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Showing posts from October, 2020

10 साल में ब्रेस्ट कैंसर के मामले 30% तक बढ़े, ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखें तो अलर्ट हो जाएं; शुरुआती स्टेज में इलाज आसान है

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देश में पिछले 10 साल में कैंसर के मामले 30 फीसदी तक बढ़े हैं। हर साल अक्टूबर माह को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जाता है। बावजूद इसके देश में 80 फीसदी महिलाएं डॉक्टर्स के पास कैंसर की तीसरी या चौथी स्टेज में पहुंचती हैं। मेदांता की ब्रेस्ट कैंसर सविसेज की डायरेक्टर डॉ. कंचन कौर कहती हैं, भारत में ज्यादातर महिलाएं मानती हैं कि परिवार में ब्रेस्ट कैंसर कभी किसी को नहीं हुआ, इसलिए मुझे भी नहीं हो सकता। यह गलत धारणा है। ब्रेस्ट कैंसर के 90 फीसदी मामले ऐसी महिलाओं में सामने आते हैं, जिनके घर में कभी किसी को कैंसर नहीं हुआ। ब्रेस्ट कैंसर से कैसे बचें और किन बातों का ध्यान रखें, बता रही हैं डॉ. कंचन कौर... ब्रेस्ट में ये बदलाव दिखने पर अलर्ट हो जाएं? स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकार या स्किन में बदलाव, स्तन का सख्त होना, यहां पर किसी घाव का लम्बे समय ठीक न होना और निप्पल से रक्त या लिक्विड निकलना इसके लक्षण हैं। इसके अलावा स्तन में दर्द, बाहों के नीचे भी गांठ होना भी स्तन कैंसर के संकेत हैं। हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद जरूरी है...

असम में 75 हजार रु. किलो बिकने वाली गोल्ड चायपत्ती की कहानी, जानिए हर साल यह क्यों रिकॉर्ड बनाती है

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असम में खास तरह की दुर्लभ प्रजाति वाली चायपत्ती ने फिर रिकॉर्ड बनाया है। मनोहारी गोल्ड टी खास तरह की चायपत्ती है, जिसे गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र पर 75 हजार रुपए प्रति किलो की कीमत पर बेचा गया है। यह असम में इस साल दर्ज चाय की सबसे ऊंची कीमत है। इस चायपत्ती की पैदावार करने वाले मनोहारी टी स्टेट का कहना है, इस साल इसकी केवल 2.5 किलो पैदावार हुई। इसमें से 1.2 किलो की नीलामी हुई है। महामारी के बीच चाय की इतनी कीमत मिलना इंडस्ट्री के लिए राहत की बात है। ये तो हुई नीलामी की बात अब ये भी समझ लीजिए कि यह चायपत्ती इतनी खास क्यों है... चाय को तोड़ने का तरीका भी है अलग मनोहारी टी स्टेट के डायरेक्टर राजन लोहिया कहते हैं, ये खास तरह की चायपत्ती होती है जिसे सुबह 4 से 6 बजे के बीच सूरज की किरणें जमीन पर पड़ने से पहले तोड़ा जाता है। इसका रंग हल्का मटमैला पीला होता है। यह चायपत्ती अपनी खास तरह की खुशबू के लिए जानी जाती है। इसमें कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ऐसे तैयार होती है पिछले 63 साल से असम की टी-इंडस्ट्री से जुड़े चंद्रकांत पराशर कहते हैं, इस खास तरह की चायपत्ती की पैदावार 30 ए...

वर्कआउट के बाद चक्कर, उबकाई, पेट और सीने के दर्द से बचना है तो पानी कब-कितना पिएं एक्सपर्ट से समझें

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फिट रहना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है, वर्कआउट के दौरान पानी पीने का ध्यान रखना। वर्कआउट से पहले, उस दौरान और बाद में कितना पानी पिएं, इसे समझना जरूरी है वरना इसका बुरा असर शरीर पर पड़ेगा। अधिक पानी पीने पर पेट दर्द और उबकाई हो सकती है और पानी कम लेते हैं तो चक्कर आ सकते हैं। साओल हार्ट सेंटर, नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. बिमल छाजेड़ बता रहे हैं वर्कआउट से पहले, एक्सरसाइज के दौरान और वर्कआउट के बाद कब-कितना पानी पिएं। वर्कआउट से पहले : पानी उतना पिएं कि गला तर हो जाए कुछ लोग वर्कआउट शुरू करने से तुरंत पहले पानी पीते हैं ताकि वर्कआउट के दौरान पानी की ज़रूरत न महसूस हो। वर्कआउट के लिए बॉडी का हाइड्रेटेड रहना बेशक ज़रूरी है लेकिन ध्यान रहे कि इसके तुरंत पहले पानी पीने से स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। सही मायनों में पानी वर्कआउट से आधा घंटा पहले पीना चाहिए। एक साथ अधिक पानी न पिएं क्योंकि वर्कआउट करने में परेशानी आ सकती है। केवल गला तर करने लायक़ ही पानी लें। वर्कआउट के बाद : 25 मिनट बाद ही पानी पिएं वर्कआउट से पसीना बहता है और सांस फूलती है, जिसके कारण गला भी सूखता है। शरीर गर्म हो जाता ह...

डॉक्टर्स ने मरीज की आंख से निकाला 20 जिंदा कीड़ों का एक गुच्छा, एक साल से परेशान था मरीज

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चीन में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 60 साल के एक मरीज की आंखों में कीड़ों का गुच्छा मिला है। ये सभी जिंदा थे। डॉक्टर्स ने आंख की पलक से 20 जिंदा कीड़े निकाले। कुछ महीने पहले आंखों में अजीब सी हरकत महसूस होने पर मरीज डॉक्टर्स से सलाह लेने पहुंचा था। यहां सर्जरी के दौरान चौंकाने वाली बात सामने आई। मरीज को थकान महसूस हो रही थी चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये जिंदा कीड़े मरीज की आंख में करीब सालभर से थे। मरीज को आंखों में अजीब सा महसूस होता था। उसे लगता था कि थकान के कारण ऐसा हो रहा है। डॉक्टर्स ने आंखों की जांच की तो सामने आया कि दाईं पलक के नीचे छोटे-छोटे कीड़ों का एक गुच्छा मिला। आउटडोर वर्कआउट के दौरान पहुंचे कीड़े कीड़ों को निकालने वाले डॉक्टर्स का मानना है कि जो कीड़े पलकों में मिले हैं उनमें लार्वा भी थे। मरीज का नाम वैन है और उसे स्पोर्ट्स एक्टविटी का काफी शौक है। ये कीड़े मरीज की आंखों में तब पहुंचे जब वह आउटडोर वर्कआउट करता था। धीरे-धीरे मरीज की हालत बिगड़ती गई और बर्दाश्त से बाहर होने पर वह पूर्वी चीन के सूझोयू म्यूनिसिपल हॉस्पिटल पहुंचा। मरीज ने डॉक्टर से कहा, वह पिछल...

एक साल में 33 हजार किमी. का चक्कर लगाकर लौटी चिड़िया, अब इन्हें रेडियो टैग से बचाने की तैयारी; जानिए कैसे

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एक साल में 33 हजार किलोमीटर का चक्कर लगाकर एक चिड़िया मणिपुर वापस लौटी है। इस चिड़िया का नाम चियूलान है। नवम्बर 2019 में ऐसी पांच चिड़िया मणिपुर के तमेंगलोंग जिले से छोड़ी गई थीं। इनमें से तीन की मौत हो गई। लोकेशन की मॉनिटरिंग करने के लिए इनमें रेडियो-टैग लगाया गया था। चियूलान के अलावा एक और चिड़िया इरांग भी हाल ही में वापस लौटी। इरांग ने 29 हजार किलोमीटर की दूरी पूरी की है। पिछले साल इनके उड़ान भरने से पहले मणिपुर के वन विभाग ने भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर पांच चिड़ियों में रेडियो टैग लगाया था। 4 महीने भारत में रहते हैं कबूतर के आकार की आमूर फॉल्कंस एक प्रवासी पक्षी है। यह साइबेरिया का रहने वाली है। यह चिड़िया सर्दियों से पहले भारत के लिए उड़ान भरती है और उत्तर-पूर्व भारत में ये करीब दो महीने तक रहती है। इसके बाद ये दक्षिण अफ्रीका के लिए उड़ान भरती है। वहां, ये करीब 4 महीने रहती है। क्यों शुरू हुई महिम और कैसे काम करता है रेडियो टैग प्रवासी पक्षियों की घटती संख्या को रोकने के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने यह मुहिम शुरू की थी। इसमें आमूर फॉल्कंस को खासतौर पर शामिल किया गया है। पक्षियों ...

कैसे बनती है चांदनी और चांद की रोशनी में क्यों रखते हैं खीर, एक्सपर्ट से समझें इसका विज्ञान

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आज शरद पूर्णिमा है। चंद्रमा बच्चे के लिए चंदा मामा, विज्ञान के लिए धरती का एकमात्र उपग्रह और मान्यताओं में अमृत वर्षा करने वाला देवता कहा गया है। ग्रंथों के मुताबिक, शरद पूर्णिमा की रात में आकाश से अमृत बरसता है। सूरज की झुलसाने वाली गर्मी के बाद पूर्णिमा की रात में पूर्ण चंद्र की किरणें शीतलता बरसाती हैं, जो तन-मन की उष्णता कम करती है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है। पूर्णिमा तिथि का स्वामी भी स्वयं चंद्रमा ही है, इसलिए उसकी किरणों से इस रात अमृत की वर्षा होने की मान्यता है। आयुर्वेद के अनुसार रातभर इसकी रोशनी में रखी खीर खाने से रोग दूर होते हैं। चांद की रोशनी से हमारी सेहत कैसे प्रभावित होती है, यही समझने के लिए दैनिक भास्कर ऐप ने विशेषज्ञों से बात की। इंटर-यूनिवर्सिटी ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के प्रोफेसर्स और आयुर्वेद विशेषज्ञ से जानिए इसकी पूरी कहानी... कैसे बनती है चांदनी एस्ट्रोनॉमी विशेषज्ञ प्रो. श्याम टंडन के मुताबिक, बारिश के बाद पहली पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के पर्व के रूप में मनाया जाता है। बारिश का दौर खत्म होने के कारण ...

WHO ने कहा- कोरोना महामारी नहीं, संक्रमितों को आइसोलेशन और क्वारेंटाइन होने की जरूरत भी नहीं? जानें सच

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क्या हो रहा है वायरल : दावा किया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) ने पहले कोरोना वायरस को महामारी बताकर अब अपनी ही बात से यू-टर्न ले लिया है। वायरल मैसेज के साथ एक ही कार्यक्रम के अलग-अलग वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। देखने पर ये एक कॉन्फ्रेंस लगती है, जिसमें वक्ता दावा कर रहे हैं कि कोरोना वायरस महामारी नहीं है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि ये लोग WHO के पदाधिकारी हैं। ## वीडियो के साथ मैसेज वायरल हो रहा है - Breaking news: WHO has completely taken a U-turn and now says that Corona patient neither needs to be isolated, nor quarantined, nor needs social Distancing, and it cannot even transmit from one patient to another। मैसेज का हिंदी अनुवाद है - WHO ने पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया है। अब WHO का कहना है कि कोरोना रोगी को आईसोलेट या क्वारेंटाइन होने की जरूरत नहीं है। सोशल डिस्टेंसिंग की भी अब कोई जरूरत नहीं है। कोरोना एक मरीज से दूसरे मरीज को संक्रमित भी नहीं करता। ## और सच क्या है ? इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई हालिया खबर नहीं मिली। जिससे पुष्टि होती हो कि WHO ने ...

घर में लगाएं पिप्पली, अश्वगंधा और गिलोय जैसे पौधे ये डेंगू-मलेरिया से बचाएंगे और हृदय रोगों का खतरा घटाएंगे

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आयुर्वेद में ऐसे कई पौधे बताए गए हैं जिनकी पत्तियों और जड़ों से कई तरह की बीमारियों का इलाज किया जाता है। इनमें से कुछ पौधों को घर के गार्डन में उगा सकते हैं। इन्हें लगाना भी आसान है और अधिक देखभाल की जरूरत भी नहीं होती। बागवानी विशेषज्ञ आशीष कुमार बता रहे हैं, घर के बगीचे में औषधीय पौधे कैसे लगाएं, इन्हें कैसे इस्तेमाल करें और ये कितनी तरह से फायदा पहुंचाते हैं... ब्राह्मी ब्राह्मी : दिमाग तेज करती है और बच्चों में एकाग्रता बढ़ाती है कैसे लगाएं : इसका पौधा जमीन पर फैलकर बड़ा होता है, यह आसानी से किसी भी मिट्टी में लग जाता है। कैसे मिलेगा फायदा : इसकी 4-5 पत्तियों को सुबह खाली पेट चबाकर, पानी पिएं। रस निकालकर भी ले सकते हैं। इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए सर्दी में पत्तियों के रस को काली मिर्च के साथ लें। फायदे : ब्राह्मी दिमाग के लिए अधिक फायदेमंद है। बच्चों में एकाग्रता की कमी और बड़ी उम्र में भूलने की बीमारी में इसकी पत्तियों को चबाकर खाते हैं तो फायदा होता है। गिलोय गिलोय : डेंगू-चिकनगुनिया के मरीजों के लिए फायदेमंद कैसे लगाएं : गिलोय बेल है.जो कटिंग से हर तरह की ...

पहले हफ्ते में कोरोना के 5 या इससे अधिक लक्षण दिखे तो मरीज में लम्बे समय तक वायरस का असर दिख सकता है

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कोरोना का संक्रमण होने के बाद पहले हफ्ते में पांच या इससे अधिक तरह के लक्षण दिखते हैं तो यह इशारा है कि मरीज में लम्बे समय कोरोना का असर रह सकता है। यह दावा किंग्स कॉलेज लंदन की रिसर्च में किया गया है। रिसर्च कहती है, संक्रमण के बाद अगर पहले हफ्ते में थकान, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ, आवाज भारी होना, मांसपेशियों और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं तो मरीज लम्बे समय के कोरोना से परेशान रह सकता है। इसे लॉन्ग कोविड भी कहते हैं। लम्बे समय कोविड का साइडइफेक्ट रिसर्च कहती है, ऐसे मरीज जो कोरोना का संक्रमण होने के 4 से 8 हफ्ते बाद तक रिकवर नहीं कर पाते उनमें पोस्ट कोविड का खतरा बढ़ता है। पोस्ट कोविड यानी लम्बे समय तक कोरोना के साइडइफेक्ट से जूझना। रिकवरी के बाद ऐसे मरीजों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ, मांसपेशियों में दर्द और अधिक थकान जैसे लक्षण दिखते हैं। 40 हजार मरीजों पर हुई रिसर्च ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने कोरोना के 40 हजार मरीजों पर रिसर्च की। इसमें ब्रिटेन और स्वीडन के मरीज शामिल किए गए। इनमें से 20 फीसदी ने कहा, संक्रमण के 1 माह बाद भी पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाए। 190 मरीज...

फ्लू की वैक्सीन कोरोना से संक्रमण का खतरा 39% तक घटा सकती है, अलर्ट रहें क्योंकि सर्दी में फ्लू और कोरोना दोनों का खतरा

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फ्लू की वैक्सीन कोरोना के संक्रमण को घटाने में मदद कर सकती है। कोरोना के मरीजों में यह कैसे काम करेगी, वैज्ञानिकों ने इसे भी समझाया है। रिसर्च करने वाली नीदरलैंड्स की रेडबाउंड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के इम्यूनोलॉजिस्ट मिहाई नेटी कहते हैं, 2019-2020 की सर्दियों में जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन लगी थी उन पर कोरोना के असर को जाना गया। रिसर्च में सामने आया कि जिन लोगों को फ्लू की वैक्सीन दी गई उनमें कोरोना से संक्रमित होने का खतरा 39 फीसदी तक कम था। यह है रिसर्च का साइंस वैज्ञानिकों का कहना है, फ्लू की वैक्सीन शरीर में इम्युनिटी यानी वायरस से लड़ने की क्षमता बढ़ाती है। यह खास तरह के साइटोकाइन स्टॉर्म को भी रोकने की कोशिश करती है। साइटोकाइन स्टॉर्म ऐसी स्थिति को कहते हैं, जब कोरोना का संक्रमण होने के बाद बीमारी से लड़ने वाला इम्यून सिस्टम बेकाबू होने लगता है। यह शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। सर्दियों में फ्लू की वैक्सीन क्यों जरूरी अमेरिकी वैज्ञानिकों का कहना है, सर्दियों में कोरोना और फ्लू दोनों तरह के वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने इस स्थिति को 'ट्विनडेमिक...

हार्ट अटैक से मौत का खतरा कम करना है तो मछली, अखरोट, सोयाबीन और बादाम खाएं

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हृदय रोगों को रोकना चाहते हैं या हार्ट अटैक के बाद मौत का खतरा घटाना चाहते हैं तो मछली, अखरोट, सोयाबीन और बादाम खाएं। ऐसा खानपान दिल को दुरुस्त रखता है। इस पर वैज्ञानिकों ने भी मुहर लगाई है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में पब्लिश रिसर्च कहती है, रोजाना डाइट में ओमेगा-3 आइकोसा-पेंटानोइक एसिड और अल्फा-लिनोलिक एसिड की अधिक मात्रा वाले फूड खाते हैं तो दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हार्ट अटैक से जूझ रहे 944 मरीजों पर हुई रिसर्च रिसर्च करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिकों के मुताबिक, ओमेगा-3 आइकोसा-पेंटानोइक एसिड और अल्फा-लिनोलिक एसिड में ऐसी खूबियां जो दिल को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। यह रिसर्च 944 हार्ट अटैक के सीरियस मरीजों पर कई गई। ये ऐसे मरीज थे जिनमें हार्ट की मेजर आर्टरी ब्लॉक थी। ब्लड सैम्पल में ओमेगा-3 का लेवल देखा गया रिसर्चर डॉ. एलेक्स साला-विला के मुताबिक, रिसर्च के दौरान 78 फीसदी पुरुषों हॉस्पिटल में भर्ती करने के दौरान ब्लड सैम्पल लिया गया। ब्लड में ओमेगा-3 का स्तर देखा गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन मरीजों में हार्ट अटैक के समय ओमेगा-3 का लेवल ज्यादा था उनकी ...

दर्द वाली जगह पर इंजेक्शन से दी दवा; चक्कर आना, पेट दर्द, उल्टी जैसे साइड इफेक्ट नहीं दिखे

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भारतीय वैज्ञानिकों ने गठिया के मरीजों को दवा के साइड इफेक्ट से बचाने का नया तरीका खोजा है। दवा को सीधे दर्द और सूजन वाली जगह इंजेक्ट करने पर मरीजों में उल्टी, सिरदर्द जैसे साइड इफेक्ट नजर नहीं आए। साथ ही इसका असर भी लंबे समय तक रहा। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भूपिंदर कपूर ने इस पर रिसर्च की है। वो कहते हैं कि गठिया में आमतौर पर मरीजों को सल्फापायरीडाइन दवा दी जाती है। इसके कई साइडइफेक्ट होते हैं। दवा इंजेक्ट करने से वो सीधे दर्द वाले हिस्से तक पहुंचती है और यह तरीका सुरक्षित है। उन्होंने बताया," सल्फापायरीडाइन गठिया की तीसरी सबसे पुरानी दवा है। लंबे समय तक इस दवा को लेने से चक्कर आना, पेट में दर्द, उल्टी होना, जी मिचलाना और स्किन पर चकत्ते पड़ने जैसे साइडइफेक्ट नजर आते हैं। दर्द वाली जगह पर दवा इंजेक्ट करने से यह शरीर में फैले बिना प्रभावित हिस्से को फायदा पहुंचाती है।इस नए तरीके का ट्रायल भी किया जा चुका है।" असर नजर आया,सूजन कम हुई रिसर्च के दौरान आर्थराइटिस से जूझ रहे चूहे को जब यह दवा नए तरीके से दी गई तो उसमें सूजन कम हुई। पता चला कि पुराने तरीके...

20 से 29 साल की उम्र सबसे बेहतर है लेकिन 30 के बाद बच्चा प्लान करें तो ये बातें ध्यान रखें

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मां बनने के लिए एक जरूरी फैक्टर उम्र भी होता है। मां बनने की सही उम्र को टालना कई तरह से मुश्किलें पैदा करता है। घटती उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में भी कमी आती है और रिस्क बढ़ता है। कोलंबिया एशिया अस्पताल गाज़ियाबाद की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीता दिवाकर बता रही हैं, बढ़ती उम्र में मां बनें तो किन बातों का ध्यान रखें 20-29 साल की उम्र इस उम्र में बॉडी फर्टाइल होती है। इसलिए यह उम्र प्रेग्नेंसी के लिए सबसे बेहतर मानी गई है। दरअसल, इस उम्र में अच्छी क्वालिटी वाले एग्स सबसे अधिक होते हैं। प्रेग्नेंसी के जोखिम भी बहुत कम होते हैं। 30-39 साल की उम्र जब महिलाएं इस उम्र में प्रवेश करती हैं, तो 35 के बाद प्रजनन क्षमता में और गिरावट आती है, इस कारण एग्स की संख्या में कमी आती है। गर्भपात और आनुवांशिक असामान्यता का जोखिम 35 वर्ष की आयु के बाद और बढ़ना शुरू हो जाता है। इस दौरान नॉर्मल डिलीवरी होने में मुश्किलें आती हैं। शिशु को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गर्भपात होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में जांच के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ कभी-कभी मां और उसके बच्चे के लिए ...

बच्चों का मोटापा बढ़ा रहा यूट्यूब, इन्हें खाने से जुड़े 400 से ज्यादा वीडियो दिखा रहा जो 90% तक नुकसान पहुंचा रहे

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अमेरिकी पीडियाट्रिक्स जर्नल में बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पब्लिश हुई है। यहां यू-ट्यूब बच्चों को खाने से जुड़े 400 से ज्यादा ऐसे वीडियो दिखा रहा है, जिसमें उनके पसंदीदा शक्कर वाले पेय पदार्थ और जंक फूड के विज्ञापन हैं। इन विज्ञापन को देखकर बच्चे ऐसी चीजें खा रहे हैं जिससे उनमें तेजी से मोटापा बढ़ रहा है। भारत में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. आरती आनंद का कहना है कि बच्चे स्क्रीन पर जंक फूड वाले वीडियो देखने के बाद पेरेंट्स से खाने-पीने के लिए वही डिमांड करते हैं। बच्चों में यह आदत उम्र बढ़ने के साथ-साथ और तेजी से बढ़ती जाती है। नामी कम्पनियां बच्चों को बना रहीं निशाना चौंकाने वाली बात यह भी है कि इन वीडियो में दिखाए जाने वाले 90% विज्ञापन ऐसे हैं, जो सेहत के लिए खतरनाक माने गए हैं। इनमें कई नामी कंपनियों के प्रोडक्ट और नामी ब्रांड शामिल हैं। इनमें दिखाए जाने वाले मिल्कशेक, फ्रेंच फ्राई, सॉफ्टड्रिंक्स, चीजबर्गर लाखों बच्चों की पसंद बन गए हैं। कोरोनाकाल में जब बच्चों के स्कूल्स बंद हैं और उनका स्क्रीन टाइम बढ़ गया है, तब ये नामी कंपनि...

नवजातों के आंखों की रोशनी लौटाने वाला आईड्रॉप खोजा गया, यह उस बैक्टीरिया को खत्म करेगा जिस पर दवाएं बेअसर हो रहीं

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वैज्ञानिकों ने ऐसे आई ड्रॉप की खोज की है जो नवजातों में अंधेपन की समस्या को दूर कर सकता है। इसकी वजह नाइसेरिया गोनोरोहिया नाम का बैक्टीरिया है जिस पर दवाओं का असर नहीं हो रहा। यह बैक्टीरिया संक्रमित मां से नवजात में पहुंचता है और अंधेपन का कारण बनता है। आई ड्रॉप को तैयार करने वाली ब्रिटेन की किंग्सटन यूनिवर्सिटी का दावा है कि इससे आंखों में बैक्टीरिया के संक्रमण को ठीक किया जा सकता है। यह दवा नवजातों में जलन भी नहीं करती। मां से बच्चे में फैलता है यह बैक्टीरिया वैज्ञानिकों का कहना है, नाइसेरिया गोनोरोहिया नाम का बैक्टीरिया सेक्सुअल ट्रांसमिशन के दौरान पिता से मां में पहुंचता है और मां से यह नवजात में आता है। इस बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक दवाएं दिन-प्रतिदिन बेअसर साबित हो रही हैं। इसका असर नवजातों की आंखों पर पड़ रहा है। अगर इसके संक्रमण का इलाज नहीं होता है तो नवजात की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। एंटीमाइक्रोबियल एजेंट मोनोकाप्रिन सस्ता विकल्प वैज्ञानिकों का कहना है, आई ड्रॉप में एंटी माइक्रोबियल एजेंट मोनोकाप्रिन का प्रयोग किया है। लम्बे समय से इसका अध्ययन किया जा रहा था। रिसर्च...