिया यानी हेपेटाइटिस की दवा कोरोना से बचाव करने में मददगार साबित हुई है। यह दावा PGIMS रोहतक की रिसर्च में किया गया है। यहां के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग और नेशनल वायरल हेपेटाइटिस सेंट्रल प्रोग्राम के मॉडल ट्रीटमेंट सेंटर में डेढ़ हजार मरीजों पर रिसर्च की गई। 5 माह तक मरीजों की हुई मॉनिटरिंग गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के हेड और सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने दावा किया कि काला पीलिया की दवा कोविड-19 में कारगर है। 5 माह तक हेपेटाइटिस बी और सी का इलाज कराने वालों में डेढ़ हजार मरीजों को चिह्नित करके मार्च से जुलाई माह तक उनकी हेल्थ मॉनिटरिंग की गई। रिसर्च में शामिल डेढ़ हजार मरीजों में नहीं दिखे लक्षण शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च में पाया गया कि काला पीलिया की दवा लेने वाले डेढ़ हजार मरीजों को कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण नहीं आए और न ही कोरोना संक्रमित हुए। डॉ. प्रवीण मल्होत्रा के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अगर इसका बड़े स्तर पर ट्रायल किया जाता है तो सकारात्मक परिणाम सा...

AC-कूलर चलाएं तो खिड़कियां खुली रखें ताकि ताजी हवा आए, बंद घर में एक ही हवा का रीसर्कुलेट होना खतरनाक

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प्रदेश में कोरोना के मामलों का रिव्यू करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से AC, कूलर से बचने की सलाह दी है। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि मैं जहां कोरोना का इलाज करा रहा हूं वहां, कूलर और AC का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। कोरोनावायरस का AC और कूलर से क्या कनेक्शन है, इसे समझने की जरूरत है, क्योंकि केंद्र सरकार ने गाइडलाइन जारी करके इसका सीमित इस्तेमाल करने की सलाह दी है। वो रिसर्च जिससे AC -कूलर के प्रयोग पर सवाल उठे चीन में महामारी की शुरुआत में इस पर एक रिसर्च की गई। रिसर्च एक महिला पर हुई थी। शोध के मुताबिक, ग्वांगझू के रेस्तरां में एक महिला जहां बैठी थी उसके ठीक पीछे AC था और उसमें कोरोना के लक्षण दिखे थे। उसने अपनी टेबल पर बैठे चार लोग और 5 अन्य लोगों को संक्रमित किया। इस मामले के बाद AC का कोरोना के कणों से कनेक्शन ढूंढा गया। अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर डाेनॉल्ड मिल्टन का कहना है कि यह रिसर्च साबित करती है कि कोरोना के कण हवा में मौजूद रहते हैं। हवा का मूवमेंट अधिक होने पर कोरोना के कण नाक तक आसानी से पहुंच सकते हैं। इसका एक उदाहरण परागक...

लिवर की सूजन से जूझ रहे हैं तो कोरोना का संक्रमण होने पर हालत नाजुक हो सकती है, सीडीसी ने चेतावनी दी

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हेपेटाइटिस यानी लिवर से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे हैं तो कोरोना का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। यह चेतावनी अमेरिका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य एजेंसी सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने जारी की है। सीडीसी के मुताबिक, ऐसे बुजुर्ग जो पहले से बीमार हैं और हेपेटाइटिस से जूझ रहे हैं उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आज वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे है। इस साल की थीम है हेपेटाइटिस मुक्त भविष्य। लिवर की इस बीमारी से दुनियाभर में हर साल 13 लाख मौतें हो रही हैं। बारिश का मौसम चल रहा है और कोरोना का संक्रमण भी फैल रहा है। इसी मौसम में हेपेटाइटिस के वायरस का संक्रमण भी आसानी से होता है, इसलिए खासतौर पर अलर्ट रहने की जरूरत है। जानिए कोरोनाकाल में कब, कैसे खुद को रखें सुरक्षित- क्या है हेपेटाइटिस? हेपेटाइटिस को आसान भाषा में तो यह लिवर में होने वाली सूजन है जिसका मुख्य कारण वायरस का संक्रमण है। जो आमतौर पर दूषित भोजन खाने या पानी पीने, संक्रमित चीजों के इस्तेमाल से फैलता है। इस कारण हेपेटाइटस के 5 वायरस ए, बी, सी डी और ई हैं। इनमें टाइप-बी व सी घातक रूप लेकर लिवर सिरोसिस और कैंसर को जन्म द...

दिवंगत बेटे का सपना पूरा कर रहा दंपति, कोरोना के कारण नौकरी गंवाने वालों, फूड और पार्सल डिलीवरी करने वालों को दे रहे साइकिल

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दुनियाभर की तरह फिलीपींस में भी कोरोना और लॉकडाउन के कारण हजारों लोगों की नौकरी गई। इनमें से ही एक रोनाल्डो रोजेरियो भी है। रोनाल्डो स्थानीय फूड चेन से जुड़ा था। दो माह के बच्चे और पत्नी की देखभाल के लिए उसने किराए से साइकिल लेकर राइस केक बेचने का काम शुरू कर दिया। पर कमाई का बड़ा हिस्सा साइकिल के किराए और उसकी मरम्मत में खर्च हो जाता था। ऐसे में उसे करेज टू बी काइंड फाउंडेशन से एक नई साइकिल मिली। इस फाउंडेशन ने वन बाइक एट ए टाइम पहल के तहत अब तक रोनाल्डो जैसे 50 से ज्यादा जरूरतमंदों की मदद की है। इस पहल के पीछे दंपती ग्लैंडा और जॉर्ज कैनलस हैं। सालभर पहले हुई थी बेटे की मौत दंपती ग्लैंडा और जॉर्ज कैनलस के 17 साल के बेटे बेंजामिन की सालभर पहले मौत हो गई थी। उसने कई बार साइकिल चलाने वालों की मदद की थी। इसी प्रेरणा से कैनलस दंपती ने फाउंडेशन के जरिए साइकिल देना शुरू किया। इसमें यह जरूरी था कि कोई परिचित नामित करे ताकि जरूरत के बारे में पता चल सके। लॉकडाउन में बेरोजगारों को मिली बड़ी मदद लॉकडाउन के दौरान नौकरी गंवाने वालों, फूड और पार्सल डिलीवरी के काम से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई...

वायरस शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देकर संक्रमण फैलाने की कोशिश कर रहा, इस बिहेवियर की समझ से एंटीवायरल दवाइयां बनाने में मदद मिलेगी

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कोरोनावायरस से जुड़ी नई जानकारी सामने आई है। यह वायरस इंसान के इम्यून सिस्टम को चकमा देकर संक्रमण फैलाने की कोशिश करता है ताकि रोगों से लड़ने वाला सिस्टम उसे पहचान न सके। कोरोनावायरस एक मॉलिक्यूल की मदद से अपने जेनेटिक सीक्वेंस को उस रूप में ढाल लेता है जिससे यह पीड़ित के जेनेटिक सीक्वेंस का हिस्सा लगने लगता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह नई जानकारी से कोरोनावायरस के खिलाफ एंटीवायरल दवाइयां बनाने में मदद मिलेगी। कोरोना ऐसे देता है चकमा यह दावा अमेरिका के टेक्सास हेल्थ साइंस सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में किया है। नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मॉलिक्यूल एनएसपी10 वायरस के एम-आरएनए को पीड़ित व्यक्ति की कोशिका के एम-आरएनए जैसे रूप में ढाल देता है। ऐसा होने पर वायरस संक्रमित के इम्यून सिस्टम की पकड़ में आने से बच जाता है। नई दवा इम्यून सिस्टम को अलर्ट करेगी शोधकर्ता योगेश गुप्ता के मुताबिक, कोरोना एक तरह से भ्रमित करता है। कोरोना का एम-आरएनए मरीज के एम-आरएनए की तरह लगता है, इसलिए इम्यून सिस्टम इसे बाहरी तत्व नहीं समझ पाता। इसे ध्यान में रखते हुए दवा तैयार ...

इंसानों और वाहनों का शोर कम होने से वाइब्रेशन 50% तक घटा, भूकम्प का पता लगाना पहले से आसान हुआ

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कोरोनाकाल में इंसानों के कारण धरती में होने वाले वाइब्रेशन यानी कम्पन में 50 फीसदी की कमी हुई। धरती के अंदर का शोर कम हुआ है। यह आंकड़ा बेल्जियम की रॉयल वेधशाला ने दुनियाभर के 117 देशों के 268 रिसर्च स्टेशन से मिली जानकारी के आधार पर जारी किया। रॉयल वेधशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आम दिनों में शहरी क्षेत्र में इंसान, कार, ट्रेन और बसों के कारण धरती में वाइब्रेशन पैदा होता है लेकिन लॉकडाउन के दौरान धरती काफी हद तक शांत रही। भूकम्प का पता लगाना आसान हुआ रिसर्च रिपोर्ट से एक बात साफ हुई कि धरती में कंपन कम होने के कारण भूकंप की जानकारी समय से पहले देना आसान हो जाता है। धरती में कम्पन कितना हुआ इसे सिस्मोमीटर्स के जरिए मापा जाता है। इन सेंसर्स का इस्तेमाल भूकम्पीय तरंगों के साथ मानव गतिविधियों से होने वाली ध्वनि को पकड़ने और समझने में काम आता है। यह बारीक से बारीक वाइब्रेशन साउंड को माप सकता है। दुनिया के हर हिस्सों में इससे मॉनिटरिंग की जाती है। अप्रैल में ही जताई थी सम्भावना इस रिसर्च के मुख्य शोधकर्ता डॉ. थॉमस लीकॉक ने अप्रैल में कहा था कि इंसानों की गतिविधि कम होने के कारण हमें...

कोरोना पॉजिटिव मृतक के कान में मिला वायरस, अमेरिकी शोधकर्ताओं ने कान का संक्रमण होने पर कोविड-19 जांच की सलाह दी

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कोरोनावायरस कान और इसके पीछे वाली मेस्टॉयड हड्‌डी को भी संक्रमित कर सकता है। इसके 2 मामले अमेरिकी शोधकर्ताओं के सामने आए हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, रिसर्च के दौरान 3 संक्रमित मृतक में से 2 के कान और इसके पीछे वाले हिस्से में कोरोनावायरस मिला है। रिसर्च करने वाले अमेरिका के जॉन हॉप्किंस स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में कोरोना के लक्षण दिख रहे हैं उनके कान की भी जांच की जानी चहिए। अब सामने आई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि कोरोनावायरस शरीर के अंदरूनी किसी भी हिस्से तक पहुंच सकता है। यह नाक, गला और फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। कान में कोरोना के मिलने की बात चौकाने वाली है। 60 साल के पुरुष और 80 साल की महिला में मिला वायरस JAMA ऑटोलैरंगोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, सिर और गर्दन की सर्जरी करने वाली टीम ने कोरोना के तीन मरीजों की जांच की। तीनों की मौत हो चुकी थी। इनमें दो महिलाएं और एक पुरुष था। एक महिला और एक पुरुष की उम्र 60 साल थी वहीं, तीसरी महिला की उम्र 80 साल थी। इनके शरीर के हिस्सों से स्वाब सैम्पल लिए गए। तीन में से दो मरीजों के कान मे...

सियोल में सैकड़ों ड्रोंन से आसमान में सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवॉश और मास्क की तस्वीर बनाई; फ्रंटलाइन वर्करों का शुक्रिया अदा किया

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साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में हाल ही में आसमान में तारों की तरह टिमटिमाते ड्रोंस ने कोरोना से बचाव का संदेश दिया। सियोल में हेन नदी के ऊपर पर आसमान में सैकड़ों ड्रोंस इकट्‌ठा हुए और सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवॉश, मास्क लगाने का अनुरोध करने के साथ स्वास्थ्य कर्मियों का धन्यवाद अदा किया। यह आयोजन साउथ कोरिया में कोरोना के मामले नियंत्रित होने की खुशी में आयोजित किया गया था। इस पहल में 300 ड्रोंस शामिल हुए देशवासियों को महामारी से बचाव के लिए दिए गए इस संदेश में 300 ड्रोंस शामिल किए गए। इसे देखने के लिए हेन नदीं के तट पर लाखों लोग इकट्‌ठा हुए। हर एक तस्वीर को 10 मिनट तक बनाए रखा गया। 10 मिनट तक फ्रंटलाइन वर्करों का शुक्रिया अदा किया इस लाइट शो के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को महामारी में उनके योगदान के लिए और देशवासियों को कोरोना से लड़ने लिए शुक्रिया अदा किया गया। कोरोना के 63 नए मामले आए साउथ कोरिया में कोविड-19 के नियंत्रण में आने की घोषणा करने के कुछ ही दिन बाद देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 63 नए मामले सामने आए हैं। यहां के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र (केसीडीसी) ने बुधवार क...

केरल में कोरोनावायरस को देवी मानकर पूजते है अनिलन, सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए तो कहा; यह वायरस के खिलाफ जागरुकता फैलाने का एक तरीका

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केरल का एक शख्स कोरोनावायरस को देवी के रूप में पूजता है। शख्स का नाम अनिलन मुहुर्थम और कोल्लम के रहने वाले हैं। अनिलन का कहना है, मैं देवी के रूप में कोरोनावायरस की पूजा करता हूं। ये पूजा स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस के जवानों और वैज्ञानिकों की सुरक्षा के लिए है। अनिलन ने मंदिर में थर्माकोल से बनी कोरोनावायरस की रेप्लिका टांग रखी है और इसी को वह देवी के तौर पर पूजते हैं। सोशल मीडिया पर बहस श़ुरू सोशल मीडिया पर इनके इस काम पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि अनिलन ऐसा सिर्फ अपने प्रचार के लिए कर रहे हैं। वहीं, कुछ का कहना है, यह अंधविश्वास है। सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने की परवाह किए बगैर अनिलन कहते हैं, लोग 'कोरोना देवी की पूजा करने के लिए उनका मजाक उड़ा रहे हैं लेकिन यह जागरूकता पैदा करने का मेरा अपना तरीका है। घर के पास बनाया मंदिर अनिलन ने अपने घर के पास एक मंदिर बनाया हुआ है, इसमें कोरोना की रेप्लिका टांगी गई है। वह कहते हैं, मैं यहां रोजाना कोरोनावायरस को देवी की तरह पूजा करता हूं। इस समय हर इंसान कोरोना संक्रमण के कारण डरा हुआ है। अनिलन कहते हैं, हिन...