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Showing posts from January, 2021

चाय-कॉफी से मिलने वाला कैफीन दिमाग को एक्टिव तो करता है लेकिन ब्लड प्रेशर भी बढ़ाता है, जानिए इसके फायदे-नुकसान

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ऑफिस में काम करते-करते थकान महसूस करते हैं। अचानक से ख्याल आता है और चाय या कॉफी पी लेते हैं। कुछ ही मिनट बाद खुद को फ्रेश महसूस करने लगते हैं, लेकिन कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है। इसकी वजह है वो कैफीन जो आपकी चाय और कॉफी में पाया जाता है। दुनिया की 80 फीसदी आबादी चाय या कॉफी के जरिए कैफीन ले रही है। कैफीन क्या है और यह आपका दिमाग कैसे एक्टिव कर देता है, पढ़िए स्टोरी... क्या है कैफीन कैफीन चाय, कॉफी और कोको प्लांट में पाया जाने वाला स्टीमुलेंट है। इनके जरिए यह शरीर में पहुंचता है। इसका असर सीधे दिमाग के नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। आप खुद को काफी रिलैक्स महसूस करने लगते हैं। कैफीन वाले पेय पदार्थों का चलन 18वीं शताब्दी में शुरू हो गया था, साल-दर-साल बढ़ा है। कैफीन काम कैसे करता है? जब भी हम चाय या कॉफी लेते हैं, इसमें मौजूद कैफीन ब्लड में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर दिमाग पर होता है। दिमाग से जुड़ा एक न्यूरोट्रांसमीटर है एडिनोसिन। यह आपको बताता है कि आप थक गए हैं। कैफीन इसी न्यूरोट्रांसमीटर को ब्लॉक कर देता है। ऐसे में आप थकान नहीं महसूस करते और खुद को फ्रेश पात...

शरीर को फिट रखने के लिए 4 मिनट की एक्सरसाइज भी काफी, जानिए 4, 7 और 10 मिनट में कौन से वर्कआउट करें

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अगर आपके पास 5 से 10 मिनट का भी समय है तो आप जिम में घंटों पसीना बहाने के बराबर फायदा हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) की 10 मिनट एक्सरसाइज से पा सकते हैं। HIIT में तेज गति की छोटी-छोटी एक्सरसाइज से शरीर पर बड़ा असर डाला जाता है। जानिए, 4, 7 और 10 मिनट वाले वर्कआउट, जिन्हें आप घर पर आसानी से कर सकते हैं। 4 मिनट वर्कआउट यदि आप अपनी 90% क्षमता के साथ सप्ताह में तीन बार 10 सप्ताह तक यह एक्सरसाइज करते हैं तो ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल कर सकते हैं। 4 स्टेप में करें वर्कआउट 1. सबसे पहले हल्का वॉर्मअप करें। 2. अब 4 मिनट तक पूरी क्षमता के साथ दौड़ें, तैरें अथवा साइकिल चलाएं। यानी जो भी आपको पसंद हो, वह एक्सरसाइज एक्टिविटी करें। 3. अब रुकें, सांसों को कंट्रोल करें। इसे सप्ताह में तीन बार करें। 7 मिनट वर्कआउट इस एक्सरसाइज को बॉडी वेट, चेयर अथवा दीवार के सहारे किया जा सकता है। निश्चित तौर पर ये 7 मिनट बेहद थकाने वाले होंगे, लेकिन ये 7 मिनट आपको हाई इंटेंसिटी वर्कआउट का फायदा देंगे। 12 स्टेप में ऐसे करें वर्कआउट 1. यह एक्सरसाइज प्लान कई स्टेप में पूरा होता है। हर एक्सरसाइज...

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बनाई मोटापा कंट्रोल करने वाली डिवाइस, यह भूख का अहसास होने से रोकती है

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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मोटापा कम करने वाली एक वायरलेस डिवाइस तैयार की है। यह डिवाइस मोटापे से जूझ रहे लोगों में पेट भरे होने का अहसास कराती है। 1 सेंटीमीटर आकार वाली इस डिवाइस को अमेरिका में टेक्सास की A&M यूनिवर्सिटी ने बनाया है। ऐसे काम करती यह डिवाइस इसे तैयार करने वाली टीम से जुड़े डॉ. सूंग पार्क कहते हैं, इस डिवाइस को इंप्लांट करने के लिए शरीर में छोटा सा चीरा लगाया जाता है। शरीर में पहुंचने के बाद इसे बाहर से रेडियो फ्रीक्वेंसी रिमोट के जरिए कंट्रोल किया जाता है। इस डिवाइस में लगी माइक्रोचिप और LED लाइट रिलीज करती है जो नर्व पर अपना ऐसा असर छोड़ती है कि पेट भरे होने का अहसास होता है। भूख अधिक नहीं लगती। इस तरह मोटापा कंट्रोल किया जाता है। किन लोगों को इस डिवाइस की जरूरत वैज्ञानिकों के मुताबिक, ऐसे लोग जो डाइटिंग और एक्सरसाइज के बाद भी वजन नहीं घटा पा रहे हैं। गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी की नौबत आ रही है। उनके पेट में इस डिवाइस को इंप्लांट कर सकते हैं। जो डाइजेस्टिव सिस्टम को कंट्रोल करेगा। सर्जरी के बाद रिकवरी में लम्बा समय लगता है। डिवाइस को तैयार करने वाले प्रो. सूंग पार्...

नॉनवेज से बेहतर है सब्जियों से मिलने वाला प्रोटीन, यह मौत का खतरा 24% तक घटाता है; जानिए प्रोटीन की कमी कैसे करें पूरी

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अगर आप प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए नॉन-वेज खाते हैं तो अलर्ट होने की जरूरत है। नई रिसर्च कहती है, नॉनवेज की जगह सब्जियों से प्रोटीन (प्लांट प्रोटीन) की कमी को पूरा करते हैं तो मौत का खतरा 24 फीसदी तक कम हो जाता है। इसे समझने के लिए 50 वर्ष से अधिक उम्र के 4 लाख लोगों पर 16 साल तक अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर 1,000 कैलोरी में प्लांट प्रोटीन की मात्रा 10 ग्राम है तो मृत्यु का खतरा 12% तक कम होता है। प्लांट प्रोटीन की मात्रा डाइट में बढ़ाकर इसके फायदों को बढ़ाया जा सकता है। रिसर्च करने वाले अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के वैज्ञानिकों का कहना है, मांसपेशियों की मजबूती और ताकत के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। प्रोटीन का सोर्स यह बताता है कि इंसान की उम्र कितनी अधिक होगी। ऐसे इंसान जो प्रोटीन की कमी सब्जियों से पूरी करते हैं उनमें मृत्यु का खतरा 13 से 24% तक कम होता है। रोजाना कितना प्रोटीन जरूरी स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में काम कर रहे डॉ. नंदन जोशी कहते हैं- शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना और मानक से कम प्रोटीन शरीर में पहुंचने से युवाओं की मांसपेशियों को कमजोर ...

1 मिनट में चढ़ जाते हैं 60 सीढ़ियां तो आपका दिल दुरुस्त है, जानिए हेल्दी हार्ट के लिए किस उम्र में कौन सी एक्सरसाइज करें

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सीढ़ियां चढ़कर दिल की सेहत का पता लगाया जा सकता है। स्पेन के यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. जीसस पेटैरिओ ने दिल की सेहत जानने का सबसे आसान तरीका बताया है। डॉ. जीसस के मुताबिक, अगर कोई इंसान एक मिनट में 15-15 सीढ़ियों के चार सेट (कुल 60 सीढ़ियां) पूरा करता है तो इसका मतलब है कि उसका दिल सही काम कर रहा है। 165 युवाओं पर किया गया अध्ययन 165 युवाओं को ट्रेडमिल पर दौड़ाकर और सीढ़ियां चढ़ाकर उनका मेटाबॉलिक इक्वीवैलेंट्स (एमईटी) मापे गए। ऐसे युवा जो 40 से 45 सेकंड में सीढ़ियां चढ़ गए उनका एमईटी 9 से 10 या उससे अधिक था। कई रिसर्च में यह साबित हो चुका है कि एक्सरसाइज टेस्ट के दौरान जिन लोगों का एमईटी 10 रहता है उनमें मृत्युदर अन्य की तुलना में प्रतिवर्ष 1 प्रतिशत कम रही। हेल्दी हार्ट के लिए किस उम्र में कब कौन सी एक्सरसाइज करें 20 की उम्र तक : दौड़ें, खेलें, एरोबिक्स करें इससे आपका हार्ट अधिक पंप करेगा इस उम्र में दौड़ने, साइकिल चलाने, खेलने से मजबूत दिल की नींव पड़ती है। ये एक्सरसाइज दिल को पंप करती हैं। बच्चों को हर दिन दौड़ने, कूदने और खेलने के बहुत सारे मौके मिलने चाहिए। 6 से 17 सा...

छह ब्रीदिंग एक्सरसाइज जिन्हें रोज करेंगे तो मोटापा और तनाव घटेगा; रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ेगी

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हम दिन में करीब 25 हजार बार सांस लेते हैं। लेकिन शरीर की इस प्रक्रिया को सुधारने के लिए कई लोग कभी कुछ नहीं करते। ब्रीद : द न्यू साइंस ऑफ ए लॉस्ट आर्ट के लेखक जेम्स नेस्टर कहते हैं- कोविड काल में अगर कुछ अच्छा हुआ है तो वह सांस से जुड़ा हुआ है। लोग अब सांस लेने के तरीकों, एक्सरसाइज पर बात कर रहे हैं। नेस्टर कहते हैं- जब तक आप सही तरीके से सांस नहीं लेना जानते...तब तक स्वाभाविक रूप से सेहतमंद नहीं हो सकते। रिसर्च कहती है अगर हम सांस लेने के तरीकों को सुधार लें तो मोटापे और तनाव जैसी बीमारियों में मदद मिल सकती है। इसी तरह शरीर की परफॉर्मेंस सुधार सकते हैं। कई ऐसी ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी हैं जो तनाव और मोटापा घटाकर इम्युनिटी को बढ़ाती है। पेक्टोरल रोल 1. पेक्टोरल रोल दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं। कॉलर बोन के नीचे छाती के पास एक टेनिस अथवा मसाज बॉल रखें। अब दीवार की तरफ झुकते हुए धीरे-धीरे बॉल को आगे पीछे, दाएं-बाएं और कॉलर बोन के नीचे की तरफ कई बार रोल करें। अब इसे दूसरी तरफ करें। इंटरकॉस्टल रोल 2. इंटरकॉस्टल रोल दीवार से सटकर खड़े हो जाएं। एक हाथ ऊपर कर पंजे को दीवार पर रख ल...

चिकन को 70 डिग्री पर पकाकर खाएं; कसाई घर और बीमार चिड़ियों के सम्पर्क में आए लोगों से दूरी बनाएं

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देश के 6 राज्यों में बढ़ते बर्ड फ्लू के कहर के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एडवाइजरी जारी की है। WHO के मुताबिक, चिकन खा रहे हैं तो ध्यान रखें कि यह अच्छी तरह से पका हुआ होना चाहिए। चिकन को 70 डिग्री सेल्सियस पर पकाने से बर्ड फ्लू का वायरस खत्म हो जाता है। जानिए, बर्ड फ्लू से बचने के लिए WHO ने क्या हिदायत दी.... इनसे खुद को बचाएं WHO का कहना है, इसके केस कसाईघरों में काम करने वाले और बीमार मुर्गियों के संपर्क में आने वाले इंसान में ही मिलते हैं। इनसे खुद को बचाने की कोशिश करें। बर्ड फ्लू का वायरस (H5N1) गंभीर संक्रमण फैलाने के लिए जाना जाता है। यह पक्षियों में सांस से जुड़ी बीमारी की वजह बनता है। इसे एवियन इनफ्लुएंजा कहते हैं। क्या है बर्ड फ्लू वायरस? इसे एवियन इनफ्लुएंजा वायरस भी कहते हैं। बर्ड फ्लू के सबसे कॉमन वायरस का नाम H5N1 है। यह एक खतरनाक वायरस है जो चिड़ियों के साथ इंसान और दूसरे जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, H5N1 को 1997 में खोजा गया था। इस वायरस से संक्रमित होने पर 60% मामलों में मौत हो जाती है। इंसान में यह वायरस कैसे...

तेज हुई धरती की रफ्तार, अब धरती को अपना एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे नहीं इससे भी कम समय लग रहा

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आपने स्कूलों में पढ़ा होगा कि धरती को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 24 घंटे का समय लगता है, लेकिन नई रिपोर्ट चौंकाने वाली है। धरती अब थोड़ा तेज घूम रही है। अब इसे अपना चक्कर पूरा करने में 0.5 मिली सेकंड कम लग रहा है। डेली मेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 24 घंटे में 86,4600 सेकंड होते हैं। इतने समय तक धरती अपना एक चक्कर पूरा करती है। लेकिन पिछले साल जून से देखा गया है, इसमें 0.5 मिली सेकंड की कमी आई है। आज अर्थ रोटेशन डे है, जानिए यह दिन कब और क्यों शुरू हुआ... लियोन के पेंडुलम मॉडल ने साबित किया धरती घूमती है हर साल 8 जनवरी को अर्थ रोटेशन डे मनाया जाता है। इस दिन को सेलिब्रेट करने की वजह है, फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फौकॉल्ट का योगदान। लियोन ने 1851 में अपने एक मॉडल से साबित किया कि धरती अपनी धुरी पर कैसे घूमती है। 8 जनवरी को इनका जन्मदिन होता है, इसलिए यह दिन अर्थ रोटेशन डे के लिए चुना गया। लियोन फौकॉल्ट के पेंडुलम मॉडल का स्केच। 470 ईसा पूर्व के करीब कुछ यूनानी खगोलविदों यह दावा किया था कि धरती घूमती है, लेकिन यह नहीं साबित कर सके कि यह सूर्य का चक्कर भी लगाती है। सैकड़ों ...

वायु प्रदूषण से भारत, बांग्लादेश और पाक में हर साल 3.50 लाख गर्भपात, ये दुनिया का सबसे प्रदूषित हिस्सा

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दुनिया के जिन इलाकों की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित है वहां गर्भावस्था में दिक्कतें, गर्भपात और मृत बच्चों के जन्म लेने के मामले ज्यादा है। लैंसेट हेल्थ जर्नल के एक नए अध्ययन के मुताबिक, वायु प्रदूषण का गर्भपात से सीधा संबंध है। रिपोर्ट कहती है, वायु प्रदूषण को रोकना जरूरी है। भारत समेत पड़ोसी देशों में सालाना 3.49 लाख गर्भपात रिसर्चरों ने पाया है कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अधिक वायु प्रदूषण के कारण सालाना 3.49 लाख गर्भपात हो रहे हैं। रिसर्च के मुताबिक, अगर भारत वायु प्रदूषण को कम कर लेता है तो हर साल गर्भपात के मामलों में 7 फीसदी की कमी आ सकती है। वायु प्रदूषण गर्भनाल भी डैमेज कर सकता है वायु प्रदूषण मां और बच्चे को जोड़ने वाली गर्भनाल को डैमेज करके भ्रूण तक नुकसान पहुंचाता है। रिसर्चर्स ने दावा किया है कि दक्षिण एशिया में प्रेगनेंसी पर प्रदूषण का असर बताने वाली यह अपनी तरह की पहली स्टडी है। दक्षिण एशिया में गर्भ को नुकसान होने के मामले दुनिया में सबसे ज्यादा है। यह दुनिया का सबसे ज्यादा पीएम 2.5 प्रदूषित इलाका है। भारत में हवा डब्ल्यूएचओ के मानक से चार गुना खराब रिसर्चरों...

देश में नाक से दी जाने वाली वैक्सीन की तैयारी, भारत बायोटेक नागपुर में करेगा पहले और दूसरे चरण का ट्रायल

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कोरोना से निपटने के लिए देश में जल्द ही नाक से दी जाने वाली नेजल वैक्सीन का ट्रायल शुरू होगा। इसे 'कोवैक्सीन' तैयार करने वाली हैदराबाद की कम्पनी भारत बायोटेक ने तैयार किया है। नेजल वैक्सीन के पहले और दूसरे चरण का ट्रायल नागपुर में होगा। एक बार ही देना होगा डोज भारत बायोटेक के फाउंडर डॉ. कृष्णा एल्ला के मुताबिक, नेजल वैक्सीन को एक बार देना होगा। अब तक हुई रिसर्च में यह बेहतर विकल्प साबित हुई है। इसके लिए हमनें वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैक्सीन के ट्रायल में करीब 45 वॉलंटियर्स का चुनाव किया जाएगा। क्यों खास है नेजल वैक्सीन? देश में अब तक भारत बायोटेक की 'कोवैक्सीन' और सीरम इंस्टीट्यूट की 'कोविशील्ड' को इमरजेंसी में इस्तेमाल करने की अनुमति मिली है। कोरोना की वैक्सीन का डोज हाथ पर इंजेक्शन लगातार दिया जा रहा है, लेकिन नेजल वैक्सीन नाक में स्प्रे के जरिए दी जाएगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक के जरिए कोरोना शरीर में एंट्री करता और हालत बिगाड़ता है, इसलिए नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकती है। इम्यून रिस्पॉन्स बेहतर ह...

दुनिया का सबसे छोटा जिराफ, यह दूसरे जिराफ से 50% से भी ज्यादा छोटा; कद ने चलना-फिरना किया मुश्किल

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अमूमन एक जिराफ की लम्बाई 18 फीट होती है, लेकिन अफ्रीका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। युगांडा में वैज्ञानिकों ने दो ऐसे जिराफ खोजे हैं जो दुनियाभर में सबसे छोटे हैं। पहले न्यूबियन जिराफ की लम्बाई 9.4 फीट है। दूसरे, एंगोलेन जिराफ की लम्बाई 8.5 फीट है। दोनों को जिराफ कंजर्वेशन फाउंडेशन और स्मिथसोनियन कंजर्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट ने मिलकर खोजा है। इनकी लम्बाई इतनी कम क्यों है, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने इनकी जांच की। जांच में सामने आया कि ये जिराफ बौनेपन से जूझ रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इसे स्केलेटल डिस्प्लेसिया कहते हैं। बीमारी जिसने लम्बाई बढ़ने से रोका वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्केलेटल डिस्प्लेसिया ऐसी बीमारी है, जिसमें हडि्डयों का विकास ठीक से नहीं हो पाता। उम्र बढ़ने के बावजूद ये छोटी रह जाती हैं। यह बीमारी इंसान और जानवर दोनों को हो सकती है। हालांकि, जानवरों में इसके मामले काफी कम पाए जाते हैं। जिराफ में स्केलेटल डिस्प्लेसिया होने का यह पहला मामला है। न्यूबियन जिराफ के पैरों की लम्बाई इतनी कम है कि गर्दन के साथ तालमेल नहीं बैठ पा रहा। नतीजा, चलने-फिरने में दिक्क...

देश में 60 से अधिक उम्र के 2 में से 1 इंसान को गंभीर बीमारी, 40% विकलांगता से परेशान; 20% मानसिक समस्या से जूझ रहे

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देश में 60 साल से अधिक उम्र के दो में से एक इंसान गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। देश के 7.5 करोड़ बुजुर्ग में से 40% लोग किसी न किसी विकलांगता से जूझ रहे हैं। 20% मानसिक समस्या से परेशान हैं। 27% ऐसे भी हैं जो कई तरह की बीमारियों से लड़ रहे है। यह आंकड़ा हेल्थ मिनिस्ट्री के एक सर्वे में जारी किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन के मुताबिक, बुजुर्गों पर हुआ यह दुनिया का सबसे बड़ा सर्वे है। जिसकी पहली सर्वे रिपोर्ट जारी की गई है। सर्वे में देश के 45 साल से ऊपर के 72,250 लोगों शामिल किया गया है। 2050 में बुजुर्गों की आबादी बढ़कर 31.9 करोड़ हो जाएगी सर्वे के मुताबिक, साल 2011 की जनगणना में 60+ आबादी भारत की आबादी का 8.6% थी यानी 10.3 करोड़ लोग बुजुर्ग थे। साल 2050 तक भारत में 30 करोड़ से अधिक आबादी 60 साल से ऊपर की होगी। हर साल 3% की वृद्धि दर के साथ 2050 में वृद्धजनों की आबादी बढ़कर 31.9 करोड़ हो जाएगी। भारत में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की आबादी नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2003 तक भारत में हर महिला के औसतन 3 बच्चे होते थे। लेकिन, 2017 में लैंसेट में प्रकाशित यूनिवर्सिटी...

50% बच्चे रात में 8 घंटे लगातार नहीं सोते, बदलता रहता है स्लीपिंग पैटर्न; यह कोई समस्या नहीं

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अक्सर पेरेंट्स की शिकायत होती है कि बच्चे की नींद नहीं पूरी हो पाती। वे थोड़ी देर सोने के बाद जाग जाते हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने रिसर्च के जरिए इस सवाल का जवाब दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है, 6 माह तक की उम्र वाले 50 फीसदी बच्चे रात में लगातार 8 घंटे नहीं सोते। 44 नवजातों पर हुई रिसर्च बच्चों का स्लीप पैटर्न समझने के लिए वैज्ञानिकों ने दो हफ्ते तक 44 नवजातों पर नजर रखी। इनमें 22 लड़के और 22 लड़कियां थीं। रिसर्च के दौरान इनमें से 50% बच्चे लगातार 6 घंटे तक नहीं सोए। सलाह- पेरेंट्स को परेशान होने की जरूरत नहीं रिसर्च कहती है, बच्चों के सोने का तरीका बदलता रहता है। अगर बच्चा रात में नहीं सोता है तो पेरेंट्स को परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि हर रात इनका स्लीप पैटर्न बदल सकता है। कभी कम तो कभी ज्यादा सो सकते हैं। ऐसा रहा सोने का पैटर्न यही नवजात जब 6 महीने के हो गए तब इनकी मांओं से सवाल पूछे गए। उन्हें एक डायरी दी गई। 13 रातों तक बच्चे ने लगातार सबसे लम्बी नींद कब ली, इसे डायरी में लिखना था। औसतन मांओं का जवाब था कि उनका बच्चा लगातार 5 रातों तक 6 घंटे सोया। मात्र 3 रातों तक वह 8 घ...

देश में कोरोना की दो वैक्सीन को मिली मंजूरी, जानिए वैक्सीन लगवाने के लिए कैसे कराना होगा रजिस्ट्रेशन

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करीब 10 दिन बाद देश में कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीन प्रोग्राम शुरु हो सकता है। 3 जनवरी को ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने कोरोना की दो वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है। इसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की 'कोवीशील्ड' और भारत बायोटेक की 'कोवैक्सीन' शामिल है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के मुताबिक, वैक्सीन की पहली डोज फ्रंटलाइन वर्कर को दी जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के मुताबिक, टीकाकरण की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। वैक्सीन लगवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। जानिए, कैसे रजिस्ट्रेशन कराएं और राज्यों की तैयारियां कैसी हैं.... वैक्सीन के लिए ऐसे करना होगा रजिस्ट्रेशन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन के लिए गूगल प्ले स्टोर से Co-win ऐप डाउनलोड करना होगा। ध्यान रखें, अभी इस ऐप को डेवलप किया जा रहा है। सरकार की ओर से घोषणा जारी होने के बाद ही इसे डाउनलोड करना होगा। ऐप आपका पर्सनल डाटा एक्सेस कर सके, आपको इसकी मंजूरी देनी होगी। केंद्र सरकार की ओर से घोषणा होने के बाद इस ऐप की मदद से रजिस्ट्रेशन करा सक...

घर में लगाएं पिप्पली, अश्वगंधा और गिलोय जैसे पौधे ये डेंगू-मलेरिया से बचाएंगे और हृदय रोगों का खतरा घटाएंगे

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आयुर्वेद में ऐसे कई पौधे बताए गए हैं जिनकी पत्तियों और जड़ों से कई तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। इनमें से कुछ पौधों को घर के गार्डन में उगा सकते हैं। इन्हें लगाना भी आसान है और अधिक देखभाल की जरूरत भी नहीं होती। नए साल में अपने बगीचे में ऐसे पौधे भी लगाएं जो आपको रोगों से बचाएं। बागवानी विशेषज्ञ आशीष कुमार बता रहे हैं, घर के बगीचे में औषधीय पौधे कैसे लगाएं, इन्हें कैसे इस्तेमाल करें और ये कितनी तरह से फायदा पहुंचाते हैं... ब्राह्मी ब्राह्मी : दिमाग तेज करती है और बच्चों में एकाग्रता बढ़ाती है कैसे लगाएं : इसका पौधा जमीन पर फैलकर बड़ा होता है, यह आसानी से किसी भी मिट्टी में लग जाता है। कैसे मिलेगा फायदा : इसकी 4-5 पत्तियों को सुबह खाली पेट चबाकर, पानी पिएं। रस निकालकर भी ले सकते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए सर्दी में पत्तियों के रस को काली मिर्च के साथ लें। फायदे : ब्राह्मी दिमाग के लिए अधिक फायदेमंद है। बच्चों में एकाग्रता की कमी और बड़ी उम्र में भूलने की बीमारी में इसकी पत्तियों को चबाकर खाते हैं तो फायदा होता है। गिलोय गिलोय : डेंगू-चिकनगुनिया के मरीजों...