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Showing posts from September, 2020

कोरोना को हराने वाला हर 10 में से एक मरीज साइडइफेक्ट से परेशान, थकान, स्वाद न पहचानने जैसी दिक्कतों से जूझ रहा

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कोरोना से रिकवर होने वाला हर 10 में से एक मरीज इसके साइडइफेक्ट से जूझ रहा है। इलाज के बाद मरीजों में थकान, गंध-स्वाद का पता न चल पाना और एकाग्रता की कमी जैसे लक्षण दिख रहे हैं। यह दावा साउथ कोरिया में हुई स्टडी में किया गया है। 965 मरीजों पर हुई स्टडी कोरोना से रिकवर होने वाले 965 मरीजों पर ऑनलाइन स्टडी की गई। कोरिया के सेंटर्स डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अधिकारी क्वॉन जून-वूक के मुताबिक, 91.1 फीसदी मरीजों में साइडइफेक्ट दिख रहा है। 26.2 फीसदी मरीज रीडिंग में मन नहीं लगा पा रहे रिसर्च के मुताबिक, 26.2 फीसदी मरीज रीडिंग पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। उनमें एकाग्रता में कमी महसूस हो रही है। इसके अलावा मरीज गंध या स्वाद न पहचान पाने और दिमाग पर पड़ रहे नकारात्मक असर से परेशान हैं। क्यूंगपूक नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किन शिन-वू ने कोरोना से रिकवर हुए 5762 मरीजों में से 16 फीसदी कोरोना सर्वाइवर से ऑनलाइन सर्वे किया, जिसमें ये बातें सामने आईं। 16 संस्थानों के साथ मिलकर एक और स्टडी हो रही प्रो. क्वॉन के मुताबिक, रिसर्च पूरी तरह ऑनलाइन की गई थी। जल्द ही इस पर और एनलिसिस करने के बाद...

क्या है कीट से फैलने वाला कांगो फीवर जिसने गुजरात में संक्रमण फैलाया तो महाराष्ट्र को अलर्ट जारी करना पड़ा

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गुजरात के कुछ इलाकों में कांगो फीवर के मामले सामने आए हैं। इसका हवाला देते हुए महाराष्ट्र के पालघर में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। पशुपालन विभाग के डिप्टी कमिश्नर डॉ. प्रशांत कांबले ने कहा है कि गुजरात के कुछ इलाकों में यह बुखार पाया गया है। इसके महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में फैलने की आशंका है। पालघर गुजरात के वलसाड जिले से लगा हुआ है। जानिए कांगो फीवर कब, क्यों और कैसे फैलता है... Q-1. क्या है कांगो फीवर और कब दिखते हैं इसके लक्षण? यह वायरल बीमारी खास तरह के कीट (किलनी) के जरिए एक जानवर से दूसरे जानवर में फैलती है। संक्रमित जानवरों के खून के संपर्क में आने या ऐसे जानवरों का मांस खाने पर इंसानों में यह बीमारी फैलती है। सही समय पर बीमारी का पता लगाकर इलाज नहीं किया गया तो 30% मरीजों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इसके लक्षण दिखने में 6 से 13 दिन का समय लगता है। Q-2. कहां से आया कांगो फीवर? इस बीमारी का पहला मामला 1944 में यूरोप के क्रीमिया में आया था। लेकिन 1956 में अफ्रीका के कांगो में इसी वायरस के मामले सामने आए, इसलिए इस बीमारी का पूरा नाम क्र...

चीन में पाया जाने वाला 'कैट क्यू वायरस' भारत में संक्रमण फैला सकता है, 883 में से दो भारतीयों में मिली इसके खिलाफ एंटीबॉडीज

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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक और वायरस का खतरा जताया है। ICMR के मुताबिक, चीन और वियतनाम में पाया जाने वाला कैट क्यू वायरस भारत में भी संक्रमण फैला सकता है। देश में 883 लोगों के सीरम सैम्पल की जांच की गई, इसमें दो लोगों में कैट क्यू वायरस के खिलाफ काम करने वाली एंटीबॉडीज मिली हैं। एंटीबॉडीज शरीर में तभी मिलती हैं जब उससे जुड़े वायरस का संक्रमण हुआ हो। मच्छर और सुअर से फैलता है कैट क्यू वायरस ICMR के संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के मुताबिक, इस वायरस के सबसे ज्यादा मामले चीन और वियतनाम में देखे गए हैं। यह वायरस क्यूलेक्स मच्छरों और सुअरों से फैलता है। देश में 2014 से 2017 के बीच सीरम कलेक्ट किया गया था। इसकी जांच के दौरान 2 लोगों में कैट क्यू वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज मिलीं। इससे एक बात साफ है कि इनमें इस वायरस का संक्रमण हुआ है। हालांकि अब तक भारत में यह वायरस किसी भी इंसान या जानवरों में नहीं मिला है। दोनों ही मामले कर्नाटक से जुड़े जिन दो लोगों में कैट क्यू वायरस की एंटीबॉडी (Anti-CQV IgG) मिली हैं, वो कर्नाटक से हैं। ICMR के मुत...

नाक से दी जाने वाली वैक्सीन कोरोना को रोकने में 96 फीसदी तक असरदार, जानवरों के बाद अब इंसानों पर ट्रायल की तैयारी

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नाक से दी जाने वाली वैक्सीन से कोरोना को 96 फीसदी तक रोका जा सकता है। यह दावा ऑस्ट्रेलिया की कम्पनी एना रेस्पिरेट्री ने किया है, जिसने यह वैक्सीन तैयार की है। कम्पनी का दावा है, वैक्सीन का ट्रायल जानवरों पर किया जा चुका है जो सफल रहा है। यह इंसानों के इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाकर कोरोना की संक्रमण फैलाने की क्षमता को घटा सकती है। इंसानों पर ट्रायल की तैयारी ब्रिटेन की सरकारी एजेंसी पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की रिसर्च कहती है, ऑस्ट्रेलियाई कम्पनी की नेजल स्प्रे INNA-051 को वैक्सीन के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 96 फीसदी तक कोरोना के संक्रमण का खतरा घटाती है। कम्पनी एना रेस्पिरेट्री का कहना है, नेजल स्प्रे INNA-051 का अगले 4 महीनों के इंसानों पर अंदर शुरू हो जाएगा। चीनी नेजल स्प्रे वैक्सीन का भी ट्रायल शुरू होगा चीन में भी नाक से दी जाने वाली नेजल स्प्रे वैक्सीन तैयार की गई है। चीन इस वैक्सीन का ट्रायल नवंबर में शुरू होगा। इसके लिए 100 वॉलंटियर्स को चुना जाएगा। इसे यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग, शियामेन यूनिवर्सिटी और बीजिंग वंताई बायोलॉजिकल फार्मेसी के वैज्ञानिकों ने ...

कोरोना पर 10 गुना अधिक असर करने वाली दवा मिली, एंटीबायोटिक दवा टीकोप्लेनिन दूसरी दवाओं के मुकाबले वायरस से लड़ने में अधिक कारगर

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आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने कोरोना पीड़ितों के इलाज के लिए असरदार दवा ढूंढी है। दवा का नाम टीकोप्लेनिन है। यह कोरोना की दूसरी दवाओं के मुकाबले 10 गुना अधिक असरदार है। टीकोप्लेनिन कोरोना के मरीजों को दी जा रहीं हाइड्रोक्सी-क्लोरोक्वीन और लोपिनाविर से भी ज्यादा असरदार है। यह एक एंटीबॉयोटिक दवा है। 23 दवाओं पर रिसर्च हुई आईआईटी दिल्ली के संस्थान कुसुम स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस ने 23 ऐसी दवाओं पर रिसर्च की, जिनसे कोरोना के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। शोधकर्ता प्रो. अशोक पटेल ने दावा किया, जब टीकोप्लेनिन की तुलना कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दूसरी दवाओं से की गई तो यह 10 गुना अधिक असरदार साबित हुई। यह रिसर्च इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमॉलिक्यूल में भी प्रकाशित हुई है। इस रिसर्च से एम्स के विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप शर्मा भी जुड़े हैं। बड़े पैमाने पर रिसर्च की जरूरत टीकोप्‍लेनिन एक ग्‍लायकोपेप्‍टाइड एंटीबायोटिक है। इसका इस्तेमाल ग्राम-पॉजिटिव बैक्टीरिया के संक्रमण का इलाज करने में किया जाता है। अमेरिका में क्लीनिकल ट्रायल के लिए इसे फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन भी अनुमति...

हृदय रोगी हैं तो घर में इकोस्प्रिन टैबलेट रखें, 7 घंटे की नींद जरूर लें और दांतों की सफाई का ध्यान रखें क्योंकि यहां के बैक्टीरिया हार्ट पर बुरा असर डाल सकते हैं

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दिल को सेहतमंद रखने के लिए कई बातों को समझना जरूरी है। पहली बात, अगर आप हृदय रोगी हैं तो क्या करें। दूसरी बात, घर में पेरेंट्स हार्ट डिसीज से जूझ रहे हैं तो क्या करें। और तीसरी बात, अगर आप पूरी तरह स्वस्थ हैं तो कैसे इसे होने से रोकें। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानिए, इन्हीं तीनों बातों के बारे में... 1. परिवार में हार्ट हिस्ट्री रही है तो माता-पिता 55 की उम्र से पहले हृदय रोग से पीड़ित हो गए हैं, तो सामान्य लोगों की तुलना में आपको हृदय रोग की आशंका 50% अधिक है। इसलिए परिवार की हैल्थ हिस्ट्री की जानकारी जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर और उच्च कोलेस्ट्रॉल दिल के दौरे का खतरा बढ़ाते हैं। इनकी नियमित जांच कराएं। बॉडी मास इंडेक्स 18.5-24.9 के बीच होना चाहिए। स्मोकिंग व शराब से दूरी, वजन पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम से हार्ट डिसीज की परिवारिक हिस्ट्री के बावजूद दिल की बीमारी का खतरा 45% तक घट जाता है। शुगर या ब्लडप्रेशर की दवा ले रहे हैं तो कभी अपने डॉक्टर से पूछे बिना उन्हें बंद न करें। जब आप डॉक्टर के पास जाएं तो पूरी तैयारी से जाएं। उन्हें परिवार की हिस्ट्री जरूर बताएं। 2. आप पूरी तरह स्वस...

हार्ट को हेल्दी रखने में सबसे बड़ा रोल वर्कआउट का, जानिए किस उम्र में कौन सी एक्सरसाइज दिल को मजबूत बनाएगी और हार्ट अटैक रोकेगी

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रोजाना एक्सरसाइज और खुश रहते हैं तो दिल की बीमारी का खतरा 50 फीसदी तक कम हो जाता है। बढ़ती उम्र के साथ एक्सरसाइज में बदलाव भी जरूरी है। हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं तो अपनी उम्र के मुताबिक एक्सरसाइज चुन लें। 20 की उम्र तक : दौड़ें, खेलें, एरोबिक्स करें इससे आपका हार्ट अधिक पंप करेगा इस उम्र में दौड़ने, साइकिल चलाने, खेलने से मजबूत दिल की नींव पड़ती है। ये एक्सरसाइज दिल को पंप करती हैं। बच्चों को हर दिन दौड़ने, कूदने और खेलने के बहुत सारे मौके मिलने चाहिए। 6 से 17 साल के बच्चों को हर दिन कम से कम 1 घंटा (60 मिनट) शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए। फिर चाहे वो स्कूल में हो या घर के पास मैदान में। हार्ट के लिए इस उम्र में बच्चे एरोबिक गतिविधि भी कर सकते हैं। 21 से 40 साल तक : हफ्ते में 5 दिन ये व्यायाम हार्ट बीट रखेंगे नॉर्मल 20 की उम्र में शरीर मजबूत और लचीला होता है। फिटनेस की नींव रखने का यह सही समय है। दोस्तों के साथ खेल खेलें, जैसे कि टेनिस या रैकेटबॉल। खेल में हाइकिंग या बाइकिंग, स्वीमिंग शामिल करें। सप्ताह में कम से कम 5 दिन, 60 मिनट व्यायाम जरूर करें। 30 की उम्र के बाद वजन को नि...

वैज्ञानिकों ने बनाया हार्ट अटैक रोकने वाला इम्प्लांट और मशीन से तैयार हो रहीं हृदय की मांसपेशियां, जानिए वो इनावेशन वो बीमारी से लड़ने की ताकत दे रहे

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इनोवेशन और तकनीक ने हृदय रोगियों को बीमारी से निपटने की ताकत दी है। वैज्ञानिकों ने नई तरह हार्ट विकसित किया है और हार्ट अटैक रोकने वाला डिफ्रिबिलेटर्स भी बनाया है। आंखों को देखकर हृदय रोग बताने वाली तकनीक भी सामने आ चुकी है। आज वर्ल्ड हार्ट डे पर जानिए ऐसे ही इनोवेशन जो हार्ट डिसीज से लड़ने में हथियार की तरह काम कर रहे हैं.... सॉफ्ट रोबोट सॉफ्ट रोबोट : दिल को धड़़कने में मदद करता है हार्वर्ड विश्वविद्यालय और बोस्टन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने एक सॉफ्ट रोबोट बनाया है, जो दिल के चारों ओर फिट हो सकता है। यह रोबोट दिल की मदद धड़कने में करता है। यह डिवाइस उन लोगों के लिए बहुत अधिक उपयोगी है, जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है और इस वजह से उनका दिल कमजोर हो गया है। यह डिवाइस इन लोगों में हार्टफेल के खतरे को कम करती है। यह खून को पतला करने वाली दवाओं की आवश्यकता को खत्म कर देती है। डिफ्रिबिलेटर्स : अचानक आने वाले हार्ट अटैक को रोकता है चेक गणराज्य के प्राग में ना होमोलस अस्पताल के शोधकर्ताओं ने इम्प्लांटेबल डिफ्रिबिलेटर्स बनाई हैं। ये डिवाइस अचानक आने वाले हार्ट अटैक को रोक सकती है।...

कोरोनाकाल में हृदय रोगों के मामले 20% बढ़े, लक्षणों को नजरअंदाज किया तो नौबत सर्जरी तक पहुंची, एक्सपर्ट से समझें कैसे सर्जरीज टाली जा सकती हैं

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कोरोनाकाल में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले 20 फीसदी तक बढ़े हैं। ज्यादातर मरीज हृदय रोगों से जुड़े लक्षण दिखने के बावजूद उसे नजरअंदाज कर रहे हैं। कोरोना के डर से हॉस्पिटल जाने से बच रहे हैं। नतीजा, सर्जरी की नौबत आ रही है। हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोनाकाल में कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो हार्ट के ऑपरेशन्स टाले जा सकते हैं। आज वर्ल्ड हार्ट डे, इस साल की थीम है ''यूज हार्ट टू बीट कार्डियो वेस्कुलर डिसीज''। इस मौके पर इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के कार्डियो-थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकेश गोयल और नानावटी सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुशांत पाटिल बता रहे हैं कोरोनाकाल में हार्ट को कैसे हेल्दी रखें... 72 साल की महिला के मामले से समझें क्यों अलर्ट रहना जरूरी इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के कार्डियो-थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मुकेश गोयल कहते हैं, कोरोनाकाल में इमरजेंसी यूनिट में हार्ट अटैक के मामले कम आ रहे हैं। कोरोना के कारण मरीज अस्पताल आने से डर रहे हैं। इसलिए घर पर कार्डियक अरेस्ट के ...

वॉक, स्विमिंग, डांसिंग जैसे 5 तरीकों में से अपना मनपसंद वर्कआउट चुनें और जिंदगीभर हार्ट को हेल्दी रखें

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दिल को सेहतमंद रखने के लिए फिजिकल एक्टिवटी बेहद जरूरी है। रोजाना 15 मिनट का वर्कआउट हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हेल्दी हार्ट के लिए सप्ताह में 6 दिन 30-45 मिनट का वर्कआउट काफी है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाता है। मकसद लोगों को हृदय रोगों के प्रति जागरुक करते हुए इसके खतरों से बचाना है। इस मौके पर डॉ. यजुवेन्द्र गवई, स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट एंव आर्थोस्कोपी सर्जन, नानावटी हॉस्पिटल, मुंबई से बता रहे हैं हेल्दी हार्ट का फिटनेस प्लान... 1. 30 से 45 मिनट की वॉक हार्ट को फिट रखने के लिए चलना सबसे आनंददायक, सुरक्षित और सस्ता तरीका है। हेल्दी हार्ट के लिए हर दिन 30- 45 मिनट चलना एक सरल तरीका है। चलने की गति आपकी फिटनेस पर निर्भर है, लेकिन शुरुआत करने वालों के लिए एक मीडियम स्पीड वाली वॉक होनी चाहिए। 2. पीठ और घुटने से परेशान हैं तो साइक्लिंग करें रोजाना लगभग 25-30 मिनट तक साइकिल चलाना कई तरह से फायदा पहुंचाता है। बढ़ती उम्र के कई लोगों को पीठ और घुटने की बीमारियां होती हैं। लंबी दूरी तक जॉगिंग करने या चलने में ...

सांस लेने में दिक्कत है तो 40 मिनट पेट के बल लेट जाएं, यह पोजिशन नेचुरल वेंटिलेटर का काम करती है; 80 % तक इसके नतीजे असरदार

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कोरोना संक्रमण के कारण ज्यादातर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत है। आक्सीजन का लेवल गिरने पर अस्पतालों में वेंटिलेटर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मरीजों के लिए प्रोन पोजिशन आक्सीजनेशन तकनीक 80 प्रतिशत तक कारगर है। हर चिकित्सा प्रणाली के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रोन पोजिशन को अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए 'संजीवनी' बताया है। सांस लेने में तकलीफ होने पर इस अवस्था में 40 मिनट लेटते हैं तो आक्सीजन का लेवल सुधरता है। पेट के बल लेटने से वेंटिलेशन परफ्यूजन इंडेक्स में सुधार आता है। डॉक्टरों ने कोविड के मरीजों को सलाह दी है कि सांस लेने में दिक्कत होने पर इस तकनीक को आजमा सकते हैं। इस पोजीशन का इस्तेमाल एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस की हालत में किया जाता है, ताकि ऑक्सीजन सर्कुलेट की जा सके। ऐसी स्थिति में फेफड़ों के निचले हिस्से में पानी आ जाता है। प्रोन पोजिशन बनाते हुए ये ध्यान रखें गर्दन के नीचे एक तकिया, पेट-घुटनों के नीचे दो तकिए लगाते हैं और पंजों के नीचे एक। हर 6 से 8 घंटे में 40-45 मिनट ऐसा करने के लिए कहते हैं। पेट के बल लिटाकर हाथों को कमर के पास पैरलल भी रख सकते हैं...

कोरोना से ज्यादा पिछले पांच सालों में कुत्ते के काटने से मौतें हुईं, 5 सालों में रैबीज के कारण 1 लाख लोगों ने जान गंवाई, जानिए रैबीज होने पर क्या करें

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देश में जितनी मौतें अब तक कोरोना से हुई हैं उससे ज्यादा रैबीज से हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी रैबीज से पिछले 5 सालों में 1 लाख मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा भारत का है। दुनियाभर में रैबीज से जितने लोगों ने जान गंवाई हैं उसकी 35 फीसदी मौतें भारत में हुई हैं। मौतों का आंकड़ा बताता है कि लोगों को अलर्ट करने की जरूरत है कि रैबीज से कैसे बचें और इसके होने पर क्या दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। आज वर्ल्ड रैबीज डे है। इसे फ्रेंच वैज्ञानिक लुइस पॉश्चर की डेथ एनिवर्सरी के मौके पर मनाया जाता है। लुइस ने ही रैबीज की वैक्सीन खोजी थी और हर साल लोगों को रैबीज के बारे में जागरुक करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है। कैसे फैलता है रैबीज रैबीज का वायरस कुत्ते के काटने के बाद इंसान में पहुंच जाता है। संक्रमित होने के बाद मरीज में बुखार, सिरदर्द, उल्टी, मुंह से अधिक लार निकलने के लक्षण दिखाई देते हैं। रैबीज का वायरस सिर्फ कुत्तों के जरिए ही नहीं बिल्ली, बकरी, घोड़े और गाय से भी फैल सकता है। रैबीज फैलने से कैसे रोकें संक्रमण को रोकने के लिए अपने पालतु जानवर...

मोदी सरकार की बीमा योजनाओं से कोविड - 19 से जान गंवाने वालों के परिवार को 2 लाख रुपए मिलेंगे? जानिए वायरल मैसेज का सच

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क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है, उनके परिवार को मोदी सरकारी की दो बीमा योजनाओं के जरिए 2 लाख रुपए मिल सकते हैं। वायरल मैसेज में कहा गया है कि : यदि आपके किसी परिचित की कोविड-19 से मौत हुई है। तो उनका बैंक स्टेटमेंट चेक करें। अगर बैंक स्टेटमेंट में अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच 12 रुपए प्रति माह या 330 रुपए प्रति माह की किश्त कटी है। तो परिवार को सरकारी बीमा के जरिए 2 लाख रुपए की राशि मिलेगी। दावा है कि ये राशि ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ (PMJJBY) या फिर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना ( PMSBY) के तहत मिलेगी। और सच क्या है ? PMJJBY और PMSBY के तहत कोरोना से होने वाली मौत पर 2 लाख रुपए राशि मिलती है या नहीं। इसकी पुष्टि के लिए हमने दोनों ही योजनाओं की ऑफिशियल वेबसाइट पर नियम और शर्तें चेक कीं। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ( PMJJBY ) में प्रति माह 330 रुपए की किश्त जमा करनी होती है। बीमा एक साल का होता है, साल पूरा होने पर इसे रिन्यु कराना होता है। इस बीमा...

थकान, बढ़ते वजन और सायटिका के दर्द से जूझ रहे हैं तो शलभासन करें, यह पैरों की चर्बी घटाता है और हाजमा दुरुस्त रखता है

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पीठ दर्द, थकान और बढ़ते वजन से परेशान हैं तो शलभासन करना फायदेमंद है। शलभ एक संस्कृत का शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ है पतंगा या टिड्डा। शलभासन सायटिका एवं पीठ के निचले हिस्से में हो रहे दर्द से राहत देता है। यह पाचन को बेहतर बनाने के साथ मांसपेशियों को आकार देता है। ऐसे करें आसन शलभासन करने के लिए सबसे पहले आपको मकरासन की मुद्रा में आना होगा। जमीन पर पेट के बल लेट जाएं और अपने पैरों को एक दूसरे से दूर रखें। अपने माथे को अपनी हथेलियों पर रखें। अब मकर आसन से आगे बढ़ते हुए अपने दोनों पैरों को आपस में जोड़ लें। अब दोनों हाथों को शरीर के समीप इस तरह रखें कि दोनों हथेलियां आसमान की ओर हों और आपकी ठोड़ी ज़मीन पर हो। गहरी सांस लेते हुए सिर्फ अपने कूल्हों के सहारे पैरों को ज़मीन से उपर उठाएं। अपने पैरों को उतना ही उपर उठाएं जितना आप अपने घुटनों को बिना मोडे़ उठा सकें। आप पैरों को उपर उठाए रखने के लिए अपनी बाहों का सहारा ले सकते हैं जिससे आप अपने शरीर को स्थिर रख सकें। अब सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें और 10-20 सेकंड तक आराम से रहें। 10-20 सेकंड तक इस आसान में रहने के बाद धीरे-धीरे सांस...

घूमने की चाह लेकिन मर में डर लिए लौट रहे टूरिस्ट, कहीं दीवारों को छूने की मनाही तो कहीं समय से पहले पहुंचने की पाबंदी: तस्वीरें 8 मशूहर ठिकानों की

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फोटो-सेल्फी खिंचाने की होड़, चेहरे पर मुस्कान और हफ्तेभर का आउटिंग प्लान। फिलहाल ये नजारा अब नहीं दिख रहा। चेहरे पर मास्क ने फोटो का मजा खराब किया। टूरिस्ट प्लेस को छूने भर से मन में कोरोना का डर सता रहा है। कई महीनों तक लॉकडाउन में घर में कैद रहने के बाद पर्यटक अब धीरे-धीरे टूरिस्ट प्लेस की ओर लौट रहे हैं। आज वर्ल्ड टूरिज्म डे है। संयुक्त राष्ट्र ने इसकी शुरुआत 1980 में की थी। 40 साल में ऐसा पहली बार है जब टूरिस्ट प्लेस पर सबसे कम पर्यटक हैं। कोरोनाकाल में कितना बदला टूरिस्ट डेस्टिनेशन इन 8 तस्वीरों से समझिए.... आगरा : पर्यटक ताज का दीदार कर रहे लेकिन फोटो के लिए मारामारी नहीं 6 महीने के लम्बे इंतजार के बाद पर्यटकों को 21 सितम्बर से ताजमहल का दीदार करने का मौका मिला। यहां एक शिफ्ट में 2500 लोगों को ही एंट्री दी जा रही है। एक दिन में दो शिफ्ट की परमिशन दी गई है। कोरोना के कारण भीड़ पहले से कम है। फोटो और सेल्फी खिंचाने की हड़बड़ी नहीं दिख रही है। फोटो खिंचाने के लिए पर्यटक ताजमहल से थोड़े दूर ही नजर आते हैं। पार्किंग से लेकर एंट्री टिकट तक सभी पेमेंट ऑनलाइन करने पड़ रहे हैं। दीवारों औ...

जर्मनी के वैज्ञानिकों ने लैब में बनाई कोरोना से लड़ने वाली सबसे असरदार एंटीबॉडी, चूहे पर सफलता के बाद अब इंसानों को देने की तैयारी

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जर्मनी के वैज्ञानिकों ने ऐसी एंटीबॉडी की खोजी है जो कोरोना से लड़ने में असरदार है। इस एंटीबॉडी से पैसिव वैक्सीन तैयार की जा सकती है। पैसिव वैक्सीन के तहत वैज्ञानिक इस एंटीबॉडी को कोरोना पीड़ित के शरीर में पहुंचाएंगे। यह उन्हें कोरोना से लड़ने में मदद करेगी। 600 तरह की एंटीबॉडीज से इसे अलग किया रिसर्च करने वाले जर्मन सेंटर फॉर न्यूरोडिजेनेरेटिव डिसीज के वैज्ञानिकों ने कोरोना से उबर चुके लोगों के खून से 600 तरह की एंटीबॉडीज अलग कीं। लैब में टेस्ट के बाद पता चला कि इनमें से कुछ एक्टिव एंटीबॉडीज कोरोना से लड़ने में असरदार साबित हो सकती हैं। उनसे एक एंटीबॉडी को लैब में सेल कल्चर की मदद से कृत्रिम रूप तैयार किया। ऐसे काम करती है एंटीबॉडी रिसर्चर्स का कहना है कि जो न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी लैब में तैयार की गई है वो कोरोना को बांधने का काम काम करती है। यह कोरोना को शरीर में घुसने और बढ़ने की प्रक्रिया पर रोक लगाती है। रिसर्च में दावा किया गया है कि इस एंटीबॉडी की मदद से शरीर की इम्यून कोशिकाएं कोरोना को खत्म कर देती हैं। चूहों पर असरदार साबित हुई इस एंटीबॉडी का चूहों पर सकारात्मक असर हुआ है।...