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Showing posts from December, 2020

कोरोना खत्म करने के लिए 34 साल के शख्स ने पिया रोज 5 लीटर पानी, ब्रेन में सूजन आई; बेहोश हुआ

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जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी खतरनाक है। इसका एक मामला ब्रिटेन में सामने आया है। यहां 34 साल के ल्यूक विलियमसन को कोरोना का संक्रमण हुआ। डॉक्टर्स ने उन्हें रोजाना 2 लीटर पानी पीने की सलाह ली। ल्यूक का मानना था ज्यादा पानी पीने से कोरोना का असर कम हो जाएगा इसलिए उसने 2 की जगह 5 लीटर पानी पीना शुरू कर दिया। शरीर में पानी अधिक पहुंचने के कारण सोडियम का स्तर नीचे गिरता गया और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। शरीर में पानी इकट्‌ठा होने पर ल्यूक उल्टी और थकान से जूझ जूझने लगे। एक दिन अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। आनन-फानन में उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटीलेटर सपोर्ट दिया गया। जितनी सलाह दी उसका दोगुना पानी पीना शुरू किया लौरा के मुताबिक, ल्यूक को एक हफ्ते से कमजोरी महसूस हो रही थी। कोरोना के लक्षण दिखने पर डॉक्टर्स ने उन्हें 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी लेकिन ल्यूक ने रोजाना 5 लीटर पानी पीना शुरू कर दिया। डॉक्टर्स का कहना है, अधिक पानी पीने के कारण मरीज के शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (शरीर में मिनिरल का लेवल) का लेवल बिगड़ गया। शरीर में जरूरत से ज्यादा पानी इकट्‌ठा होने की स्थि...

65 साल की महिला के पेट से वॉलीबॉल के आकार का ट्यूमर निकाला गया, जन्म से था ट्यूमर महिला थी अंजान

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तेलंगाना में 65 साल की एक महिला के पेट से वॉलीबॉल के आकार का ट्यूमर निकाला गया। पिछले हफ्ते लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। डॉक्टर्स के मुताबिक, सबसे चौकाने वाली बात है कि महिला में यह ट्यूमर जन्म से था लेकिन उसे इससे जुड़े कोई लक्षण नहीं दिखे। महिला दो बच्चों की मां है। एक साल पहले पेट दर्द शुरू हुआ महिला की सर्जरी तेलंगाना के मेडिकवर हॉस्पिटल हुई। सर्जरी करने वाले डॉक्टर्स के मुताबिक, यह एक दुर्लभ मामला है। 1 साल पहले महिला के सीने और पेट के दाहिने हिस्से में दर्द शुरू हुआ। उल्टियां और बुखार के लक्षण दिख रहे थे। पेट के डॉक्टर से उसका इलाज चल रहा था। दर्द की वजह पता लगाने के लिए बायोप्सी की गई। जांच में ट्यूमर की पुष्टि हुई। डॉक्टर्स के मुताबिक, यह ट्यूमर पिछले 30 सालों में बढ़कर बड़ा हो गया है। फेफड़े के नीचे था ट्यूमर लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. चिगुरुपति वेंकट पवन कुमार ने बताया, यह कैंसर वाला ट्यूमर नहीं था। यह फेफड़े के निचले हिस्से में था। ट्यूमर 4 सेंटीमीटर चौड़ा था। इसे निकालना बड़ी चुनौती थी। ट्यूमर को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए निकाला गया। इसमें 6 घंटे लगे। ट्यूमर को कई टुकड़ों में...

तापमान गिरने पर बढ़ता है ब्लड प्रेशर; सिरदर्द, हार्ट अटैक और वजन घटने का सर्दी से है कनेक्शन

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सर्दियां आते ही हम ठिठुरने लगते हैं। स्किन ड्राय होने लगती है। मसल्स सिकुड़ने लगती है। हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। बदलाव सिर्फ इतना ही नहीं है, शरीर में ब्लड का सर्कुलेशन धीमा हो जाता है। जैसे-जैसे बाहर का तापमान गिरता है, शरीर में ये बदलाव दिखने शुरू हो जाते हैं। शरीर में ये बदलाव क्यों होते हैं, सर्दी शुरू होते ही बीमारियों का खतरा क्यों बढ़ता है और इस बदलाव के बुरे असर से खुद को कैसे बचाएं? जानिए इन सभी सवालों के जवाब... 3 सवाल जो बताएंगे, शरीर में कौन-कौन से बदलाव होते हैं 1. सर्दियों में क्यों नहीं बढ़ता वजन? ठंड के दिनों में शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ जाता है। आसान भाषा में समझें तो शरीर थोड़ा तेजी से काम करने लगता है। शरीर गर्म रहता है। खाना जल्दी पचता है। कैलोरीज ज्यादा बर्न होती हैं। इसलिए सर्दियों में वजन नहीं बढ़ता। ध्यान रखें कि यहां वजन की बात सामान्य खानपान के लिए लागू हो रही है। अगर आप हाई कैलोरी फूड लेते हैं तो चर्बी घटाने के लिए एक्सरसाइज करना जरूरी है। 2. जाड़े में उंगलियां ठिठुर क्यों जाती हैं? उंगलियों के फूलने और सिकुड़ने का कनेक्शन भी मौसम से है। तापमान कम होने प...

स्टेम सेल डोनेट करके ब्लड डिसऑर्डर और कैंसर के मरीजों की जान बचा सकते हैं

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देश में कैंसर के जितने भी मामले हैं, उसमें से 8% मरीज ब्लड कैंसर से जूझ रहे हैं। भारत में हर साल ब्लड डिसऑर्डर से जुड़े करीब 1 लाख नए मामले सामने आते हैं। इनसे एक बात साफ है कि खून से जुड़ी बीमारियों के मामले कम नहीं हैं। इनसे लड़ने के लिए ब्लड स्टेम सेल डोनर्स का होना जरूरी है। देश में केवल 0.03% लोग ही ब्लड स्टेम सेल डोनर्स के रूप में रजिस्टर्ड हैं। यह आंकड़ा दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश भूरानी कहते हैं, थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसी बीमारियों का एक मात्र इलाज है स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन। एक स्वस्थ इंसान स्टेम सेल डोनेट करके कई मरीजों की जान बचा सकता है। जानिए क्या है स्टेम सेल और कैसे इसे डोनेट करके मरीज की जान बचाई जा सकती है... क्या है ब्लड स्टेम सेल डोनेशन डोनेशन से पहले यह जानिए कि ब्लड स्टेम सेल क्या होती है। स्टेम सेल शरीर की बोन मैरो में पाई जाती है। इसका काम ब्लड को बनाना है। स्टेम सेल ब्लड में पाई जाती है। स्टेम सेल डोनेट करने की प्रक्रिया ब्लड डोनेशन की तरह होती है। डॉ. दिनेश कहते ह...

कोरोना से रिकवरी के बाद दिमाग में खून के 400 थक्के मिले, मरीज कोमा में पहुंचा; देश का पहला ऐसा मामला

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कोरोना से जूझने के बाद दिमाग में खून के थक्के जमने का मामला सामने आया है। यह देश का पहला ऐसा मामला है। जम्मू के रहने वाले 55 साल के मिथिलेश लम्ब्रू कोरोना से रिकवरी के बाद कोमा में चल गए थे। डॉक्टर्स का कहना है, मरीज पोस्ट कोविड एनसेफेलाइटिस से जूझ रहा था। उसके दिमाग में खून के 400 थक्के मिले थे। मिथिलेश का इलाज दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में किया गया। कब, क्या हुआ, पढें पूरा मामला कुछ महीने पहले मिथिलेश कोरोना से संक्रमित हुए। लक्षण हल्के थे, इसलिए वो घर में ही क्वारेंटाइन हो गए। धीरे-धीरे हालत बिगड़ी। सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें जम्मू के अस्पताल में भर्ती किया गया। जांच में सामने आया कि कोरोना के कारण उन्हें निमोनिया हो गया। डॉक्टर्स ने इसे कोविड-निमोनिया बताया और मरीज को वेंटिलेटर रखा। मरीज डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से भी जूझ रहा था। नाजुक होती स्थिति को कंट्रोल करने के लिए स्थानीय डॉक्टर्स ने इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की टीम से सम्पर्क किया। यहां से डॉक्टर्स की टीम बनाकर जम्मू भेजी गई। जो मरीज के ऑक्सीजन लेवल को कंट्रोल करते हुए उसे एयर एम्बुलेंस के...

अमेरिका के वर्षावन में मिली फ्रेंच फ्राय जैसी दिखने वाली फूलों की प्रजाति, कई दशकों जंगल में छिपा हुआ था फूल

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अमेरिका के वर्षावन में पौधों की नई प्रजाति मिली है। ये देखने में फ्रेंच फ्राय जैसी दिखती है। विशेषज्ञों का मानना है, यह अपनी तरह की दुनिया की पहली प्रजाति है। फूलों की इस नई किस्म का नाम सायनिया हेलुएनसिस है। हवाई के वर्षावनों में मिली इस प्रजाति का एक हिस्सा अलग किया गया है, इसे वैज्ञानिक नर्सरी में उगाएंगे। जंगल की गहराई में मिला पौधा हवाई के डिपार्टमेंट ऑफ लैंड एंड नेचुरल रिसोर्सेस के पौधों के विशेषज्ञ मैथ्यु कीर का कहना है, ऐसे दुर्लभ पौधों को नर्सरी में लगाकर संरक्षित किया जा रहा है। इसकी खोज पौधों के विशेषज्ञ हैंक ओपनहीमर और उनकी टीम ने मिलकर की है। यह पौधा जंगह की गहराई में मिला है। जिस ऊंचाई पर नई प्रजाति मिली है, उसके आसपास ऐसे और पौधों को ढूंढने के लिए ट्रैकिंग की गई। इसे संरक्षित करने की तैयारी एक्सपर्ट के मुताबिक, जिस ऊंचाई पर नई प्रजाति मिली है, उसके आसपास ऐसे और पौधों को ढूंढने के लिए ट्रैकिंग की गई। अभी तक दूसरी जगह पर यह प्रजाति नहीं मिल सकी है, इसलिए इसे संरक्षित करने की तैयारी चल रही है। डिपार्टमेंट ऑफ लैंड एंड नेचुरल रिसोर्सेस ने सोशल मीडिया पर इस पौधे की तस...

बैंकॉक के इस अस्पताल में स्विमिंग पूल, कृत्रिम बादल, इंडोर प्ले ग्राउंड; ताकि बच्चे आने से न डरें

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आमतौर पर बच्चे डॉक्टर को दिखाने या अस्पताल जाने से सबसे ज्यादा डरते हैं। बच्चे हंसते-मुस्कुराते डॉक्टर को अपनी परेशानी बताएं इसलिए थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक में ईकेएच चिल्ड्रन हॉस्पिटल ने अपने परिसर को बच्चों के बड़े प्लेग्राउंड जैसा बना दिया है। यहां इनडोर प्ले ग्राउंड है, दीवारों पर खूबसूरत कार्टून कैरेक्टर बनवाए हैं, एंट्रेंस पर ही बड़ी स्लाइड (फिसल पट्‌टी) भी है। सभी वेटिंग एरिया में रंग-बिरंगे व अलग-अलग आकार के फर्नीचर और खिलौने रखे गए हैं। इंडोर स्विमिंग पूल में घूमते हुए कृत्रिम बादल यहां इंडोर स्विमिंग पूल भी है जिस पर कृत्रिम बादल घूमते रहते हैं। अस्पताल को डिजाइन करने वाली टीम का कहना है, हॉस्पिटल्स को बच्चों के लिए फ्रेंडली बनने की जरूरत है। इसे तैयार करने से पहले यही आइडिया हमारे दिमाग में था। हमने सोचना बच्चे हमेशा मस्ती और फन की तलाश में रहते हैं। इसलिए हॉस्पिटल को ऐसा डिजाइन किया जो उनकी सोच से मेल खाए। वेटिंग एरिया में भी बनाया खूबसूरत डॉक्टर से मिलने के लिए बच्चों को इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान पेरेंट्स के लिए बच्चों को संभालना मुश्किल हो जाता है। इसे ध्यान में ...

आधा कैन बीयर पीने के बाद डाइविंग करना खतरनाक, बिगड़ सकता है हाथ और आंख का तालमेल

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बीयर पीने के बाद ड्राइविंग करते हैं तो अलर्ट हो जाएं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और सैन जोज स्टेट यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च कहती है, आधा कैन बीयर पीकर ड्राइविंग करते हैं तो हाथ और आंखों का संतुलन बिगड़ सकता है। रिसर्च अलर्ट करती है कि ड्राइविंग या हैवी मशीनरी पर काम करते समय अल्कोहल नुकसान पहुंचा सकती है। यह स्थिति खतरनाक है। ब्लड में अल्कोहल बढ़ने पर खतरा वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह बात पहली बार सामने आई है कि 75 किलो के इंसान के ब्लड में अल्कोहल का लेवल बढ़ने 20 फीसदी बढ़ने पर आंख और हाथ के बीच तालमेल बिगड़ने का खतरा बढ़ता है। रिसर्च करने वाले टैरेंस टायसन का कहना है, इसे समझने के लिए हमने कई लोगों पर प्रयोग किया। 20 साल के युवाओं पर हुई रिसर्च रिसर्च में 20 साल की उम्र वाले ऐसे युवाओं को शामिल किया जो हर हफ्ते 1 से 2 ड्रिंक ले रहे थे। उन्हें अल्कोहल की अलग-अलग मात्रा वाली कई ड्रिंक्स पिलाई गईं। इसके बाद उनकी आंखों का मूवमेंट, पुतलियों का रिएक्शन और ब्लड में अल्कोहल की मात्रा चेक की गई थी। अल्कोहल का असर दिखा वैज्ञानिकों के मुताबिक, रिसर्च में सामने आया कि ब्लड में अल्कोहल की मात्र...

ग्रीन-टी पिएं, खाने में सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं और रोजाना दौड़ें जरूर भले ही 10 मिनट ही दौड़ें

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दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने जीवन को हेल्दी और लंबा करने के लिए कई रिसर्च की हैं। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि खुद को हेल्दी रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे- ग्रीन टी, ड्राय फ्रूट, सब्जियां और कुछ मिनट की दौड़। जानिए, इन्हें कैसे अपने लाइफ में शामिल करके खुद को स्वस्थ रखें.... 1. ग्रीन टी पीने से जीवन लंबा होता है बीएमजे ओपन डायबिटीज रिसर्च एंड केयर जर्नल में अक्टूबर में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, जिन लोगों को डायबिटीज है वो अगर कॉफी या ग्रीन टी पीना शुरू करते हैं तो वे समय से पहले होने वाली मौत से बच सकते हैं। यह रिसर्च 5000 लोगों पर 5 सालों तक की गई। जिन्हें डायबिटीज नहीं है उनके लिए भी ग्रीन टी और कॉफी फायदेमंद है। कॉफी और ग्रीन टी में कई ऐसे प्लांट कम्पाउंड होते हैं जिनके एंटी-इंफ्लामेट्री और एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के कारण यह सेहत के लिए अच्छी होती है। 2. दौड़िए, कई बीमारियों से बचेंगे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सप्ताह में कम से कम 75 मिनट तेजी से रनिंग, साइकिलिंग और स्वीमिंग जैसी एरोबिक एक्सरसाइज करने के लिए कहा है। कई लोग रोजाना 35 मिनट वॉक या जॉगिंग करते हैं...

पहली बार अजन्मे बच्चे की गर्भनाल में मिले माइक्रोप्लास्टिक के सबूत, यह उसकी रोगों से लड़ने की क्षमता घटा सकता है

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पहली बार अजन्मे बच्चे की गर्भनाल (प्लेसेंटा) में माइक्रोप्लास्टिक का पता चला है। शोधकर्ताओं का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक के कण भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकते हैं। शिशुओं के इम्यून सिस्टम पर भी बुरा असर डाल सकते हैं। इससे भविष्य में उसमें रोगों से लड़ने की क्षमता घट हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है, माइक्रोप्लास्टिक के इन कणों में पैलेडियम, क्रोमियम, कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि माइक्रोप्लास्टिक किस हद तक बुरा असर छोड़ेगा। बच्चे पर रिसर्च रोम के फेटबेनेफ्राटेली हॉस्पिटल और पोलेटेक्निका डेल मार्श यूनिवर्सिटी ने की है। 4 महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान मिले कण जर्नल एनवायर्नमेंट इंटरनेशनल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, माइक्रोप्लास्टिक के कण 4 स्वस्थ महिलाओं की गर्भनाल में पाए गए। रिसर्च के दौरान पाया गया कि ये कण गर्भनाल के साथ उस मेम्ब्रेन में भी थे जिसमें भ्रूण पलता-बढ़ता है। पेंट, पैकेजिंग और कॉस्मेटिक से ये कण शरीर में पहुंचे वैज्ञानिकों के मुताबिक, गर्भनाल में दर्जनों प्लास्टिक के कण मिले लेकिन इनमें से मात्र 4 फीसदी की जांच की जा सकी...

20 साल में हार्ट डिसीज से 20 लाख मौतें, देश में हार्ट के मामले कहां बढ़े, क्यों बढ़े और कैसे कंट्रोल करें; एक्सपर्ट से समझें

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2000 से 2019 तक, पिछले 20 सालों में भारत में सबसे ज्यादा मौतें दिल की बीमारी से हुईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, पिछले 20 साल में हार्ट डिसीज से 20 लाख से अधिक मौते हुईं। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) की रिपोर्ट कहती है, देश में हार्ट डिसीज के बढ़ते मामलों की सबसे बड़ी वजह हाई ब्लड प्रेशर और खराब खानपान है। स्मोकिंग करने वाले 83 फीसदी लोगों में हार्ट डिसीज होने का खतरा ज्यादा रहता है। हालांकि, हालिया रिसर्च में सामने आया है देश में लोगों की स्मोकिंग करने की आदत घट रही है। देश में दिल की बीमारी के मामले क्यों बढ़ रहे हैं, किस राज्य में इसके मामले सबसे ज्यादा है, इसके मामलों को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं, जानिए इस रिपोर्ट में... ग्रामीण क्षेत्रों में हृदय रोगों के मामले ज्यादा लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक, अब ग्रामीण क्षेत्रों में हृदय रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। यहां पुरुषों में 40 फीसदी और महिलाओं में 56 फीसदी तक हार्ट के मामलों में बढ़ोतरी हुई। हृदय रोगों से सबसे ज्यादा मौतें तमिलनाडु, कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा में हो रही हैं। वहीं, स्ट्रोक से होने वाली मौत के सबसे...

सर्दी में वेजिटेबल सूप, जिंजर वॉटर और स्मूदीज से पानी की कमी पूरी करें, ये इम्युनिटी बढ़ाएंगे और थकान घटाएंगे

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सर्दियों में आप भी उन लोगों में से एक हैं जो पानी कम पीते हैं तो पहले इसके नुकसान समझिए। थका हुआ महसूस करना, चक्कर आना, स्किन में ड्रायनेस बढ़ना और यूरिन का रंग पीला पड़ना, इसके लक्षण हैं। सर्दियों में आप भी इन लक्षणों का सामना कर रहे हैं तो रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीने की जरूरत है। शरीर में पानी की कमी वेजिटेबल सूप, स्मूदीज और हर्बल चाय से भी पूरी की जा सकती है। क्लीनिकल न्यूट्रीशनिस्ट सुरभि पारीक बता रही हैं, सर्दियों में कैसे पानी की कमी पूरी करें... 4 चीजें जो स्वाद और इम्युनिटी बढ़ाएंगी और पानी की कमी पूरी करेंगी वेजिटेबल सूप रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाएगा सर्दियों में लोगों को गर्म चीजें खाना पसंद है। इसका सबसे बेहतर विकल्प है, वेजिटेबल सूप। इसके लिए टमाटर, अदरक, गाजर, लहसुन और पत्तागोभी को सूप में शामिल कर सकते हैं। इसमें पनीर के छोटे-छोटे टुकड़े भी डाल सकते हैं। सूप बनाते समय उसमें सीमित मात्रा में कालीमिर्च और दालचीनी पाउडर का प्रयोग करें। यह कई तरह से फायदा पहुंचाता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करेगा। पानी की कमी नहीं होने देगा और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़...

400 साल बाद गुरु और शनि का महामिलन, इनके बीच की दूरी सबसे कम 0.1 डिग्री रहेगी

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साेमवार का दिन खगाेल विज्ञान के लिहाज से बहुत खास हाेगा। 400 साल बाद दाे ग्रहाें बृहस्पति और शनि का महामिलन हाेगा। यह दिन साल का सबसे छाेटा दिन भी हाेगा। दिन की अवधि 10 घंटे 42 मिनट 21 सेकंड हाेगी। शाम काे सूर्यास्त के तुरंत बाद इन दाे ग्रहाें के महामिलन की घड़ी आएगी। इस दाैरान इन दाेनाें ग्रहाें की दूरी सबसे कम 0.1 डिग्री हाेगी। भाेपाल में साेमवार शाम 5:39 बजे सूर्यास्त हाेगा, इसके बाद पश्चिम दिशा में यह खगोलीय घटना देख सकेंगे। इस खगोलीय घटना का प्रभाव सकारात्मक रहेगा ज्याेतिष एवं अध्यात्मिक गुरु कृष्णराव दाैंड कहते है कि गुरु के प्रभाव से आपराधिक प्रवृत्तियां कम होंगी। वहीं शनि के कारण सेवा कार्याें से जुड़े क्षेत्रों में इजाफा हाेगा। कुल मिलाकर यह खगोलीय घटना का सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मिलन ताे 20 साल में, लेकिन यह महामिलन क्यों? केंद्र सरकार के नेशनल अवार्ड से सम्मानित विज्ञान प्रसारक सारिका घारू कहती हैं यह ग्रेट कंजक्शन यानी महामिलन की घटना के समय जुपिटर की पृथ्वी से दूरी करीब 5.624 एस्ट्राेनाॅमिकल यूनिट हाेगी। वहीं सेटर्न की दूरी 10.825 एस्ट्राेनाॅमिकल यूनिट हाेगी। इस तरह य...

सिर्फ कोविड-19 ही नहीं, दुनिया में 219 वायरस इंसानों के लिए खतरनाक, मार्बग और इबोला सबसे जानलेवा

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दुनिया में कोविड-19 से संक्रमित होने वालों की संख्या 7.61 करोड़ के पार पहुंच गई है। जबकि 16.84 लाख मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि, कोरोना इकलौता वायरस नहीं है जो इंसानी शरीर के लिए जानलेवा साबित हुआ। दुनिया में कुल 3 लाख से ज्यादा वायरस हैं, जिनमें से 219 इंसानों के लिए खतरनाक हैं। माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. विजय लता रस्तोगी ने दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में ऐसे ही कई जानलेवा वायरस के बारे में बताया। डॉ. विजय लता अजमेर स्थित जेएलएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बनी कोविड टेस्टिंग लैब की प्रमुख नोडल अधिकारी भी हैं। Q. दुनिया में कितने वायरस हैं, इनमें से कितने खतरनाक हैं? A. दुनियाभर में करीब 3.20 लाख वायरस हैं। नेट जियो के मुताबिक 17 लाख ऐसे वायरस हैं, जिन्हें अभी खोजा जाना बाकी है। करीब 219 से ज्यादा वायरस इंसानों के लिए खतरनाक हैं। Q. अब तक का सबसे खतरनाक वायरस कौन सा है? A. मार्बग (Marburg, 1967) एवं इबोला (1976) अब तक के सबसे खतरनाक वायरस रहे हैं। इनसे संक्रमित होने वाले 90% पीड़ितों की मृत्यु हुई है। रेबीज भी बेहद खतरनाक वायरस है। Q. वायरस सर्वाधिक किन जगहों पर पाए...

आचार्य मनीष ने शुरू किया 'स्वास्थ्य का अधिकार अभियान '

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प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य मनीष ने 'आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान ' नामक एक अनूठी पहल को हरी झंडी दी है। आचार्य मनीष 1997 से आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और आयुर्वेदिक कल्याण के लेबल 'शुद्धि आयुर्वेद ' के संस्थापक भी हैं, जिसका कॉर्पोरेट कार्यालय चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में है। आचार्य मनीष ने यहां प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान 'स्वास्थ्य के अधिकार अभियान ' की आधिकारिक रूप से घोषणा की। इस अभियान की टैगलाइन है- 'आयुर्वेद को है अब घर-घर पहुंचाना ' । आचार्य मनीष ने कहा, 'चरक संहिता के अनुसार, आयुर्वेद का उद्देश्य है - स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के विकारों को जड़ से समाप्त करना। आयुर्वेद का अर्थ ही है आयु को जानने का संपूर्ण विज्ञान। आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है।' प्रेस वार्ता में आयुर्वेदिक चिकित्सक- डॉ. गीतिका चौधरी और डॉ. सुयश प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे। आचार्य मनीष का मानना है कि जड़ी-बूटी आधारित भारतीय चिकित्सा प्रणाली - आयुर्वेद ह...

युवाओं में मौत का खतरा बढ़ा रहा वर्क फ्रॉम होम, रोजाना 11 मिनट की वॉक इससे बचाएगी

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देश में पिछले 10 माह से फैली कोराेना महामारी के चलते लोगों का घर से बाहर निकलना और घूमना फिरना कम हुआ है। यहां तक की ऑफिस आदि में काम पर जाने वाले लोग भी लंबे समय से वर्क फ्राॅम होम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों की सिटिंग काफी बढ़ गई है। हाल ही में ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन ने इस संबंध में अहम सुझाव दिए हैं। निष्क्रिय लोगों को युवा अवस्था में ही मौत का खतरा एक अध्ययन में हजारों की संख्या में लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियों पर अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसे लोग जो दिन भर निष्क्रिय रहते हैं उनकी युवा अवस्था में ही मृत्यु होने की आशंका बढ़ जाती है, लेकिन यदि लोग थोड़ा भी मूवमेंट करते हैं तो इस आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। पूर्व में भी महामारी विशेषज्ञों द्वारा शारीरिक गतिविधियों पर किए गए अध्ययन में भी इसी तरह का निष्कर्ष सामने आया था। 50 हजार लोगों पर किए गए शोध में निकाला निष्कर्ष शोधकर्ताओं ने यूरोप और अमेरिका में रहने वाले लगभग 50,000 लोगों पर किए गए 9 अध्ययनों की तुलना कर कई परिणाम निकाले। इन अध्ययनों में अधेड़ उम्र के पुरुषों और महिलाओं को...

वेटलॉस और डाइट पर कंट्रोल करने से ठीक हो सकती है ये जानलेवा बीमारी

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डायबिटीज के बारे में एक आम राय है कि ये बीमारी जिसे होना है उसे जरूर होगी। लेकिन, विशेषज्ञ अब इसे पूरी तरह सच नहीं मानते। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर और हार्वर्ड वुमन्स हेल्थ वॉच की एडिटर इन चीफ डॉ. होप रिकीओटी कहती हैं कि प्री-डायबिटीज को ठीक किया जा सकता है। क्या है प्री- डायबिटीज? प्रीडायबिटीज वह अवस्था होती है जब व्यक्ति का शरीर ग्लूकोज को आसानी से ऊर्जा में नहीं बदल पाता। इससे शुगर का स्तर बढ़ जाता है, लेकिन यह इतना नहीं होता कि इसे डायबिटीज कहा जाए। हालांकि यह स्थिति आगे चलकर बीमारी में बदल जाती है। डॉ. रिकीओटी कहती हैं कि उस समय अपने वजन को पांच से सात फीसदी तक कम कर लिया जाए और खानपान को सुधार लिया जाए तो डायबिटीज से लंबे समय तक बचा जा सकता है। वे कहती हैं कि ऐसे व्यक्ति को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। भोजन में फल, सब्जी, होल ग्रेन, हेल्दी फिट शामिल करना चाहिए और शुगर कम कर देनी चाहिए। उसे हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनानी चाहिए। हैल्दी लाइफस्टाइल डायबिटीज से बचने का उपाय मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल की फिजिशियन डॉ. मोनीक टेला बताती हैं कि ‘द डायबिटीज प्रिव...

नौ साल की एला की मौत का कारण एयर पॉल्यूशन, दुनिया में अपनी तरह का यह पहला मामला

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ब्रिटेन के एक हाई कोर्ट ने एला (9) नाम की बच्ची की मौत के लिए बढ़ते प्रदूषण को जिम्मेदार बताया है। यह दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है। बच्ची की मौत की समीक्षा करने वाले सहायक समीक्षक फिलिप बारलो के अनुसार, ‘2013 में लंदन में रहने वाली एला की मौत के कारणों में वायु प्रदूषण भी एक कारण था।’ एला की बीमारी और उसके घर के पास की खराब एयर क्वालिटी के बीच सीधा संबंध बताया गया है। बच्ची का घर लंदन में एक व्यस्त सड़क से नजदीक था। कब क्या हुआ, पॉइंट-टू-पॉइंट समझें साउथईस्ट लंदन में रहने वाली एला की मौत फरवरी, 2013 में अस्थमा के गंभीर अटैक के कारण हुई थी। वह कई बार कार्डियक अरेस्ट से जूझ चुकी थी और सांस से जुड़े रोगों से परेशान थी। मौत से पहले के तीन सालों में उसे लगातार कई बार इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। मौत के बाद आई रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि एला ने एयर पॉल्यूशन और अस्थमा के कारण दम तोड़ा था। 2010 से 2013 के बीच बढ़ती गई बीमारी ब्रिटिश लंग फाउंडेशन का कहना है, एला दुनिया की पहली ऐसी इंसान थी जिसकी मौत एयर पॉल्यूशन के कारण हुई। फिलिप बारलो के मुताबिक, एला की मां ने अस्थमा और एयर...