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Showing posts from August, 2020

15 मिनट में पता चलेगा कोरोना का संक्रमण हुआ है या नहीं, अमेरिकी कम्पनी ने लॉन्च की 400 रुपए वाली किट

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अमेरिकी कम्पनी एबॉट ने कोरोना संक्रमण की जांच के लिए नई कोविड किट तैयार की है। किट की मदद से मात्र 15 मिनट में कोरोना की जांच की जा सकेगी। एक किट की कीमत 400 रुपए है। कम्पनी ने इसका नाम बाइनेक्स-नाउ रखा है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे मंजूरी दे दी है। कैसे करें इसका इस्तेमाल, 5 पॉइंट से समझिए किट बनाने वाली कम्पनी का कहना है, नई किट से जांच करना बेहद आसान है। यह किट बिल्कुल वैसे काम करती है जैसे प्रेग्नेंसी टेस्ट किट। टेस्ट करने के लिए संदिग्ध व्यक्ति के नाक से सैंपल लेकर किट के कार्ड कार्ड में एक तरल रसायन के साथ डालना होगा। इसके बाद यह कार्ड बंद हो जाएगा और सैम्पल के साथ वो तरल रसायन कार्ड की सतह में लगे रिएक्टिव मॉलिक्यूल के ऊपर से गुजरेगा। अगर सैम्पल कोरोना पॉजिटिव आता है तो कार्ड पर एक रंगीन रेखा दिखेगी। प्रेग्नेंसी टेस्ट में हार्मोन का पता लगाया जाता है, वैसे ही इसमें एंटीजन का पता लगाया जाएगा। इस टेस्ट में जिन लोगों को सैम्पल पॉजीटिव आएगा, उन्हें क्वारैंटाइन होने पर स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने को कहा जाएगा। क्रेडिट कार्ड के आकार की किट, कहीं भी ल...

दिल्ली के शख्स का चेन्नई में हुआ लंग ट्रांसप्लांट, कोरोना के कारण दोनों फेफड़े बुरी तरह डैमेज हुए; वेंटिलेटर सपोर्ट भी बेअसर रहा

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चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल में 48 साल के कोरोना पीड़ित का ट्रांसप्लांट हुआ। कोरोना के कारण दोनों फेफड़े बुरी तरह डैमेज हो चुके थे। हालत अधिक बिगड़ने पर उसे गाजियाबाद से चेन्नई के एमजीएच हेल्थकेयर अस्पताल लाया गया। यहां उसके दोनों फेफड़ों को ट्रांसप्लांट किया गया। यह कोविड-19 मरीज में हुआ एशिया का पहला लंग ट्रांसप्लांट है। संक्रमण के बाद फेफड़े बुरी तरह डैमेज हुए एमजीएच हेल्थकेयर अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, मरीज दिल्ली का रहने वाला है। 8 जून को उसकी कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उस समय फेफड़े का एक छोटा सा हिस्सा ही काम कर रहा था। कोरोना के संक्रमण के कारण उसके फेफड़े बुरी तरह से डैमेज हो चुके थे। संक्रमण के बाद डेढ़ महीने तक फेफड़े फायब्रोसिस की समस्या से जूझ रहे थे। वेंटिलेटर सपोर्ट भी बेअसर रहा सांस लेने में बढ़ती दिक्कत और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर उसे 20 जून को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद भी हालत बिगड़ती रही। इसके बाद उसे 20 जुलाई को गाजियाबाद से चेन्नई के एमजीएम हॉस्पिटल लाया गया। मरीज को 25 जुलाई से अगले एक महीने तक इक्मो सपोर्ट दिया गया। ह...

जल्द ही कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी की जरूरत नहीं पड़ेगी, इंटास फार्मा ने मानव प्लाज्मा से तैयार की दवा, अगले महीने शुरू होगा ह्यूमन ट्रायल

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अहमदाबाद की फार्मा कम्पनी इंटास फार्मास्युटिकल ऐसी दवा विकसित की है जो कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थैरेपी का विकल्प बनेगी। कंपनी का दावा है कि इस दवा को लेने के बाद कोविड-19 रोगियों को प्लाज्मा थैरेपी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस दवा को मानव प्लाज्मा से तैयार किया गया है। ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी मिली इंटास फार्मास्युटिकल के चिकित्सा और नियामक मामलों के हेड डॉ. आलोक चतुर्वेदी ने कहा कि यह देश में पहली बार है कि ऐसी दवा बनाई जा रही है जो पूरी तरह से स्वदेशी है। कोविड-19 के उपचार के लिए विशेष रूप से विकसित हाइपरइम्यून ग्लोब्युलिन के ह्यूमन ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से मंजूरी मिल गई है। हम इसके लिए गुजरात और देश के कई अस्पतालों के साथ बातचीत कर रहे हैं। अगले एक महीने में ट्रायल शुरू हो जाएगा। 30 एमजी की खुराक पर्याप्त होगी डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक, वर्तमान में कोरोना रोगियों को लगभग 300 एमजी प्लाज्मा के साथ प्लाज्मा थैरेपी दी जाती है। दूसरी बात, यह तय नहीं है कि यह हर मरीज को कैसे और किस हद तक प्रभावित करता है। नई तैयार होने वाली हाइपरइम्यून ग्लोब्युलिन की 30 ...

कमजोर इम्युनिटी के कारण कैंसर रोगियों में कोरोना होने पर मौत का खतरा 25 फीसदी ज्यादा, इसलिए अधिक अलर्ट रहें और ये 12 लक्षण नजरअंदाज न करें

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2025 तक देश में कैंसर पीड़ितों की संख्या करीब 15.7 लाख होगी। यहां कैंसर रोगियों का जिक्र इसलिए, क्योंकि मौजूदा कोरोना काल में कैंसर मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कते हो रही हैं। कोरोना के चलते कैंसर पीडितों के इलाज और उनकी देखभाल में भारी बदलाव आया है। विशेषज्ञों ने अमेरिका के न्यूयार्क स्थित मोंटफोर मेडिकल सेंटर में भर्ती 218 ऐसे कैंसर मरीजों का अध्ययन किया जो कोरोना से संक्रमित हो चुके थे। 18 मार्च से 8 अप्रैल के बीच की गई इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि इनमें से 61 मरीजों की मौत कोरोना संक्रमण से हो गई जो कि कुल संख्या का 28% है। इस दौरान अमेरिका में कोरोना से मृत्यु दर 5.8 प्रतिशत थी। कोरोनाकाल में इनकी देखभाल कैसी होनी चाहिए, यह बता रहे हैं अपोलो अस्पताल, नवी मुम्बई के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. शिशिर शेट्‌टी .... इन 12 में से कोई भी लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सम्पर्क करें तेज बुखार आना, शरीर में कंपकंपी, पसीना आना, जीभ या मुंह में घाव हो जाना, जीभ पर सफेद परत जम जाना। बलगम बनना, सांस लेने में परेशानी होना, पेशाब के दौरान जलन होना या रक्त का आना, पेट में दर्द या...

दुनिया का सबसे बड़ा रूफटॉप ग्रीनहाउस, यहां मिलेंगी 100 से अधिक ऑर्गेनिक सब्जियों और हर्ब की वैरायटी

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यह है दुनिया सबसे बड़ा रूफटॉप ग्रीन हाउस। इसे कनाडा के दूसरे सबसे बड़े शहर मॉन्ट्रियल में बनाया गया है। हाल ही में इसका उद्घाटन किया गया है। यहां ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जाती हैं। इसे तैयार करने वाली कम्पनी लूफा फार्म का कहना है कि यहां पर उगने वाली सब्जियां स्थानीय लोगों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएंगी। 2 फुटबॉल ग्राउंड के बराबर इसका क्षेत्रफल यह रूफटॉप ग्रीनहाउस 15,000 स्क्वायर मीटर में बना है। यानी यह 2 फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है। इसे बनाने वाली कंपनी लूफा फार्म ने इस तरह का पहला ग्रीनहाउस 2011 में बनाया था। अब पेरिस में ऐसा ग्रीनहाउस बनाने की योजना कंपनी अब तक न्यूयॉर्क, शिकागो और डेनवर में आठ ग्रीनहाउस बना चुकी है। पेरिस भी इस तरह का ग्रीनहाउस बनाने की योजना है। कंटेनर में लगाए जाते हैं पौधे यहां 100 से अधिक तरह की सब्जियां और हर्ब को हाइड्रोफोनिक कंटेनर में उगाया जाता है। कंटेनर में चारों तरफ नारियल का जूट लपेटा जाता है। कंटेनर के अंदर लिक्विड न्यूट्रिएंट्स होते हैं, जिसके कारण सब्जियां और हर्ब को पोषण मिलता है और ये विकसित होती हैं। पति-पत्नी ने मिलकर 2009 में शुर...

वैज्ञानिकों ने सुअर के शरीर में विकसित किया लिवर, दावा किया; जल्द ही इंसानों में भी ऐसा हो सकेगा और लिवर ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने सुअर के शरीर में ही लिवर विकसित किए हैं। इनका दावा है कि जल्द ही ऐसा इंसानों में भी हो सकेगा और लिवर ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 6 सुअरों के लिम्फ नोड में फुल साइज के लिवर विकसित किए हैं। ट्रायल के दौरान सामने आया कि अगर जानवर में एक अंग किसी बीमारी के कारण खराब होना शुरू होता है तो भी यह स्वस्थ रहता है। इनका शरीर दूसरा अंग तैयार कर सकता है। लिवर में खुद को विकसित करने की क्षमता वैज्ञानिकों के मुताबिक, लिवर में खुद को विकसित करने की क्षमता होती है। इसका एक हिस्सा अगर ट्रांसप्लांट किया जाता है तो यह एक पूरे लिवर में विकसित हो सकता है। शरीर में मौजूद लिम्फ नोड में लिवर कोशिकाओं को विकसित किया जा सकता है। कोशिकाएं मिलकर संख्या बढ़ाएंगी और एक पूरा लिवर तैयार करेंगी। 6 सुअर चुने, जिनका लिवर फेल हो चुका था वैज्ञानिकों ने प्रयोग करने के लिए ऐसे 6 सुअर चुने जिनका लिवर फेल हो चुका था। उनकी ब्लड सप्लाई को डायवर्ट किया। शरीर में मौजूद बीमार लिवर कोशिकाओं का एक हिस्सा लिया।इन्हें हिपैटोसायट्स भी कहते हैं। इन कोशिकाओं को सु...

92 साल के शख्स ने 80 साल से बाल नहीं कटाए, 5 मीटर लम्बे बालों में न कंघा करते हैं न इन्हें धोते हैं; कहा- इनसे छेड़छाड़ करना ठीक नहीं

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वियतनाम के रहने वाले 92 साल के नगुएन ने पिछले 80 सालों से अपने बाल नहीं कटाए हैं। इनके बालों की लम्बाई 5 मीटर है। नगुएन का मानना है इंसान जिस भी चीज के साथ पैदा हुआ है उससे छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। वह कहते हैं, अगर मैं अपने बालों को कटाउंगा तो मैं मर जाउंगा। मैं किसी भी तरह के बदलाव की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। मैं बालों में कंघा तक नहीं करता हूं। न ही इन्हें धोता हूं, सिर्फ इसे सुलझाकर ऊपर से एक कपड़ा बांध लेता हूं बालों का ईश्वर की कृपा मानते हैं नगुएन वेन चेइन वियतनाम की हो-ची मिन शहर से 80 किलोमीटर दूर एक गांव में रहते हैं। वह कहते हैं, मैं बालों की देखभाल करता हूं, इन्हें सुलझाता हूं ताकि ये अच्छा दिखें। बालों का बढ़ना, ईश्वर की कृपा है। इसलिए मैं इसे नहीं काटता। इसे नारंगी पगड़ी से ढकता हूं। स्कूल में बाल काटने पर भाग गए थे वह कहते हैं, जब मैं तीसरी कक्षा में था तो स्कूल में इसे कटाने को कहा गया था लेकिन मैं वहां से भाग गया था। तभी तय किया कि बालों को न तो कभी कटाउंगा, न कंघा करूंगा और न ही इसे धोउंगा। मैं कभी इन्हें प्यार से कंघा से सुझलाता था नगुएन कहते हैं कि मुझे अच्छी ...

केंद्र सरकार के दावे के उलट इसरो के रिसर्चर्स ने कहा- एन-95 मास्क कोरोनावायरस के रोकने में असरदार; यह खांसी की रफ्तार को घटाता है

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना को रोकने में एन-95 मास्क सबसे ज्यादा असरदार है। रिसर्चर्स ने रिसर्च में कहा, एन-95 मास्क खांसी की शुरुआती रफ्तार को 10 गुना तक कम कर सकता है। यह मास्क इसके इसके फैलाव को 0.1 से 0.25 मीटर तक सीमित करता है। रिसर्चर्स ने हिदायत दी है कि जब आपके पास एक अच्छा मास्क उपलब्ध न हो तो बेहतर होगा, कोरोना के संक्रमण को घटाने के लिए कोई भी मास्क पहनें। यह रिसर्च केंद्र सरकार की नई एडवाइजरी के बाद आई है, जिसने सभी को चौंका दिया था। हाल ही में सरकार ने कहा था कि एन-95 मास्क सुरक्षित नहीं है। यह वायरस को रोकने में सफल नहीं है। इसकी वजह इसमें लगे फिल्टर को बताया गया था। एन- 95 मास्क दो तरह के होते हैं। एक वाॅल्व लगे मास्क और दूसरा बिना वाॅल्व वाले मास्क। केंद्र सरकार ने वाॅल्व लगे एन-95 मास्क को पहनने से रोका है। सभी एन-95 मास्क को नहीं। हां, यह जरूर कहा है कि हेल्थ वर्कर्स की जगह आम लोग एन-95 मास्क का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे नहीं करना चाहिए। बिना मास्क खांसी 3 मीटर की दूरी तक जा सकती है इसरो से पद्मनाभ प्रसन्ना स...

हेल्थ गुरुकुल द्वारा सुधारें अपनी जीवन शैली और पाएं निरोगी शरीर

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जीवन में सबसे कीमती चीज़ की बात करें तो लोगों के लिए इसका जवाब अलग- अलग होगा। किसी के लिए पैसा, किसी के लिए नौकरी, किसी के लिए फैमिली। लेकिन यह बहुत ही कम सुनने को मिलेगा की लोग कहेंगे की उनके लिए अच्छी सेहत बहुत कीमती चीज़ है। अगर ध्यान से सोचा जाए तो जीवन की सबसे कीमती चीज़ होती है आपका निरोग शरीर, क्योंकि व्यक्ति अगर शरीर से स्वस्थ और तंदरुस्त तभी वो हर काम को सही ढंग से कर पाता है. लेकिन इस भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम खुद के शरीर का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है समय। ऐसा नहीं है की हम चाहते नहीं शरीर का ध्यान रखना लेकिन समय न मिल पाने के कारण हम शरीर को भूल जाते हैं। आजकल हर व्यक्ति अपने जीवन में इतना व्यस्त हो गया है कि वो अपनी जीवन की सबसे बड़ी दौलत यानी अपने शरीर का ध्यान नहीं रख पा रहा है। यही कारण है कि आज भारत देश के हर घर में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति मिल जायेगा जो ब्लड प्रेशर , शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से पीड़ित है और इसके इलाज़ के रूप में दवाइयाँ लगातार खा रहा है। इन्ही सब बीमारियों से कैसे छुटकारा पाएं इसके लिए पहल की है आचार्य मनीष ने। आचार्य मनीष ज...

हॉन्गकॉन्ग के शख्स को दोबारा कोरोना का संक्रमण हुआ, एक्सपर्ट बोले, कई बार वायरस का असर फेफड़े में रह जाता है इसलिए ऐसा हुआ; भारत में अब तक ऐसा मामला नहीं आया

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पूरी दुनिया की नजर इन दिनों वैक्सीन पर टिकी हैं। इसी बीच हॉन्गकॉन्ग में कोरोना के दोबारा संक्रमण का मामला सामने आया है। यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है, जब रिकवर होने के साढ़े चार महीने बाद दोबारा शख्स की कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिस आईटी प्रोफेशनल में दोबारा कोरोना की पुष्टि हुई है वह स्पेन से लौटा था। इस मामले में राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली के विशेषज्ञ डॉ. ए के वार्ष्‍णेय का कहना है कि इस मामले को लेकर चिंता करने की बात नहीं है। प्रसार भारती से बातचीत में उन्होंने कहा, हॉन्गकॉन्ग के एक शख्स को अप्रैल में कोरोना हुआ था, लेकिन अगस्त में वह फिर से संक्रमित हो गया। इस बार वायरस का अलग स्ट्रेन पाया गया। कई बार वायरस अपना रूप बदलता है डॉ. वार्ष्‍णेय ने कहा, कई बार ऐसा होता है कि वायरस अपना रूप बदल कर आता है। ऐसे में पहले वाली एंटीबॉडीज प्रभावी तौर पर अपना काम नहीं कर पातीं। दरअसल, कोरोना की जांच नाक और मुंह से की जाती है, कई बार वायरस का प्रभाव फेफड़े में रह जाता है। ऐसे में बाद में वह असर कर सकता है। एक मामले से नतीजे पर पहुंचना सही नहीं डॉ. वार्ष्‍णेय ने कहा कि विश्व स्...

दो डोज में आ सकती है कोविड की वैक्सीन, भारत में छह वैक्‍सीन पर चल रहा काम; तीन के ट्रायल की स्पीड बढ़ी

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कोविड की वैक्सीन की एक नहीं, दो डोज़ आ सकती है। दोनों डोज़ के बीच का अंतर 14 दिन से लेकर 28 दिन तक का हो सकता है। यह जानकारी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने प्रेसवार्ता में दी है। डॉ. भार्गव ने कहा, कोरोना की जिन वैक्‍सीन पर काम चल रहा है, उनमें यह समझने की जरूरत है कि पहली डोज़ दिए जाने के 14 से 28 दिन के बाद दूसरी डोज़ दी जा रही है। इस समय जिन वैक्‍सीन का परीक्षण चल रहा है, उनके दो डोज़ कवर होने के कम से कम दो से चार हफ्ते के बाद यह चेक किया जा रहा है कि व्‍यक्ति शरीर में कितनी संख्या में एंटीबॉडीज बन रही हैं। डॉ. भार्गव की बात से यह साफ है कि ट्रायल के दौरान वैक्सीन दो डोज़ में दी जा रही है, यानी कि यह भी संभव है कि सफल होने पर भी वैक्सीन दो डोज में ही आए। पहले चरण के ट्रायल पूरे डॉ. भार्गव ने बताया कि देश में इस वक्त कोरोना वायरस की छह वैक्‍सीन पर काम चल रहा है। हालांकि उन्होंने केवल तीन का ही विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पहली वैक्‍सीन पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट की है, जो ऑक्‍सफोर्ड के साथ मिलकर बनायी गई है। इसे कोविशील्ड के ना...

किसी के लिए विरोध का सिम्बल बना तो किसी के लिए टाइमपास बना मास्क; ये कोरोना से बचाएंगे इसकी गारंटी नहीं

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दुनियाभर के महामारी विशेषज्ञ कह रहे हैं कि कोरोना के मामलों की रफ्तार को धीमा करना है तो मास्क पहनिए। लोग मास्क पहन तो रहे हैं लेकिन अपने अंदाज में। इन्हें फर्क नहीं कि इससे कोरोना रुकेगा या नहीं। यह बचाव से ज्यादा फैशन और क्रिएटिविटी का हिस्सा बन गया है। कुछ देशों में इसका इस्तेमाल विरोध के तौर पर भी किया जा रहा है। आज की फोटो स्टोरी में देखिए दुनिया के ऐसे ही अजीबोगरीब मास्क, जो संक्रमण से बचाएंगे या नहीं, इसकी गारंटी नहीं... प्लास्टिक वाटर टैंक से कोरोना का बचाव फिलीपींस की राजधानी मनीला में प्लास्टिक के वाटर टैंक को सिर पर लगाकर लोग निकल रहे हैं। महामारी से बचने के लिए लोगों ने यह तरीका अपनाया है। हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी और मेरीलैंड यूनिवर्सिटी की संयुक्त रिसर्च में सामने आया है मास्क 100 फीसदी तक संक्रामक जर्म्स को रोकने में सफल रहा। इसके बावजूद लोग मास्क लगाने से परहेज कर रहे हैं। बचाव से ज्यादा विरोध की चिंता महामारी को लेकर दुनियाभर में लगाई गईं पाबंदियों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को विरोध भी झेलना पड़ रहा है। कई देशों में लोग WHO के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। यह...