महीनों बाद जब गले लगे तो बीच में प्लास्टिक में लिपटी बंदिशों की दीवार थी, आंसू तो छलके लेकिन पोंछ न सके
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लॉकडाउन हटने के बाद कई इमोशनल कर देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं, और उनमें समाई हैंअपनों से महीनों के बाददोबारामुलाकात की कहानियां। लेकिन, अब माहौल और मिजाजबदला हुआ हैक्योंकि बीच में है मास्क और प्लास्टिक की दीवार।
भावुक कर देने वाली इन तस्वीरों में गले लगने वालीजो मुलाकातें बयां होती हैं, उन्हेंदेखकर मन तड़प उठता है।एक-दूसरे को इतने दिनों बाददेखकर छलकेप्यार के आंसुओं कोपोंछना अब एकडर बन गया है।
येहालात कब तक बने रहेंगे, कहा नहीं जा सकताक्योंकि महामारी अपने उफान पर है। हालांकि, दुनिया के महामारी विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क लगाकर सुरक्षित ढंग सेगले मिलना, सीधेहाथ मिलाने से ज्यादा सुरक्षितहै क्योंकि इसमेंसंक्रमण फैलनेका खतरा कम है।
तस्वीरों में देखिए अपनों से मुलाकात की इमोशनल कर देने वाली 5 कहानियां -
59 बरस में एक दिन ऐसा भी आया: लॉकडाउन के कारण 81 साल की अगस्टीना अपने पति पेस्कुअल पेरेज (84) से 102 दिनों से अलग थीं।दोनों स्पेन के बार्सिलोना मेंरहते हैं। पति एक नर्सिंग होम के हेल्थ वर्कर हैं। करीब तीन माह बाद नर्सिंग होम ने कर्मचारियों को अपने परिजनों से मिलने का मौका दिया। पेस्कुअल अपनेपरिजनों से मिलने वाले पहले शख्स थे। 22 जून को उनकी पत्नी अगस्टीना मिलने पहुंची। दोनों के बीच प्लास्टिक की दीवार थी। मास्क लगाए एक दूसरे को किस करने के साथ दोनों बड़े ही इमोशनल तरीके से मिले। ये लम्हा यादगार भी बना क्योंकि दोनों पिछले 59 साल में कभी एक-दूसरे से अलग नहीं रहे थे। बीते दिनों बार्सिलोना का पुइग-आई फाबरा हॉस्पिटल एक यादगार और इमोशनल तस्वीर का गवाह बना। लॉकडाउन के बादजब 61 साल की डोलोरेज अपने लाचार पिता जोज लोजानो (87) से 4महीने में पहली बार मिलीं तो घुटनों पर बैठकर उन्हें देर तक प्लास्टिक के पर्दे के पीछे से निहारती रही। मास्क लगाए और हाथों में पीपीई पहनें जोज व्हीलचेयर पर अपनी बेटी से मिलने पहुंचे थे। इतने लम्बे समय के बाद दोनों मिले तो दानों की आंखों में आंसू थे, और दोनों बस एक-दूसरे को दिलासा देते रहे।स्पेन में ज्यादातर नर्सिंग होम में ऐसे ही हालात हैं क्योंकि कोरोना के मामले बढ़ने के बाद हेल्थ वर्करों में भी संक्रमण के मामले बढ़े क्योंकि वे लम्बे समयसे नर्सिंग होम में ही रह रहे हैं। संक्रमण के मामले घटने के बाद अब परिजन उनसे मिलने आ रहे हैं लेकिन एक-दूसरे को छू नहीं सकते। तस्वीर में प्लास्टिक में लिपटे हाथों से पिता ने अपनी बेटी के हाथों को थामा और कहा कि, चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा। ये वक्त भी गुजर जाएगा।यह नजारा इंग्लैंड के ईस्ट मिडलैंड्स एयरपोर्ट का है, जहां तीन महीने के लॉकडाउन के बाद पहली बार कोई यात्री दिखा। तस्वीर में शेनॉन और उनकी मां कैरोलिनदिखाई दे रही हैं। शेनॉन मार्च में स्पेन गई थीं। महामारी के बीच अपने अंकल की देखभाल के लिए दो हफ्तों की ट्रिप प्लान की थी लेकिन कोरोना के मामले बढ़नेपर वह लौट न सकीं। तीन महीने बाद जब वह लौटीं तो मां से मिलने के बाद कई मिनट तक रोती रहीं। मास्क पहने हुए शेनॉन कहती हैं कि मैं इतना इमोशनल हो गई कि बस मैं रोते रहना चाहती थी।तस्वीर में दिख रही 4 साल की मिला स्नेडन कैंसर (ल्यूकीमिया) से जूझ रही हैं। लॉकडाउन के कारण वह पिछले दो महीनों से अपने पिता से दूर थी। इस दौरान मिलने की अनुमति नहीं थी क्योंकि मिला की कीमोथैरेपी चल रही थी और इम्युनिटी कम होने के कारण संक्रमण का खतरा था। हाल ही में जब वह अपने पिता से मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मिला लगातार बोले जा रही थी और बाकी सब खामोश थे, शब्दों से उसकी पिता से मिलने की बेसब्री जाहिर हो रही थी।लॉकडाउन के दौरान दोनों की मुलाकात के बीच थी एक शीशे की खिड़की। मिला अपने पिता स्कॉट को शीशे की खिड़की से देखती थीं और फोन के जरिए बात करती थी। पिता स्कॉट के लिए यह सबसे कठिन समय था क्योंकि लॉकडाउन के दौरान उनकी मां की कोरोनावायरस के कारण मौत हो गई और बेटी कैंसर से जूझ रही थी। स्कॉट अपने इमोशन का काबू करके बेटी से मिलने पहुंचते थे।ब्रिटेन के एंटनी कॉविन ने अपनी दादी से मिलने के लिए घर के बाहर प्लास्टिक कर्टन का फ्रेम तैयार किया है। इसमें प्लास्टिक के हाथ लगाए ताकि जब दादी मां से मुलाकात हो तो उन्हें गले लगाया जा सके। एंटनी ने प्लास्टिक के इन पर्दों को नाम दिया 'कडल कर्टेन'। एंटनी चाहते थे कि जब वह दादी से मिलें तो उन्हें संक्रमण का खतरा न हो, इसलिए उन्होंने इसे तैयार किया। मुलाकात के दौरान दोनों काफी इमोशनल हुए और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
कोरोना का संक्रमण होने के बाद पहले हफ्ते में पांच या इससे अधिक तरह के लक्षण दिखते हैं तो यह इशारा है कि मरीज में लम्बे समय कोरोना का असर रह सकता है। यह दावा किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च में किया गया है। रिसर्च कहती है, संक्रमण के बाद अगर पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, आवाज भारी होना, मांसपेशियों और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं तो मरीज लम्बे समय के कोरोना से परेशान रह सकता है। इसे लॉन्ग कोविड भी कहते हैं। लम्बे समय कोविड का साइडइफेक्ट रिसर्च कहती है, ऐसे मरीज जो कोरोना का संक्रमण होने के 4 से 8 हफ्ते बाद तक रिकवर नहीं कर पाते उनमें पोस्ट कोविड का खतरा बढ़ता है। पोस्ट कोविड यानी लम्बे समय तक कोरोना के साइडइफेक्ट से जूझना। रिकवरी के बाद ऐसे मरीजों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ, मांसपेशियों में दर्द और अधिक थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। 40 हजार मरीजों पर हुई रिसर्च ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने कोरोना के 40 हजार मरीजों पर रिसर्च की। इसमें ब्रिटेन और स्वीडन के मरीज शामिल किए गए। इनमें से 20 फीसदी ने कहा, संक्रमण के 1 माह बाद भी पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाए। 190 मरीज...
कोरोनाकाल में इंसानों के कारण धरती में होने वाले वाइब्रेशन यानी कम्पन में 50 फीसदी की कमी हुई। धरती के अंदर का शोर कम हुआ है। यह आंकड़ा बेल्जियम की रॉयल वेधशाला ने दुनियाभर के 117 देशों के 268 रिसर्च स्टेशन से मिली जानकारी के आधार पर जारी किया। रॉयल वेधशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, आम दिनों में शहरी क्षेत्र में इंसान, कार, ट्रेन और बसों के कारण धरती में वाइब्रेशन पैदा होता है लेकिन लॉकडाउन के दौरान धरती काफी हद तक शांत रही। भूकम्प का पता लगाना आसान हुआ रिसर्च रिपोर्ट से एक बात साफ हुई कि धरती में कंपन कम होने के कारण भूकंप की जानकारी समय से पहले देना आसान हो जाता है। धरती में कम्पन कितना हुआ इसे सिस्मोमीटर्स के जरिए मापा जाता है। इन सेंसर्स का इस्तेमाल भूकम्पीय तरंगों के साथ मानव गतिविधियों से होने वाली ध्वनि को पकड़ने और समझने में काम आता है। यह बारीक से बारीक वाइब्रेशन साउंड को माप सकता है। दुनिया के हर हिस्सों में इससे मॉनिटरिंग की जाती है। अप्रैल में ही जताई थी सम्भावना इस रिसर्च के मुख्य शोधकर्ता डॉ. थॉमस लीकॉक ने अप्रैल में कहा था कि इंसानों की गतिविधि कम होने के कारण हमें...
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