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Showing posts from November, 2020

पहली बार देश में शहर के नाम पर रखा मेढ़क का नाम, गड्‌ढा खोदने के लिए जाना जाता है यह ब्राउन मेढक

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जमीन में गड्‌ढा खोदने वाले एक मेढक का नाम बेंगलुरु के नाम पर रखा गया है। इसे 2018 में खोजा गया था। यह पहली बार है जब देश किसी शहर के नाम पर मेढक का नाम रखा गया है। मेढक की इस नई प्रजाति का नाम 'स्फेरोथिका बेंगलुरु' रखा गया है। इसे खोजने वाले माउंट कार्मल कॉलेज के प्रोफेसर दीपक पी. ने मेढक की तस्वीरें जुलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया में भेजी हैं। इस पर और रिसर्च की जानी है। मेढक का नामकरण करने वाली वैज्ञानिकों की टीम का कहना है, मेढकों के रहने की प्राकृतिक जगह को दोबारा तैयार करने की जरूरत है। यह मेढक बेंगलुरु शहर के राजनकुंटे में एक बंजर जगह पर मिला था। वैज्ञानिकों ने इंसान में नया अंग खोजा, कहा; नाक के पिछले हिस्से में मिला यह अंग कैंसर के इलाज में मदद कर सकता है भारत में जल-जमीन पर रहने वाले जीवों की खोज बढ़ीं मेढक पर हुई रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल जूटॉक्सा में पब्लिश हुई है। रिसर्च कहती है, जमीन और पानी दोनों जगह रहने वाले ऐसे एम्फीबियन्स जीवों की खोज भारत में पिछले कुछ सालों में बढ़ी हैं। वर्तमान में मिली मेढक की नई प्रजाति जमीन में गड्‌ढे खोदने के लिए जानी जाती है। जंगल के बाहर ...

100 साल के झेंग ने लम्बी उम्र का सीक्रेट स्माकिंग और अल्कोहल को बताया

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अमूमन 100 साल या इससे अधिक समय तक जीने वाले इंसान लम्बी उम्र का सीक्रेट खुशहाली को बताते हैं लेकिन चीन में रहने वाले झेंग केमिन का दावा चौंकाने वाला है। झेंग केमिन ने कुछ महीने पहले अपना 100वां जन्मदिन मनाया। झेंग ने अपनी लम्बी उम्र का सीक्रेट सिगरेट, स्मोकिंग और जंक फूड को बताया। झेंग कहते हैं, मुझे मालूम है डॉक्टर्स मेरी बात को नहीं मानेंगे लेकिन मैंने जीवनभर यही किया है। पांच पीढ़ियों के साथ रह रहे मैं क्या खा-पी रहा हूं, यह कभी नहीं सोचा झेंग घर में अपनी पांच पीढ़ियों के साथ रह रहे हैं। जन्मदिन पर उन्होंने लम्बी उम्र का सीक्रेट बताते हुए उन्होंने कहा, मैं क्या खा रहा हूं, क्या पी रहा हूं, यह सोचकर परेशान नहीं होता। न मैं चीजों से चिढ़ता हूं। 90 साल की उम्र के बाद शराब की मात्रा घटाई मैं सिगरेट और शराब को कंट्रोल नहीं कर पाया लेकिन 90 साल की उम्र के बाद शराब पीने की मात्रा घटाई। मैं नहीं चाहता था कि काम के दौरान कोई दुर्घटना हो, इसलिए ऐसा किया। फिलहाल, रोज एक सिगरेट का पैकेट खत्म कर देता हूं। मुझे इसकी लत 80 साल पहले लगी थी। इसकी शुरुआत इसलिए कि थी ताकि मैं काम के दौरान लोगों से...

लकड़ी के धुएं ने डैमेज किए भारतीयों के फेफड़े, ऑक्सीजन पहुंचने की क्षमता घटी; सर्दियों में बढ़ते हैं मामले

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लकड़ी और दूसरे अधिक धुआं पैदा करने वाले ईधन को जलाते हैं तो आप फेफड़े डैमेज कर रहे हैं। यह अलर्ट वैज्ञानिकों ने जारी किया है। नॉर्थ अमेरिका में रेडियोलॉजिकल सोसायटी की एनुअल मीटिंग में वैज्ञानिकों ने कहा, सांस के जरिए बड़ी मात्रा में धुएं में मौजूद प्रदूषण फैलाने वाले तत्व और बैक्टीरियल टॉक्सिन सीधे तौर पर फेफड़ों में पहुंच रहे हैं और डैमेज कर रहे हैं। भारतीयों पर हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है। हर साल धुएं में खाना बनाने से 40 लाख मौतें मीटिंग में फेफड़ों पर रिपोर्ट पेश की गई और बताया गया कि हर साल ऐसे बायोमास फ्यूल के जलने से दुनियाभर में 40 लाख मौतें हो रही हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अभिलाष किज्जाके कहते हैं, ऐसे मामले सामने आने की दो वजह हैं। पहली, लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और दूसरी, धुएं से डैमेज होते फेफड़ों की जानकारी से बेखबर हैं। दुनियाभर में 300 करोड़ लोग इसी तरह खाना बनाते हैं। 23 भारतीयों पर की रिसर्च रिसर्च में शामिल लोवा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरिक ए. हॉफमैन कहते हैं, हमने इसका पता लगाने के लिए 23 ऐसे भारतीयों को चुना जो लकड़ी जलाकर खाना बनाते हैं। इन...

हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मौत का खतरा बढ़ाता है, इसे कंट्रोल करें

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हार्ट और डायबिटीज के मरीजों में कोरोना होने पर मौत का खतरा क्यों ज्यादा है, इसे चीनी वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में समझाया है। रिसर्च के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह कोलेस्ट्रॉल है। कोरोना के मामले में अक्सर मरीज में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है। यह कोरोनावायरस को संक्रमण फैलाने में मदद करता है। संक्रमण के बाद वायरस कोलेस्ट्रॉल के कणों के साथ मिलकर खास तरह का रिसेप्टर SR-B1 तैयार करता है। ऐसा होने पर संक्रमण का लेवल और जान का खतरा दोनों बढ़ता है। आसान भाषा में समझें तो कोलेस्ट्रॉल जितना ज्यादा होगा जान का जोखिम भी उतना ही बढ़ेगा। संक्रमण फैलाने में कोलेस्ट्रॉल कोरोना की कैसे मदद करता है रिसर्च करने वाले चाइनीज एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंस के वैज्ञानिकों का कहना है, कोलेस्ट्रॉल इंसान के शरीर की हर कोशिकाओं में पाया जाता है इसकी मदद से SR-B1 रिसेप्टर टार्गेट करता है। संक्रमण फैलाने वाले कोरोना के स्पाइक प्रोटीन के दो हिस्से होते हैं- सबयूनिट-1 और सबयूनिट-2। कोलेस्ट्रॉल सबयूनिट-1 के साथ जुड़ता है और संक्रमण को गंभीर बनाता है। हार्ट और डायबिटीज के मरीजों को खतरा ज्यादा क्यों? वैज्ञानिकों का कहना है...

कोरोना से रिकवरी के 7 दिन बाद अपनी क्षमता का 50% ही वर्कआउट करें वरना दिल-फेफड़ों को खतरा

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कोरोना से रिकवरी के बावजूद एक्सरसाइज के पुराने रूटीन पर कब लौटें? यह एक बड़ा सवाल है। अमेरिका के जाने-माने स्पोर्ट्स फिजिशियन डॉ. जॉर्डन मेट्जेल कहते हैं कि सामान्य धारणा यह है कि एक्सरसाइज के मामले में हमें अपने शरीर की सुननी चाहिए। यानी जब शरीर को लगे कि वह एक्सरसाइज करने के लिए फिट है, तभी हमें एक्सरसाइज करना चाहिए। लेकिन कोविड ने पुरानी सभी धारणाओं को खत्म कर दिया है। कोरोना के संक्रमण के बाद मरीजों को अपने पुराने रूटीन पर लौटने में समस्या आ रही है। सैकड़ों एथलीट अपनी पुरानी क्षमता पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें थोड़े से वर्कआउट के बाद ही थकान और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं आ रही हैं। डॉ. जॉर्डन कहते हैं कि कोरोना के बाद मायोकार्डिटिस जैसी समस्या सामने आ सकती है। यह वह स्थिति होती है, जब दिल की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इससे दिल की क्षमता कमजोर हो जाती है। दिल के पंप करने की क्षमता घट जाती मायोकार्डिटिस में हार्ट और उसके इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर सकती है, जिससे दिल की खून पंप करने की क्षमता कम हो जाती है। धड़कनें अनियमित हो जाती हैं। डॉ. जॉर्डन डी कहते ह...

खाने के शौकीन हैं तो 90/10 का नियम याद रखें, अपने वजन से ऐसे जानें रोज आपको कितनी कैलोरी चाहिए

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रोज आपको कितनी कैलोरी की जरूरत है उम्र, एक्टिविटी लेवल, बॉडी की बनावट, हेल्थ पर निर्भर है। आप हेल्दी हैं और रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज करते हैं तो पता चल सकता है कि मौजूदा वजन में बने रहने के लिए कितनी कैलोरी चाहिए। अपने कुल वजन (पाउंड में) में 15 से गुणा दे दीजिए। उदाहरण के लिए वजन 130 पाउंड है तो इसमें 15 से गुणा कर दीजिए। यानी आपको रोजाना 1950 कैलोरी चाहिए। एक पाउंड 450 ग्राम होता है। क्या इसमें कोई खतरा है? अगर खाने के नियम बार-बार तोड़े जाएं तो जरूर खतरा है। हार्वर्ड हार्ट लेटर के एडिटर इन चीफ डॉ. दीपक एल भट्‌ट कहते हैं कि एक बार में बहुत सी अनहेल्दी चीजें खाना शरीर में कई तरह के बायोकेमिकल बदलाव कर देता है। जैसे- खाने के बाद तुरंत ही ट्राईग्लिसराइड का बढ़ जाना। यह खाने के कुछ घंटों के बाद ही हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर है कि हम स्वस्थ होने के बावजूद हेल्दी डाइट के नियम का पालन करते रहें। नियम तोड़ना है तो ये रूल जरूरी आप हमेशा हेल्दी डाइट लेते हैं और कोई बीमारी नहीं है तो कुछ खास मौकों पर आप नियम तोड़ सकते हैं। लेकिन इसके लिए 90/10 का रूल याद रखें। इसमें आप 90 फीस...

अब घर बैठे दवाई मांगना और डॉक्टर से परामर्श लेना हुआ बेहद आसन

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आज का दौर डिजिटाइजेशन का है, जिसमें अधिकतर काम ऑनलाइन, घर बैठे चंद मिनटों में आसानी से हो जाते हैं। चाहे भी फिर कपड़े खरीदना हो, किसी को बिल का भुगतान करना हो या किसी ट्रेन का टिकट करना हो। सभी काम आसानी से घर बैठे सिर्फ 1 क्लिक पर हो जाते हैं। यहां तक की जिस चिकित्सा क्षेत्र में इसे असंभव माना जाता था, वहां भी डॉक्टर से ऑनलाइन परामर्श और दवाइयों का ऑनलाइन ऑर्डर बड़ी आसानी से होने लगा है। कोरोना महामारी के बाद से समाज ने ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं को धड़ल्ले से स्वीकार किया है। हालांकि,ऑनलाइन सामान या दवाइयां लेने से आपके साथ कई बार फ्रॉड भी हो जाता है या आप जो सामान या दवा मंगवाते हैं उसकी जगह कोई और दवाइयां आप तक पहुँचती है। लेकिन भारत के अपने हेल्थकेयर नेटवर्क मेडकॉर्ड्स” ने कस्टमरों के विश्वास को कायम रखा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जनता के लिए यह सबसे भरोसेमंद साबित हो रहा है। मेडकॉर्ड्स संस्था ने दो मोबाइल ऐप आम जनता और मेडिकल स्टोर्स के लिए शुरू किए हैं। "आयु ऐप" जो की आम जनता के उपयोग के लिए है और दूसरा "सेहत साथी ऐप" जो की मेडिकल स्टोर्स के लिए बनाया गया...

बच्चों के खिलौनों, कार के इंटीरियर, सोफा में आग से बचाने के लिए जिन केमिकल का इस्तेमाल, उनसे कैंसर का बड़ा खतरा

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ड्यूक यूनिवर्सिटी की केमिस्ट डॉ. हीदर स्टेपल्टन अपने साथी से बेबी गियर में मिले ऐसे विषैले केमिकल पर चर्चा कर रही थीं, जो खिलौनों को आग से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते है। उनका एक साल का बेटा पास ही खेल रहा था। इसी बीच दोनों यह देखकर चौंक गए कि उनका बेटा जिस पॉलिएस्टर टनल से खेल रहा था, उस पर भी एक टैग लगा था। इस पर लिखा था कि कपड़ा ज्वलनशील मानकों के हिसाब से तैयार किया गया है। यानी टेंट के कपड़े में केमिकल फ्लेम रिटार्डेंट इस्तेमाल किया गया था। यह केमिकल इंसान का डीएनए तक बदल सकता है डॉ. स्टेपल्टन ने उस कपड़े को अपनी लैब में टेस्ट किया, तो वे यह जानकर चौंक गईं कि कपड़े में फ्लेम रिटार्डेंट के रूप में क्लोरीनेटेड ट्रिस केमिकल का इस्तेमाल हुआ था। इस केमिकल का इस्तेमाल पायजामा बनाने वाले निर्माता सालों पहले बंद कर चुके थे क्योंकि यह कैंसर का कारण हो सकता था और डीएनए तक बदलने की क्षमता रखता था। क्या है फ्लेम रिटार्डेंट दरअसल, फ्लेम रिटार्डेंट ऐसे केमिकल हैं, जिनका इस्तेमाल 70 के दशक में ज्वलनशील मानकों को पूरा करने के लिए शुरू किया था। हालांकि, अब नर्सिंग पिलो, बेबी प्रॉडक्ट, बच्चों क...

अमेरिका में अल्ट्रावॉयलेट लैम्प से घर-ऑफिस को सैनेटाइज करने में 7 लोगों की आंखें डैमेज हुईं

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अमेरिका में अल्ट्रावॉयलेट लैम्प से घर और ऑफिस को सैनेटाइज करने के दौरान 7 लोगों की आंखें डैमेज हो गईं। मरीजों की कॉर्निया में सूजन आई और दर्द से बेहाल रहे। यह बात मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आई। वैज्ञानिकों का कहना है कि मरीज रिकवर हो रहे हैं लेकिन लोगों को अल्ट्रावॉयलेट (UV) लैम्प इस्तेमाल करने की सही जानकारी होना जरूरी है। ऐसी लापरवाही दोबारा होने पर आंखें जिंदगीभर के लिए डैमेज हो सकती हैं। आई एक्सपर्ट डॉ. जेस्सी सिंगिलो कहती हैं, महामारी की शुरुआत में हमारे पास आने वाले ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही थी, जिनकी आंखों में जलन थी और दर्द से परेशान थे। ये मरीज सामान्य रोशनी के सम्पर्क में आते ही सेंसिटिव हो जाते थे यानी इनकी दिक्कतें बढ़ जाती थीं। धीरे-धीरे मामले बढ़ने पर ये समझ आया कि अल्ट्रावॉयलेट लैम्प की रोशनी के सीधे सम्पर्क में आने पर मरीजों में ऐसा हो रहा है। 5 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला ऑक्यूलर इम्यूनोलॉजी एंड इंफ्लेमेशन जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, सातों मरीजों में ये मामले 1 अप्रैल से 19 जुलाई 2020 के बीच सामने आए। बेसकॉम पाल्मर आई इ...

सर्दियों में हार्ट अटैक रोकने के लिए सुबह पानी कम पिएं और वॉक करने से बचें; नमक कम लें

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पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च रिपोर्ट कहती है, जिन्हें पहले से हार्ट डिसीज है, सर्दी में उनमें हार्ट अटैक का खतरा 31 फीसदी तक बढ़ जाता है। आखिर ठंड में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले क्यों बढ़ते हैं और कैसे इनका खतरा कम किया जा सकता है, बता रहे हैं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुब्रतो मंडल... ठंड में खतरा क्यों बढ़ता है, पहले इसे समझिए सोते समय शरीर की एक्टिविटीज स्लो हो जाती हैं। बीपी और शुगर का लेवल भी कम होता है। लेकिन उठने से पहले ही शरीर का ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम उसे सामान्य स्तर पर लाने का काम करता है। यह सिस्टम हर मौसम में काम करता है। लेकिन ठंड के दिनों में इसके लिए दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे जिन्हें हार्ट की बीमारी है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। ...क्योंकि नसें ज्यादा सिकुड़ जाती हैं ठंड के मौसम में नसें ज्यादा सिकुड़ती हैं और सख्त बन जाती हैं। इससे नसों को गर्म और एक्टिव करने के लिए ब्लड का फ्लो बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में जिन्हें पहले से ही दिल की बी...

रोबोट से कोरोना की जांच कराने की तैयारी, यह ECG और ब्लड टेस्ट भी करता है; मास्क न पहनने पर टोकता है

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मिस्त्र में ऐसा रोबोट तैयार किया गया है जो कोविड-19 टेस्ट कर सकता है। इतना ही नहीं यह मरीज का तापमान चेक करता है और मास्क न पहनने वालों को चेतावनी भी देता है। कोविड टेस्ट के अलावा यह इकोकार्डियोग्राम (ECG), ब्लड टेस्ट और एक्स-रे भी करता है। जांच के परिणाम रोबोट के सीने पर लगी स्क्रीन पर भी देख सकते हैं। रोबोट का चेहरा और हाथ इंसानों जैसे इस रोबोट को उत्तरी काहिरा के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में तैयार किया गया है। इसका नाम Cira-03 रखा गया। इस रोबोट तैयार करने वाले महमूद अल-कौमी कहते हैं, यह वायरस के संक्रमण को रोकने में मदद करेगा। इसका चेहरा और हाथ इंसानों जैसे हैं। इसलिए यह ब्लड टेस्ट और ECG भी कर सकता है। मरीज का रोबोट से डर को खत्म करने की कोशिश मैंने इसे पूरी तरह से इंसानों की तरह दिखने वाला रोबोट बनाने की कोशिश की ताकि मरीज इससे डरें नहीं। उनका यह न लगे की कोई बक्सा उनके आगे पीछे घूम रहा है। मरीजों की तरह से पॉजिटिव रेस्पॉन्स से मैं खुश हूं। ऐसे करता है टेस्टिंग कोविड टेस्ट करने के लिए Cira-03 मरीज की ठोडी को ऊपर उठाता है और एक हाथ से स्वैब को मुंह में डालता है। इस पर सैम्पल ल...

कोरोना लिक्विड लेयर की सतह पर कई दिनों तक जिंदा रहता है, मास्क लगाएं, दूरी बनाएं और हैंडवॉश करते रहें

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कोरोना वायरस पतली लिक्विड लेयर से चिपककर सतह पर जीवित रहता है। यह दावा आईआईटी-बॉम्बे ने अपनी रिसर्च में किया है। रिसर्च के मुताबिक, यह घातक वायरस ठोस सतहों पर कई घंटे और कई दिन तक जिंदा रहता है। ‘फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स’ जर्नल में पब्लिश रिपोर्ट में बताया गया है कि ठोस सतहों पर कई दिन कई घंटे तक कैसे वायरस जीवित रहता है। ऐसे समझें पूरी रिसर्च वैज्ञानिकों का कहना है, आमतौर पर सांस के जरिए निकलने वाले सामान्य ड्रॉप्लेट्स कुछ सेकंड्स में सूख जाते हैं लेकिन किसी अलग-अलग सतहों पर मौजूद कोरोना कुछ घंटों तक जिंदा रहता है। आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर रजनीश भारद्वाज ने बताया, हमने रिसर्च नैनोमीटर वाली लिक्विड लेयर पर किया है। यह सतह पर खास तरह के फोर्स से चिपकती है, इसलिए कोरोना इस सतह पर घंटों जीवित रहता है। प्रोफेसर अमित अग्रवाल कहते है, पतली पर्त वाला मॉडल बताता है कि किसी भी सतह पर पतली पर्त का मौजूद होना और इसका सूखना तय करता है कि इस पर वायरस कितनी देर तक रहेगा। मामले घटें या बढ़ें, अभी कोरोना से बचाव हर हाल में जरूरी दुनियाभर के डॉक्टर्स भी यही कह रहे हैं कि यदि हर व्यक्ति ठीक तरह से म...

देश के 50% पुरुष और दो तिहाई शहरी महिलाओं को डायबिटीज होने का खतरा, 5 पॉइंट्स में समझें ऐसा क्यों

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देश के लोगों में डायबिटीज का खतरा घट नहीं रहा है। हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च भी चौंकाने वाली है। रिसर्च कहती है, देश में 20 साल की उम्र वाले 50 फीसदी से अधिक पुरुष और दो तिहाई महिलाओं को जीवन में कभी न कभी टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है। डायबिटोलॉजिया जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय युवाओं में डायबिटीज होने का खतरा अधिक है। रिसर्च में शामिल दिल्ली के सेंटर फॉर क्रॉनिक डिसीज कंट्रोल के वैज्ञानिकों का कहना है, देश पहले से ही बीमारियों के बोझ तले दबा है। भारत में 7.7 करोड़ वयस्क डायबिटीज से जूझ रहे हैं। 2045 तक इनकी संख्या दोगुनी हो सकती है। 5 पॉइंट्स : डायबिटीज का खतरा क्यों, इसकी वजह भी जान लीजिए रिसर्चर्स के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। इनके खानपान की क्वालिटी और फिजिकल एक्टिविटी घट रही है। अनफिट होता है शरीर और अनहेल्दी फूड एक नई महामारी ला सकते हैं। उम्र, जेंडर और बीएमआई के आधार पर रिसर्च की गई। डायबिटीज के मरीजों की मृत्यु दर पर केंद्र सरकार की 2014 में पेश की रिपोर्ट को रिसर्च में शामिल किया गया। इसके ...

दुनिया का सबसे गहरा स्विमिंग पूल पर्यटकों के लिए खुला, 45.5 मीटर गहरे पूल में मेहमानों के रहने की व्यवस्था भी

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पोलैंड में दुनिया का सबसे गहरा स्विमिंग पूल ‘डीपस्पॉट’ पर्यटकों के लिए खुल गया है। इसकी गहराई 45.5 मीटर (150 फुट) है। पर्यटक डीप डाइविंग का अनुभव कर सकें इसलिए इसके लिए इसमें अंडरवाटर गुफाएं भी बनाई गई हैं। आमतौर पर एक सामान्य पूल 25 मीटर गहरा होता है। यहां मेहमानों के रुकने की भी व्यवस्था है। वे कमरे के अंदर से ही डाइविंग को देख सकते हैं। अभी तक सबसे गहरे पूल का रिकॉर्ड 42 मीटर गहरे इटली के मोंटेग्राटो पूल के नाम था। यह रिकॉर्ड अब टूट चुका है। पहले ही दिन 8 डाइवर्स पहुंचे 'डीपस्पॉट' पूल पोलैंड के सेंट्रल पॉलिश टाउन में बना है। यहां डाइवर्स को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। शनिवार को पहली बार यह पर्यटकों के लिए खोला गया। पहले दिन यहां दर्जनों कस्टमर्स के साथ अंडरवाटर रोमांच का अनुभव करने के लिए 8 डाइवर्स भी पहुंचे। 'यहां डाइविंग सीखना मजेदार अनुभव' 39 साल के डाइविंग इंस्ट्रक्टर कैक्प्रजेक कहते हैं, इस पूल में मछलियां या कोरल रीफ मौजूद नहीं है। यह समुंद्र का विकल्प नहीं है लेकिन डाइविंग सीखने के लिए बेहतर जगह है। नए लोगों के लिए यहां डाइविंग सीखना काफी मजेदार अनुभव रहेगा।...

पाकिस्तान में तनाव से जूझ रहे दुनिया के सबसे तनहा हाथी की कहानी, लम्बी लड़ाई के बाद अब अपनों के बीच रहेगा

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यह है दुनिया का सबसे तनहा यानी अकेले रहने वाले हाथी कावां। पिछले 35 सालों से कावां पाकिस्तान में इस्लामाबाद के मार्गहजर चिड़ियाघर में रह रहा है। लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद 29 नवम्बर को उसे कम्बोडिया भेजा जाएगा। जहां वो अपने जैसे हाथियों के साथ समय बिताएगा। कावां के लिए 24 नवम्बर को फेयरवेल पार्टी रखी गई। एशिया में पहली बार किसी हाथी की विदाई के लिए पार्टी दी गई है। कावां को कम्बोडिया भेजने की वजह सिर्फ इसका अकेलेपन नहीं है। इस्लामाबाद में उसकी देखरेख में बरती जाने वाली लापरवाही और चिड़ियाघर की खस्ता हालत का मुद्दा दुनियाभर के एनिमल एक्टिविस्ट ने उठाया और फाइनली उसे कम्बोडिया भेजे जाने का रास्ता साफ हुआ। कावां के लिए 24 नवम्बर को फेयरवेल पार्टी रखी गई। यह एशिया में पहली बार जब किसी हाथी की विदाई के लिए पार्टी दी गई। कावां की हवाई यात्रा से पहले ट्रेनिंग और ट्रीटमेंट जारी कावां को श्रीलंका से लाया गया था। वह ओवरवेट है और उम्र 35 साल है। इस्लामाबाद के मार्गहजर चिड़ियाघर की हालत इतनी बुरी है कि पाकिस्तान हाईकोर्ट ने जू को बंद करके सभी जानवरों को दूसरी जगह ट्रांसफर करने के आदेश मई में ही ...

डायबिटीज के कारण आंखों में दिक्कत है तो कोरोना से हालत नाजुक होने का खतरा पांच गुना ज्यादा

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कोरोना का संक्रमण किस इंसान में कितना खतरनाक होगा यह अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है। लेकिन, कुछ खास तरह की बीमारियों से परेशान मरीजों के लिए इसका संक्रमण जानलेवा हो सकता है। एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि जिन लोगों में डायबिटीज की वजह से आंखों की बीमारी हुई है, उनमें कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा सामान्य इंसान की तुलना में पांच गुना ज्यादा होता है। डायबिटिक रेटिनोपैथी और कोरोना के बीच कनेक्शन किंग्स कॉलेज लंदन के डायबिटीज रिसर्च एंड क्लीनिकल प्रैक्टिस पेपर में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है, जब डायबिटिक रेटिनोपैथी और कोरोना के खतरों के बीच कोई सीधा संबंध दिख रहा है। आंखों में खराबी आना डायबिटीज के बड़े कम्प्लीकेशंस में से एक है। आंखों में स्मॉल ब्लड वेसेल्स (छोटी धमनियों) को नुकसान पहुंचने के कारण ऐसा होता है। रिसर्चर डॉ. एंतोनेला कॉर्सिलो ने कहा कि डायबिटीज के जिन रोगियों की आंखें खराब होती हैं, उनके ब्लड वेसेल्स को बहुत अधिक नुकसान पहुंच गया होता है। यही नुकसान कोरोना होने पर मरीज को गंभीर रूप से बीमार करने में भूमिका निभाता है। यह भी...

कोरोना से बिना वैक्सीन रिकवर हो रहे 99% लोग, फिर वैक्सीन की क्या जरूरत? जानें दावे का सच

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क्या हो रहा है वायरल: सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि बिना वैक्सीन के भी कोविड-19 के संक्रमण से 99% से ज्यादा लोग रिकवर हो रहे हैं। मैसेज शेयर करते हुए सोशल मीडिया यूजर सवाल पूछ रहे हैं कि जब बिना वैक्सीन के ही 99% लोग ठीक हो रहे हैं, तो फिर वैक्सीन का क्या फायदा? दुनियाभर में बन रही कोविड-19 वैक्सीन के अपडेट्स आने का सिलसिला जारी है। रूस में बनी वैक्सीन स्पूतनिक V ट्रायल के दौरान कोरोना से लड़ने में 95% असरदार साबित हुई है। ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका का कोरोनावायरस वैक्सीन-कोवीशील्ड को 90% असरदार बताया जा रहा है। एक तरफ जहां वैक्सीन की सफलताओं की खबरें महामारी से जूझ रही दुनिया को राहत दे रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कुछ यूजर ये दावा कर रहे हैं कि वैक्सीन के बिना ही 99% लोग रिकवर हो रहे हैं। और सच क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) के अनुसार, 24 नवंबर तक 5.87 करोड़ से ज्यादा लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं, 13.88 लाख से ज्यादा लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है। यानी कुल संक्रमितों में से 2.36% लोगों की मौत हो चुकी ...