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Showing posts from June, 2020

चीनी वैज्ञानिकों ने सुअर में फ्लू के वायरस का वो स्ट्रेन खोजा जो इंसानों में पहुंचकर महामारी ला सकता है

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चीनी वैज्ञानिकों ने फ्लू के वायरस का वो स्ट्रेन खोजा है जो महामारी ला सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फ्लू वायरस का एक ऐसास्ट्रेन हाल ही में सुअर में पाया गया है, जो इंसानों को संक्रमित कर सकता है। यह अपना रूप बदल (म्यूटेट) कर एक इंसान से दूसरे इंसान में पहुंचकर वैश्विक महामारी ला सकता है। सुअरों पर नजर रखने की जरूरत वायरस का नाम G4 EA H1N1 है। इस पर रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि यह इमरजेंसी जैसी समस्या नहीं है लेकिन इसमें ऐसे कई लक्षण दिखे है जो बताते हैं कि यह इंसानों को संक्रमित कर सकता है, इसलिए इस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेस के मुताबिक, यह नया स्ट्रेन है इसलिए हो सकता है लोगों में इससे लड़ने की क्षमता कम हो या हो ही न। इसलिए इससे बचने के लिए सुअरों पर नजर रखना जरूरी है। यह फैला तो रोकना मुश्किल होगा कोरोना वायरस से पहले दुनिया में अंतिम बार फ्लू महामारी वर्ष 2009 में आई थी और उस समय इसे स्‍वाइन फ्लू कहा गया था। मेक्सिको से शुरू हुआ स्‍वाइन फ्लू उतना घातक नहीं था जितना कि अनुमान लगाया गया था। इस बार कोरोना वायरस क...

देश में बनी कोरोना की पहली वैक्सीन, हैदराबाद की कम्पनी भारत बायोटेक ने तैयार की ; इंसानों पर ट्रायल अगले माह से

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देशमें कोरोना की पहली वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ को हैदराबाद की फार्मा कम्पनी भारत बायोटेक तैयार किया है। इसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे के साथ मिलकर बनाया गया है। ‘कोवैक्सीन’ का ट्रायल इंसानों पर करने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया की तरफ से अनुमति मिल गई है। प्री-क्लीनिकल ट्रायल सफल होने के बाद वैक्सीन को अप्रूवल मिला है। देश में इंसानों पर इसका का ट्रायल जुलाईसे शुरू होगा। हैदराबाद की जीनोम वैली में तैयार हुई वैक्सीन फार्मा कम्पनी भारत बायोटेक की ओर से जारी बयान के मुताबिक, वैक्सीन को हैदराबाद के जीनोम वैली के बीएसएल-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) हाई कंटेनमेंट फैसिलिटी में विकसित किया गया है।ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, सेंट्रल सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहले और दूसरे चरण का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की अनुमति दे दी है। वैक्सीन की घोषणा करना गौरव की बात कम्पनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.कृष्णा एल्ला के मुताबिक, हमकोरोना की वैक्सीन के बारे में घोषणा करते ...

मौत का खतरा डॉक्टरों को कम, सिक्योरिटी गार्ड को ज्यादा, ब्रिटेन में 4700 मरीजों पर हुई रिसर्च का नतीजा

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कोरोना से मौत का खतरा डॉक्टरों से दोगुना फैक्ट्री के मजदूरों और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे लोगों को है। यह आंकड़ा ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे 4700 कोविड-19 के मरीजों के डेटाका एनालिसिस करने के बाद जारी किया है। रिपोर्ट में 9 मार्च से 25 मई के बीच 20 से 64 साल के कोरोना पीड़ितों को शामिल किया था। रिसर्च में सामने आया कि एक लाख लोगों पर 74 पुरुष सिक्योरिटी गार्ड और 73 फैक्ट्री वर्कर की कोरोना से मौत हुई। 1 लाख लोगों पर 30 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों में यही आंकड़ा अलग रहा है। इनमें 1 लाख लोगों पर 30 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक, एम्बुलेंस स्टाफ में संक्रमण का खतरा 82.4 फीसदी रहा, जो सबसे ज्यादा था। हालांकि, हमारा मकसद यह बताना नहीं है कि डॉक्टरी पेशे के मुकाबले ये नौकरियांखतरनाक हैं बल्कि, लोगों को सावधान रखना है। गार्ड और मजदूर सबसे ज्यादा सम्पर्क में आए विशेषज्ञों के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान भी फैक्ट्री वर्करों ने लगातार काम किया। जब कोरोना के मामले तेजी से फैल रहे थे तो वो लोगों के सम्पर्क में भी आए...

वुहान से वॉशिंगटन और न्यूयॉर्क से नई दिल्ली तक हर जुबां में डर समाया, सांसें आइसाेलेट - जिंदगी क्वारैंटाइन हुई

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दुनियाभर में कोरोना के लगभग 1 करोड़ मामले पार होने को हैं,यानी वायरस अपने उस रौद्र रूप में जिसे देखइंसानी जाति की सांसें सचमुच अटक रही हैं। चीन के वुहान से निकलीकोरोना महामारी जब यूरोप और अमेरिका पहुंची तो उसके साथ नई शब्दावली भी सामने आई। ये ऐसे शब्द थे जो वैज्ञानिक और प्रशासनिक जगत में तो प्रचलित थे, लेकिन पहली बार आम लोगों का वास्ता इनसे पड़ा और फिर लगातारऐसा पड़ा कि अब इनके बिना कोरोना की चर्चा ही अधूरी लगती है। ये दुनिया की तमाम भाषाओं के सबसे जरूरी शब्दबन गए हैं। कोरोनाकाल में चर्चित हुए 10 सबसे महत्वपूर्णशब्दों को आज भी समझने और उन पर लगातार अमल की जरूरत है, आज इन्हीं शब्दों में गुंथीकहानी, तस्वीरों की जुबानी... मित्रो! लक्ष्मण रेखा न लांघें : यह तस्वीर 24 मार्च की है, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। रात के 8 बजे हमेशा की तरह मित्रो वाला संदेश लेकर आएपीएम ने इस बार देशवासियों से घर की लक्ष्मण न पार करने की अपील की थी। अपनी बात को सबको समझाने के लिए उन्होंने एक प्लेकार्ड का इस्तेमाल भी किया जिस परसंदेशलिखा था-कोई रोड पर न निकले, जिसक...

आईसीयू में मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर पहले वायरस लोड से जूझे फिर संक्रमण से उबरने के बाद लॉन्ग कोविड से परेशान

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अस्पताल का आईसीयू यानी वो जगह जहां मरीज को तभी लाया जाता है जब उसकी हालत नाजुक होती है। कोरोना महामारी के दौर में इसकी तस्वीर थोड़ी बदली है। अब आईसीयू में मरीजों की जान बचाने डॉक्टर खुद को भी वायरस से दूर रखने की जद्दोजहद में फंसे हैं। आईसीयू में इलाज के दौरान मरीजों से फैले कोरोना के कण उनके चारों ओर बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे 'वायरस लोड' का नाम दिया गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, वायरस लोड सबसे ज्यादा आईसीयू में होता है, इसके बाद दूसरे वार्ड में। ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस में हुई हालिया शोध कहती है कि अस्पताल के एक चौथाई से अधिक डॉक्टर बीमार हैं या कोविड-19 के कारण क्वारेंटाइन में हैं। चिकित्सा जगत की विश्वसनीय वेबसाइट मेडस्केप के मुताबिक, ब्रिटेन में कोविड-19 से मरने वाले हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स का आंकड़ा 630 की संख्या को पार कर गया है। डॉक्टर्स के लिए वायरस लोड का संकट बढ़ रहा है क्योंकि ये मरीजों के सैम्पल ले रहे हैं, ऑक्सीजन दे रहे हैं, चेकअप कर रहे हैं। इस दौरान वायरस के कण मरीज से डॉक्टर्स तक पहुंच रहे हैं। एक रिसर्च के मुताबिक, मेडिकल प्रोफेशनल्स 7 से 8...

कोलकाता में 30 साल की महिला को पेट दर्द हुआ, जांच में साबित हुई 'मर्द'; डॉक्टर बोले- वीर्यकोष पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए

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कोलकाता के बीरभम में एक दुर्लभ मामला सामने आया है। पेट दर्द की शिकायत की बाद 30 साल की एक महिला को अचानक पता चला कि वह 'मर्द' है और टेस्टिकुलर कैंसर (अंडकोश में कैंसर) से जूझ रही है। महिला का इलाज कोलकाता के सुभाष चंद्र बोस कैंसर हॉस्पिटल में चल रहा है। जांच करने वाले डॉ. अनुपम दत्ता का कहना है कि बाहरी शारीरिक बनावट जैसे ब्रेस्ट, आवाज और गुप्तांग से वह महिला है लेकिन उसके शरीर में गर्भाशय और अंडाशय नहीं है। यह एक दुर्लभ मामला है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम कहते हैं। क्या होता है एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम यह दुर्लभ स्थिति होती है जो तब बनती है जब गर्भ में भ्रूण के जननांग विकसित हो रहे होते हैं। जन्मजात एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम के साथ पैदा होनेवाले बच्चे अंदरूनी तौर पर पुरुष होते हैं और बाहर से दिखने पर लड़की जैसे दिखते हैं। कुछ मामलों में ये बाहरी तौर पर महिला और पुरुष दोनों की तरह मिलते-जुलते दिखते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 22 हजार लोगों में से किसी 1 में ऐसा मामला सामने आता है। 9 साल पहले हुई थी शादी 9 साल पहले महिला की शादी हुई थी...

कोलकाता में 30 साल की महिला को पेट दर्द हुआ, जांच में साबित हुई 'मर्द'; डॉक्टर बोले- वीर्यकोष पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए

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कोलकाता के बीरभम में एक दुर्लभ मामला सामने आया है। पेट दर्द की शिकायत की बाद 30 साल की एक महिला को अचानक पता चला कि वह 'मर्द' है और टेस्टिकुलर कैंसर (अंडकोश में कैंसर) से जूझ रही है। महिला का इलाज कोलकाता के सुभाष चंद्र बोस कैंसर हॉस्पिटल में चल रहा है। जांच करने वाले डॉ. अनुपम दत्ता का कहना है कि बाहरी शारीरिक बनावट जैसे ब्रेस्ट, आवाज और गुप्तांग से वह महिला है लेकिन उसके शरीर में गर्भाशय और अंडाशय नहीं है। यह एक दुर्लभ मामला है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम कहते हैं। क्या होता है एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम यह दुर्लभ स्थिति होती है जो तब बनती है जब गर्भ में भ्रूण के जननांग विकसित हो रहे होते हैं। जन्मजात एंड्रोजन इनसेंसटिविटी सिंड्रोम के साथ पैदा होनेवाले बच्चे अंदरूनी तौर पर पुरुष होते हैं और बाहर से दिखने पर लड़की जैसे दिखते हैं। कुछ मामलों में ये बाहरी तौर पर महिला और पुरुष दोनों की तरह मिलते-जुलते दिखते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 22 हजार लोगों में से किसी 1 में ऐसा मामला सामने आता है। 9 साल पहले हुई थी शादी 9 साल पहले महिला की शादी हुई थी...

बुखार आने पर ये न सोचें कि कोरोना हुआ है, डॉक्टर को तय करने दें वायरस की जांच होगी या नहीं; इस दौरान भी बचाव की हर सावधानी बरतें

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बाहर से खाना मंगाना कितना सही है, 10 दिन से बुखार आ रहा है क्या यह कोरोना का लक्षण है और फेमिली मेम्बर्स बाहर आते-जाते हैं तो गर्भवती महिलाएं क्या सावधानी बरतें... ऐसे कई सवालोंके जवाब नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की विशेषज्ञ डॉ. माला श्रीवास्तव ने आकाशवाणी को दिए। एक्सपर्ट से जानिए कोरोना से जुड़े सवालों के जवाब... #1) क्या कोरोना मरीजों पर फेविपिराविर दवा का अच्छा असर हो रहा है? कोरोना के मरीजों के इलाज में कई दवाइयों को प्रयोग करते हैं लेकिन किस मरीज को दवाई का फायदा हुआ और कौन इम्युनिटी से ठीक हुआ यह बताना मुश्किल है। लेकिन इलाज के बाद देखा गया है कि किसी मरीजमें एंटीवायरल दवाएं काम कर रही हैं तो कइयों में प्लाज्मा थैरेपी। इस तरह अलग-अलग मरीजों पर कौन सी दवा ज्यादा असर कर रही है, यह कहना अभी सम्भव नहीं है। #2) गर्भवती महिला के फैमिली मेम्बर्स बाहर जाते हैं, वो क्या सावधानी बरतें? गर्भवती होने पर इम्युनिटी थोड़ी कम हो जाती है और सभी को पता है कि कोरोना वायरस कोई सटीक इलाज नहीं है। इसलिए,गर्भवती को संक्रमण का खतरा अधिक है। बेहतर होगा कि घर में भी सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रखें। अ...

कोरोना के मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, बेहोशी के अलावा मसल इंजरी भी हो सकती है; कोविड-19 के लक्षण दिखते ही डॉक्टरी सलाह लें

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कोविड-19 के बारे में किए गए कई अध्ययनों के अनुसार यह बीमारी व्यक्ति के फेफड़ों और सांस की नली को बुरी तरह प्रभावित करती है। लेकिन एक तथ्य से लोग अब भी वाकिफ नहीं हैं कि यह बीमारी नर्वस सिस्टम को भी गहरा नुकसान पहुंचा सकती है। कई मरीज स्ट्रोक के भी शिकार हो रहे हैं। कुछ हालिया अध्ययन बताते हैं कि कोविड के कुछ मरीजों में मस्तिष्क संबंधी समस्या होने का भी खतरा है। कोरोना से ग्रस्त जिन मरीजों को पहले से ही मस्तिष्क संबंधी समस्या है, उनमें से अधिकतर मरीजों को स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या से भी गुज़रना पड़ा है। वहीं कुछ मरीजों को बेहोशी की समस्या हुई तो कई मरीजों ने मसल इंजरी की शिकायत भी की। ये सभी समस्याएं सीधे-सीधे नर्वस सिस्टम से जुड़ी हुई हैं। डॉ. विपुल गुप्ता, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस अर्टमिस हॉस्पिटल बता रहे हैं कब अलर्ट हो जाएं.... कब नज़र आते हैं लक्षण‌? कुछ मरीजों में स्ट्रोक के लक्षण कोविड के लक्षणों से पहले नज़र आ सकते हैं तो वहीं कुछ मरीजों में स्ट्रोक के लक्षण कोविड के निदान के 7-10 दिनों के बाद नज़र आते हैं। क्यों हो रही है स्ट्रोक की समस्या? इसको लेकर अब तक क...

कोरोना से गर्भस्थ शिशु को खतरा नहीं लेकिन प्रेग्नेंसी के अंतिम माह के अधिक अलर्ट रहना जरूरी, ब्रेस्टफीडिंग से नहीं फैलता वायरस

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कोरोना इंफेक्शन एक महामारी है जो गर्भवती महिलाओं में ज्यादा गंभीर रूप से देखी जा सकती है, क्योंकि उनकी इम्युनिटी आम महिलाओं की तुलना में कमजोर होती है। शरीर में बहुत से बदलाव आने की वजह से गर्भवती महिलाओं को इस समय ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। कोरोना से बचाव को लेकर बताई गईं सभी सावधानियां जैसे सोशल डिस्टेंसिंग, सफाई और हाईजीन का विशेष ध्यान दें। गर्भावस्था में 3-4 रुटीन चेकअप पर्याप्त होते हैं। जरूरत पड़ने पर टेलीकंसल्टेशन का प्रयोग कर सकते हैं। नॉर्मल गर्भावस्था में तीन सोनोग्राफी (11-13 हफ्ते, 18-20 हफ्ते और 32-34 हफ्ते पर) पर्याप्त हैं। अस्पताल जाने के दौरान ये सावधानियां जरूर बरतें और आरोग्य सेतु एप को डाउनलोड कर लें। गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से गरारे करें और गरम पानी की भाप लें। गुनगुने पानी का सेवन करें। पर्याप्त पोषण लें एवं तरल पदार्थों का सेवन बढ़ा दें। डॉक्टर की सलाह पर विटामिन सी और मल्टी विटामिन दवाइयों का सेवन किया जा सकता है। डॉ. ऋषिकेश पाई, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट, लीलावती हॉस्पिटल, मुंबई दे रहे हैं गर्भवती महिलाओं के सवालों के जवाब- #1) इस दौर में मां बनने से जुड़ीं...

कोरोना से लड़ने की हर्ड इम्युनिटी 60% से घटकर 43% हो सकती है क्योंकि लोग मिलने-जुलने से खुद को नहीं रोक रहे

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ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने हर्ड इम्युनिटी पर नया दावा पेश किया है। उनका कहना है कि कोरोना से लड़ने में लोगों की हर्ड इम्युनिटी का स्तरजितना पहले सोचा गया था यह उससे भी नीचे गिर सकता है। यानी लोगों के समूह में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। हर्ड इम्युनिटी का मतलब होता है एक पूरे झुंड याआबादी की बीमारियों से लड़ने की सामूहिक रोग प्रतिरोधकता पैदा हो जाना। जैसे चेचक, खसरा और पोलियो के खिलाफ लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हुई थी। हर्ड इम्युनिटी गिरने का कारण लोगों को मिलना-जुलना रिसर्च करने वाली नॉटिंग्घम यूनिवर्सिटी केशोधकर्ता फ्रैंक बॉल के मुताबिक, इम्युनिटी के लिए आबादी में मौजूद हर एक इंसान को वैक्सीन लगना जरूरी है। रिसर्च के दौरान सामने आया कि हर्ड इम्युनिटी गिरने का स्तर लोगों की एक्टिविटी है न कि उनकी उम्र। महामारी के दौरान भी लोग एक-दूसरे से मिल रहे हैं, इसलिए इन्हें संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। इस तरह आबादी में जितना ज्यादा संक्रमण फैलेगा हर्ड इम्युनिटी का स्तर घटेगा। अलग-अलग उम्र के लोगों और उनकी गतिविधि का विश्लेषण किया गया शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीन लगने के ब...

पतंजलि की कोरोनिल को सरकार से हरी झंडी नहीं मिली, आयुष मंत्रालय के पत्र को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है

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क्या वायरल: एक पत्र वायरल हो रहा है। जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि पतंजलि की कोरोनिल दवाको आयुष मंत्रालय की अनुमति मिल गई है। दरअसल 23 जून कोपतंजलि की तरफ से ये दावा किया गया कि उसके द्वारा बनाई गई दवा (कोरोनिल) कोविड-19 का इलाज करने में कारगर है। आयुष मंत्रालय ने इस विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए प्रतिबंध लगा दिया। साथ ही यह भी कहा कि मंत्रालय को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जो कि दी जानी चाहिए थी। अब ये दावा हो रहा है कि आयुष मंत्रालय ने अनुमति दे दी है। दावे से जुड़े कुछ ट्वीट https://twitter.com/GourangBanna/status/1275791362307223554 https://twitter.com/ShankiGoutam3/status/1275781737776394241 https://twitter.com/shete_jitendra/status/1275769077164675075 आयुष विभाग का यह पत्र वायरल हो रहा है फैक्ट चेक पड़ताल पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एमडी आचार्य बालकृष्ण ने भी वही पत्र फेसबुक पर पोस्ट किया है जिसे लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इसी पत्र को आयुष मंत्रालय का अप्रूवल बताया जा रहा है। सबसे पहले हमने पत्र को पढ़ा। इस पत्र का सार है : 23 ...

महीनों बाद जब गले लगे तो बीच में प्लास्टिक में लिपटी बंदिशों की दीवार थी, आंसू तो छलके लेकिन पोंछ न सके

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लॉकडाउन हटने के बाद कई इमोशनल कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, और उनमें समाई हैंअपनों से महीनों के बाददोबारामुलाकात की कहानियां। लेकिन, अब माहौल और मिजाजबदला हुआ हैक्योंकि बीच में है मास्क और प्लास्टिक की दीवार। भावुक कर देने वाली इन तस्वीरों में गले लगने वालीजो मुलाकातें बयां होती हैं, उन्हेंदेखकर मन तड़प उठता है।एक-दूसरे को इतने दिनों बाददेखकर छलकेप्यार के आंसुओं कोपोंछना अब एकडर बन गया है। येहालात कब तक बने रहेंगे, कहा नहीं जा सकताक्योंकि महामारी अपने उफान पर है। हालांकि, दुनिया के महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क लगाकर सुरक्षित ढंग सेगले मिलना, सीधेहाथ मिलाने से ज्यादा सुरक्षितहै क्योंकि इसमेंसंक्रमण फैलनेका खतरा कम है। तस्वीरों में देखिए अपनों से मुलाकात की इमोशनल कर देने वाली 5 कहानियां - 59 बरस में एक दिन ऐसा भी आया: लॉकडाउन के कारण 81 साल की अगस्टीना अपने पति पेस्कुअल पेरेज (84) से 102 दिनों से अलग थीं।दोनों स्पेन के बार्सिलोना मेंरहते हैं। पति एक नर्सिंग होम के हेल्थ वर्कर हैं। करीब तीन माह बाद नर्सिंग होम ने कर्मचारियों को अपने परिजनों से मिलने का मौका दिया।...